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भाजपा नेता के संरक्षण में अवैध रेत उत्खनन का आरोप, ग्रामीणों ने कलेक्टर से की जांच की मांग

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गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। छत्तीसगढ़

By ACGN 7647981711, 9303948009

संवाददाता दीपक गुप्ता

जीपीएम ACGN:- जीपीएम जिले के  मरवाही जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत रूमगा की सोन नदी में कथित अवैध रेत उत्खनन और बिना रॉयल्टी पर्ची रेत परिवहन का मामला अब तूल पकड़ने लगा है। ग्रामीणों, ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों एवं सामाजिक संगठनों ने शासन को लाखों रुपये के गौण खनिज राजस्व नुकसान पहुंचाने और ग्रामीणों से अवैध वसूली किए जाने का गंभीर आरोप लगाया है। इस संबंध में अखिल भारतीय आदिवासी कांग्रेस की राष्ट्रीय समन्वयक अर्चना पोर्ते के नेतृत्व में ग्रामीणों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग की है।


ग्रामीणों द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि सोन नदी की रेत खदान का ठेका ठेकेदार प्रिया दुबे को मिला है, लेकिन ठेके की आड़ में बिना वैध रॉयल्टी पर्ची के खुलेआम रेत का उत्खनन और परिवहन किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रधानमंत्री आवास योजना, शासकीय निर्माण कार्यों तथा निजी मकान निर्माण के लिए रेत लेने आने वाले लोगों से प्रति ट्रैक्टर लगभग 300 रुपये की वसूली की जाती है, लेकिन बदले में किसी प्रकार की वैध रॉयल्टी पर्ची नहीं दी जाती।


ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि रेत खदान की देखरेख पेंड्रा निवासी भाजपा नेता सौरभ साहू द्वारा की जा रही है और उन्हीं के संरक्षण में कथित रूप से अवैध उत्खनन का कार्य संचालित हो रहा है। बिना रॉयल्टी पर्ची रेत परिवहन करने के कारण रास्ते में माइनिंग विभाग द्वारा ट्रैक्टर एवं वाहनों को पकड़े जाने पर ग्रामीणों को आर्थिक नुकसान और प्रशासनिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि ग्राम पंचायत ने खदान की नीलामी इस शर्त पर प्रस्तावित की थी कि गांव के प्रधानमंत्री आवास, शासकीय निर्माण कार्यों तथा स्थानीय ग्रामीणों के व्यक्तिगत निर्माण कार्यों हेतु रेत परिवहन में सुविधा दी जाएगी, क्योंकि यह क्षेत्र अनुसूचित एवं पेशा अधिनियम के अंतर्गत आता है। इसके बावजूद ग्रामीणों को कथित रूप से परेशान किया जा रहा है।


मामला उस समय और गंभीर हो गया जब ग्रामीणों ने बिना रॉयल्टी पर्ची रेत परिवहन करते हुए डंपर क्रमांक CG31B8637 को रोक लिया। ग्रामीणों का आरोप है कि वाहन में किसी प्रकार की वैध रॉयल्टी नहीं थी। इसके बाद ग्रामीणों ने तत्काल पुलिस चौकी कोटमी को सूचना देकर वाहन को सौंपा और कार्रवाई की मांग की, लेकिन कथित रूप से बिना किसी ठोस कार्रवाई के वाहन को छोड़ दिया गया।


इस पूरे मामले को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है। अखिल भारतीय आदिवासी कांग्रेस की राष्ट्रीय समन्वयक अर्चना पोर्ते ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच, अवैध उत्खनन पर तत्काल रोक तथा दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है। साथ ही ग्राम पंचायत रूमगा को रेत उत्खनन का अधिकार सौंपने की मांग भी उठाई गई है।


ग्रामीणों का कहना है कि एक ओर राज्य सरकार अवैध खनन रोकने के लिए टोल फ्री नंबर जारी कर कार्रवाई के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर भाजपा नेताओं के संरक्षण में कथित रूप से अवैध उत्खनन जारी रहने से शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस पूरे मामले में क्या कार्रवाई करता है और क्या वास्तव में दोषियों पर शिकंजा कस पाता है।

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