होली धमाका 2026 : हंसी की चाशनी में डूबा सियासी समोसा, तंज का तीखा चटकारा, गुलाल में वादे, भांग में जवाब — फागुन की चौपाल में सत्ता का हिसाब!
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अंजोर छत्तीसगढ़ होली विशेषांक : रंग ऐसा कि वादे भी मुस्काएं, सवाल भी गुदगुदाएं! बजट की पिच पर मंत्रीगण, रंगों में लिपटा शासन
संपादकीय
By ACGN 7647981711 9303948009
होली धमाका
बुरा ना मानो होली है… फागुन का फाग : सत्ता संग जोगीरा सा रा रा……….
हंसी का गुलाल, तंज की पिच और विकास का ढोल-नगाड़ा साथ-साथ ढोल भी बजे, ढमाल भी बजे,रंगों की बरसात है, शब्दों की बारात है, आज सियासत भी गुलाल में लिपटी सौगात है। आज सच भी हंसी में है, और हंसी भी रंगीन है! घोषणाओं की पिच सजी, वादों की गेंद उछली, जनता बोली, “सरकार जी, रंग तो बढ़िया है… बस बरसात में धुलना नहीं चाहिए!” ढोलक की थाप, अबीर का बादल, और चौपाल में ठहाकों की बरसात।फागुन आया तो रंग ही नहीं, सवाल भी उड़ने लगे।किसी ने गुलाल लगाया, किसी ने हल्का सा तंज। जनता मुस्कुराकर बोली — “अरे भइया… बुरा न मानो होली है!” इस बार फागुन में छत्तीसगढ़ की सरकार भी चौपाल में आ बैठी है। कहीं योजनाओं का रंग, कहीं वादों का गुलाल,और बीच-बीच में जनता का ठहाका — जोगीरा सा रा रा रा!…..
विष्णु देव साय – मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री जी फागुन में विकास की पिचकारी लेकर निकले हैं। ऊर्जा विभाग में स्मार्ट मीटर ऐसे दौड़ रहे जैसे रंगों की टोली।…. खनिज से भरी धरती पर नई खदानों की चर्चा, जंगल भी कान लगाकर सुन रहे।….. जनसंपर्क विभाग का भी अलग रंग है बड़े-बड़े बाहरी चैनल छत्तीसगढ़ से खबर और कमाई का गुलाल बटोर रहे, और स्थानीय पत्रकार मुस्कुरा कर पूछें “सरकार… रंग तो सब पर बरस रहा, हमारी थाली में भी थोड़ा अबीर गिरा दीजिए!” जनाब
हमने बनाया – हम ही सँवारेंगे, सबका साथ – सबका विकास, मोदी की गारंटी – पूरी करके दिखाएँगे
अरुण साव उपमुख्यमंत्री – सड़क, नल-जल और शहर
राज्य की सड़कें भी इस फागुन में रंगीन हैं, कहीं नई चमकती, कहीं गड्ढों की होली खेलती। नल-जल योजना का नल कभी पानी बरसाए, कभी उम्मीद।,,,,, नगरीय प्रशासन की नालियाँ भी हंसकर कहती हैं “हम भी शहर के नागरिक हैं, हमारी सफाई भी हो जाए तो रोज होली हो जाए!”……. खेल और युवा कल्याण में खिलाड़ी दौड़ रहे हैं, बस मैदान भी उसी रफ्तार से बन जाए तो फागुन का रंग और चढ़ जाए।
हमने बनाया – हम ही सँवारेंगे, चमकते शहर – दमकते युवा, मोदी की गारंटी – विकास का रंग
विजय शर्मा उप मुख्यमंत्री – गृह, पुलिस और पंचायत
इस फागुन में भी पुलिस की वर्दी पर गुलाल गिरा, मगर ड्यूटी ढीली नहीं हुई। गृह विभाग चौकस है, नक्सल मुक्त छत्तीसगढ़ की और अग्रसर है पर गांव की चौपाल में कोई हंसकर कह दे “अगर अपराधी भी रंग में सुधर जाएँ तो पुलिस को भी छुट्टी मिल जाए!”….. पंचायत और ग्रामीण विकास की योजनाएँ फाइलों में खूब खिल रही हैं, गांव वाले उम्मीद लगाए बैठे हैं कि कागज का रंग जमीन तक भी पहुंचे।
हमने बनाया – हम ही संभालेंगे, सुरक्षित गांव – मजबूत विकास, मोदी की गारंटी – जनता का विश्वास
रामविचार नेताम – आदिवासी और किसान
