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स्कूली बच्चों ने सीखे प्राकृतिक रंगों के अनुपम प्रयोग

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बिलासपुर, छत्तीसगढ़

By ACGN 7647981711, 9303948009


कौशल विकास और पर्यावरण संरक्षण की अनूठी मिसाल, जल और स्वास्थ्य सुरक्षा की शिक्षा के साथ नवाचार की झलक

ACGN:- शास उच्च माध्यमिक विद्यालय महमंद, विकासखण्ड बिल्हा में विद्यार्थियों के लिए आज ‘प्राकृतिक गुलाल निर्माण’ कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यशाला श्रीमती शांति सोनी के मार्गदर्शन में आयोजित की गई, जिसमें छात्रों ने फूलों, हल्दी, चुकंदर, पालक, गुड़हल के पत्तों, चंदन पावडर और औषधीय जड़ी-बूटियों से पूरी तरह सुरक्षित और इको-फ्रेंडली गुलाल बनाना सीखा।


कार्यशाला का उद्देश्य केवल त्योहारों के लिए प्राकृतिक रंग तैयार करना नहीं था, बल्कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत कौशल आधारित प्रशिक्षण और व्यावहारिक शिक्षा को धरातल पर उतारना भी था। इस पहल ने बच्चों को प्रकृति और पर्यावरण से जोड़ने, आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास बढ़ाने, जल संरक्षण और टीमवर्क की भावना विकसित करने, उद्यमिता की ओर प्रेरित करने और कमाई के साथ सीखने का अवसर प्रदान किया।


छात्रों ने टीमवर्क के माध्यम से बड़े से बड़े कार्य को संभालना सीखा और परंपरा और तकनीक का संगम अनुभव किया। रासायनिक रंगों के दुष्प्रभावों को देखते हुए यह कार्यशाला स्वास्थ्य सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हुई।


बहुआयामी लाभ और सामाजिक प्रभाव
नारी सशक्तिकरण: छात्राओं को लघु उद्योगों और स्वरोजगार से जोड़कर भविष्य में आर्थिक स्वतंत्रता की प्रेरणा।
उद्यमिता (Entrepreneurship): कमाते हुए सीखने की प्रवृत्ति विकसित करना, बच्चों में व्यावसायिक सोच को बढ़ावा।
जल सुरक्षा व संरक्षण: गुलाल के पारंपरिक और प्राकृतिक निर्माण से होली में जल का कम उपयोग, पर्यावरण संरक्षण की सीख।
स्वास्थ्य सुरक्षा: रासायनिक रंगों के दुष्प्रभावों से बचाव और जागरूकता फैलाना।


विद्यालय की इस पहल ने यह सिद्ध किया कि जब शिक्षा को सृजनात्मक और व्यावहारिक कौशल से जोड़ा जाता है, तो यह बच्चों को जिम्मेदार नागरिक बनाने और आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर करती है। विद्यार्थियों की मुस्कान और उनके अभिभावकों की सराहना इस कार्यशाला की सफलता का प्रतीक रही।


छात्रों ने प्राकृतिक गुलाल लेकर अपने घरों में खुशी-खुशी लौटकर अनुभव साझा किया और कई अभिभावकों ने इस प्रयास के लिए आभार व्यक्त किया। इस प्रकार यह कार्यशाला शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जिम्मेदारी के लिए एक प्रेरणादायक मॉडल साबित हुई।

प्रदीप मिश्रा
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