कॉलेजों में शुरू होगी ‘रक्षक’ पाठ्यक्रम की पढ़ाई, बाल सुरक्षा को मिलेगा मजबूत आधार
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रायपुर, छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009
बाल अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और बच्चों की सुरक्षा मजबूत करने की दिशा में नई पहल
रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा राज्य के महाविद्यालयों में “रक्षक (RAKSHAK) पाठ्यक्रम” लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। इस विशेष शैक्षणिक कार्यक्रम का उद्देश्य कॉलेज के विद्यार्थियों के माध्यम से बाल अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाना, बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और समाज में बाल संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता विकसित करना है।
इस पाठ्यक्रम को लागू करने के लिए पूर्व में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी रजवाड़े और उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा के सहयोग से एमओयू किया गया था। यह समझौता राज्य के उच्च शिक्षण संस्थानों में रक्षक पाठ्यक्रम लागू करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
इसी कड़ी में रायपुर स्थित होटल बेबिलोन में रक्षक पाठ्यक्रम के अंतर्गत तैयार की गई उप-इकाइयों को अंतिम रूप देने के लिए विश्वविद्यालय स्तरीय परामर्श बैठक आयोजित की गई। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इसके बाद आयोग के सचिव प्रतीक खरे और डायरेक्टर संगीता बिंद ने उपस्थित अतिथियों का स्वागत किया।

आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि रक्षक पाठ्यक्रम केवल एक शैक्षणिक कार्यक्रम नहीं बल्कि बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए एक सशक्त सामाजिक अभियान है। उन्होंने कहा कि इस पहल के माध्यम से आने वाली पीढ़ी को जागरूक और सुरक्षित बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
बैठक में पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय सरगुजा, श्री शंकराचार्य प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी भिलाई, एमिटी यूनिवर्सिटी और अंजनेय यूनिवर्सिटी के कुलपति, कुलसचिव, प्रतिनिधि और विषय विशेषज्ञ शामिल हुए।
परामर्श बैठक का मुख्य उद्देश्य पाठ्यक्रम की उप-इकाइयों पर विस्तृत चर्चा कर उसे अंतिम रूप देना था, ताकि आगामी शैक्षणिक सत्र से इसे महाविद्यालयों में प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके। विशेषज्ञों ने पाठ्यक्रम की संरचना, उपयोगिता और व्यवहारिक पहलुओं पर अपने सुझाव भी दिए। सभी विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों ने इस पहल को समय की जरूरत बताते हुए आयोग की सराहना की और इसके सफल क्रियान्वयन में सहयोग का भरोसा दिलाया।
प्रदीप मिश्रा
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