देवपुर में औषधीय वनस्पतियों की पहचान पर कार्यशाला, 80 प्रजातियों की हुई जानकारी
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बलौदाबाजार, छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009
वैद्यों, वनकर्मियों और छात्रों ने लिया भाग, वनौषधियों के संरक्षण और उपयोग पर विशेषज्ञों ने दी जानकारी
बलौदाबाजार ACGN:- वनमंडल बलौदाबाजार के देवपुर परिक्षेत्र में औषधीय वनस्पतियों की पहचान और उनके महत्व को लेकर एक दिवसीय बॉटनाइजेशन कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला वन मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देश और प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख अरुण कुमार पांडेय के मार्गदर्शन में आयोजित हुई।
कार्यशाला का उद्देश्य वन क्षेत्रों में पाए जाने वाले औषधीय पौधों की पहचान करना, उनके पत्ते, तना, जड़, छाल, फल और फूल के आधार पर वर्गीकरण की जानकारी देना तथा उनके औषधीय गुणों से लोगों को अवगत कराना रहा।

कार्यक्रम के दौरान अर्जुन, आंवला, बहेड़ा, बेल, काली मुसली, हाथीपांव, दूधी, भुईनीम, सतावर, खरहर, ठेलका, नरनारी और गरुड़ सहित करीब 80 से अधिक औषधीय वनस्पतियों की पहचान कराई गई।
विशेषज्ञों ने बताया कि जंगलों में मौजूद कई वनस्पतियां मानव स्वास्थ्य के लिए उपयोगी हैं। इन पौधों के संरक्षण के साथ पारंपरिक ज्ञान को आगे बढ़ाना जरूरी है। उन्होंने प्रकृति आधारित जीवनशैली और वनस्पतियों के महत्व पर भी विस्तार से जानकारी दी।
कार्यशाला में वनमंडल बलौदाबाजार, वनमंडल कवर्धा और उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के अधिकारी-कर्मचारियों के साथ पारंपरिक वनौषधीय ज्ञान रखने वाले वैद्य, वन प्रबंधन समिति के सदस्य, बारनवापारा के गाइड और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं शामिल हुए।
वन मंडल अधिकारी बलौदाबाजार धम्मशील गणवीर ने कहा कि इस कार्यशाला का उद्देश्य केवल औषधीय ज्ञान को साझा करना नहीं बल्कि समाज में पेड़-पौधों और वन संपदा के महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाना भी है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण में जनभागीदारी बेहद जरूरी है।
प्रदीप मिश्रा
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