126 पन्नों की रिपोर्ट में खुला हादसे का राज… आखिर क्यों फटा वेदांता पावर प्लांट का बॉयलर?
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सक्ती, छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009
केंद्रीय जांच समिति ने केंद्र और राज्य सरकार को सौंपी रिपोर्ट, तकनीकी खराबी को बताया हादसे की मुख्य वजह
सक्ती ACGN:- छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले स्थित वेदांता पावर प्लांट में 14 अप्रैल 2026 को हुए भीषण बॉयलर हादसे की जांच रिपोर्ट सामने आ गई है। केंद्रीय जांच समिति ने अपनी 126 पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट केंद्र और राज्य सरकार को सौंप दी है। रिपोर्ट के अनुसार हादसे की प्राथमिक वजह प्राइमरी एयर फैन (Primary Air Fan) में आई यांत्रिक खराबी रही, जिसके कारण बॉयलर के भीतर हवा और ईंधन का संतुलन बिगड़ गया और अंततः भीषण विस्फोट जैसी स्थिति बन गई।

जांच रिपोर्ट के मुताबिक तकनीकी खराबी के कारण पानी और भाप का प्रवाह अस्थिर हो गया। इसके बाद भट्टी के भीतर बिना जला ईंधन अचानक प्रज्वलित हुआ, जिससे ‘फर्नेस पफ’ और ‘वॉटर हैमर’ जैसी स्थिति उत्पन्न हुई। इस तीव्र दबाव के चलते बॉयलर के सामने लगे 14 डाउनकमर सप्लाई पाइप एक साथ क्षतिग्रस्त हो गए। परिणामस्वरूप अत्यधिक दबाव वाली गर्म भाप और उबलता पानी तेजी से बाहर निकला, जिसकी चपेट में वहां कार्यरत मजदूर आ गए।

इस दर्दनाक हादसे में 35 श्रमिक प्रभावित हुए, जिनमें 25 मजदूरों की मौत हो गई, जबकि 10 अन्य गंभीर रूप से घायल हुए थे। मृतक और घायल श्रमिक छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, झारखंड और पश्चिम बंगाल के निवासी थे, जो रोजगार की तलाश में यहां काम करने आए थे।
हादसे के बाद पुलिस ने मामले में वेदांता के चेयरमैन अनिल अग्रवाल सहित कंपनी के प्रबंधन से जुड़े कई अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। घटना के बाद पूरे औद्योगिक क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और औद्योगिक मानकों को लेकर गंभीर सवाल उठे थे।
वेदांता प्रबंधन ने हादसे के बाद मृतक श्रमिकों के परिजनों को ₹35-35 लाख की आर्थिक सहायता तथा परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की घोषणा की थी। वहीं घायल श्रमिकों के लिए ₹15 लाख की सहायता और बेहतर उपचार की व्यवस्था का आश्वासन दिया गया। इसके अलावा केंद्र और राज्य सरकार ने भी मृतकों के परिजनों को ₹7-7 लाख तथा घायलों को ₹50 हजार की सहायता राशि देने की घोषणा की थी।
औद्योगिक सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस जांच रिपोर्ट के आधार पर भविष्य में देशभर के ताप विद्युत संयंत्रों में सुरक्षा मानकों की समीक्षा और तकनीकी निरीक्षण की प्रक्रिया को और अधिक सख्त किया जा सकता है, ताकि इस प्रकार की दुर्घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
प्रदीप मिश्रा
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