ओड़िया सिनेमा के विकास के लिए जल्द आएगी नई फिल्म नीति, कलाकारों के हितों की होगी सुरक्षा
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भुवनेश्वर, ओडिशा
By ACGN 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- स्वामी बिजया नंद जी महाराज
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने 35वें और 36वें राज्य फिल्म पुरस्कार समारोह में की घोषणा, ओड़िया फिल्मों को सिनेमाघरों से हटाने पर होगी सख्त कार्रवाई
भुवनेश्वर ACGN:- ओड़िया सिनेमा के सर्वांगीण विकास और कलाकारों के संरक्षण के लिए ओडिशा सरकार जल्द ही नई फिल्म नीति लागू करने जा रही है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने शुक्रवार को आयोजित 35वें और 36वें राज्य फिल्म पुरस्कार समारोह में यह घोषणा करते हुए कहा कि ओड़िया सिनेमा राज्य की पहचान और संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है, जिसके विकास के लिए सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है।
लोकसेवा भवन कन्वेंशन सेंटर में आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ओड़िया फिल्म जगत से जुड़े कलाकारों, निर्माताओं और तकनीकी विशेषज्ञों के साथ लगातार संवाद कर रही है। नई फिल्म नीति के माध्यम से कलाकारों को संरक्षण देने, गुणवत्तापूर्ण फिल्मों के निर्माण को बढ़ावा देने और तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि यदि किसी अन्य भाषा की फिल्मों को प्रदर्शित करने के लिए ओड़िया फिल्मों को सिनेमाघरों से हटाया गया तो सरकार इस मामले में सख्त कार्रवाई करेगी। उन्होंने कहा कि स्थानीय भाषा और संस्कृति से जुड़ी फिल्मों को उचित स्थान और सम्मान मिलना चाहिए।
उन्होंने ओड़िया सिनेमा के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 1936 में ओडिशा को अलग राज्य का दर्जा मिला था और उसी वर्ष मोहन सुंदर देव गोस्वामी द्वारा पहली ओड़िया फिल्म “सीता विवाह” का निर्माण किया गया था। इसके बाद “माया मृग”, “भूख”, “शेष श्रवण” और “हाकिम बाबू” जैसी फिल्मों ने ओड़िया संस्कृति और समाज को व्यापक पहचान दिलाई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हाल के वर्षों में “दमन”, “प्रतीक्षा”, “शाला बूढ़ा”, “पुष्करा”, “बऊ तू भूत” और “बड़ बहु” जैसी फिल्मों ने स्थानीय कहानियों को राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाकर ओड़िया सिनेमा को नई पहचान दी है। उन्होंने इसे ओड़िया सिनेमा का नया सूर्योदय बताया।
उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी के फिल्मकार सिनेमेटोग्राफी, साउंड डिजाइन और वीएफएक्स जैसे क्षेत्रों में विश्वस्तरीय तकनीक अपना रहे हैं। कलिंग स्टूडियो भी डिजिटल और पोस्ट प्रोडक्शन हब के रूप में विकसित हो रहा है, जहां फिल्म निर्माण से जुड़ी आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने प्रायोजकों से ओड़िया समाज, संस्कृति और परंपराओं पर आधारित आधुनिक फिल्मों को सहयोग देने की अपील की। उन्होंने दर्शकों से भी अधिक संख्या में सिनेमाघरों में पहुंचकर ओड़िया फिल्मों को देखने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि ओड़िया सिनेमा में अपनी अलग पहचान और संस्कृति की झलक दिखाई देती है। सरकार के पास विकास कार्यों के लिए संसाधनों की कमी नहीं है और फिल्म जगत से जुड़े लोगों के सुझावों को स्वीकार कर आगे बढ़ा जाएगा।
प्रदीप मिश्रा (प्रधान संपादक)
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