जंगल, खेत और तालाब नेताम जी के विभाग का पूरा फाग है। आदिवासी कल्याण की योजनाएँ रंगीन, किसान खेत में मेहनत में मगन। किसान हंसकर कह दे “अगर समर्थन मूल्य भी रंगों की तरह बढ़ जाए तो हर मौसम होली हो जाए।”….. पशुपालन और मत्स्य पालन में भी उम्मीद का गुलाल उड़ रहा है।
हमने बनाया – हम ही सजाएँगे, किसान खुशहाल – आदिवासी सम्मान,मोदी की गारंटी – विकास महान
लखन लाल देवांगन – उद्योग, श्रम और आबकारी
फागुन में उद्योग की चिमनियाँ भी रंग उड़ा रही हैं। निवेश की बातें, कारखानों की कतार और रोजगार की उम्मीद का गुलाल उड़ रहा है। मजदूर मुस्कुरा कर कहे — “कारखाने बढ़ें तो घर की होली भी चमके।”…… उधर आबकारी विभाग का फाग भी निराला है। सरकारी शराब दुकानों के खुलने की चर्चा, कहीं रोजगार की बात, कहीं राजस्व की मुस्कान। और साथ-साथ नशा मुक्ति अभियान का ढोल भी बज रहा है। चौपाल में कोई हंसकर कह दे “एक हाथ में दुकान की चाबी, दूसरे में नशा मुक्ति की किताब… गजब का संतुलन है भाई सरकार का फाग बड़ा निराला है!”
हमने बनाया – हम ही बढ़ाएँगे… उद्योग, रोजगार और व्यवस्था का विकास , मोदी की गारंटी – भरोसे का विश्वास
ओ. पी. चौधरी –वित्त, बजट और जमीन
फागुन में बजट भी इंद्रधनुष बनकर आया।….जमीन की गाइडलाइन सुनकर कोई बोले …“कागज में खेत सोना बन गया, पर खरीदने जाओ तो जेब कहे — पहले लॉटरी जीत आओ!”
हमने बनाया – हम ही बढ़ाएँगे… मजबूत अर्थव्यवस्था – सबका विश्वास… मोदी की गारंटी – समृद्ध विकास
केदार कश्यप – सहकारिता और धान खरीदी
धान खरीदी का फाग बड़ा निराला है। समितियों में धान के ढेर, मगर उठाव की गाड़ी कभी समय पर, कभी देर से। बारदाने की कमी, मिलरों की गणित और ऊपर से आदेश — जीरो शॉर्टेज। पर सभी के मन में छाया है एस्मा और मुसुवा का डर….. समिति वाले माथा पकड़ कर कहें “धान सूख रहा, जगह कम है… अब हिसाब का गुलाल किस रंग से पूरा करें?”
हमने बनाया – हम ही सँवारेंगे… किसान और समिति का विकास… पूरी होगी मोदी की गारंटी – बस रखिये भरोसा का विश्वास
लक्ष्मी राजवाड़े – महिला और बाल विकास
आंगनबाड़ी में योजनाओं की बहार है, महिलाओ का सशक्तिकरण और योजनाओ की बौछार है … पर गांव की चौपाल में चर्चा भी कम नहीं।… आगनबाडी में कहीं बच्चों की उपस्थिति कम, वहीं कागजों में ज्यादा।… भर्ती की गलियों में रिश्तेदारी परिवारवाद का रंग भी उड़ता दिख जाए। नशा मुक्त होगा छत्तीसगढ़ बस लोग थोडा कम पिए बिना गंगाजल और कसम के चल रहा नशामुक्त अभियान
हमने बनाया – हम ही सँवारेंगे… माँ और बच्चे का विकास.. मोदी की गारंटी – पोषण का विश्वास

श्याम बिहारी जायसवाल – स्वास्थ्य
सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की फौज कागजों में पूरी दिखाई देती है। मरीज उम्मीद लेकर आता है, पर कभी डॉक्टर मीटिंग में, तो कभी कभी निजी क्लीनिक में व्यस्त मिलता है … सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में ऐसा मजाक चलता है “यहाँ मरीज को इलाज से पहले रेफर की पर्ची सबसे तेज मिलती है!” मरीज इलाज से पहले सरकारी डाक्टर की क्लिनिक में लेता मिलता है जहा आयुष्मान कार्ड का सर्वर तेजी से चलता है
हमने बनाया – हम ही सुधारेंगे… स्वस्थ प्रदेश – खुशहाल समाज… मोदी की गारंटी – सेवा का विश्वास
दयालदास बघेल – राशन
राशन दुकान में भी फागुन का रंग है। दुकानों में हर माह चावल मुफ्त है जनता खुश और हमारे संग है पर चौपाल में हर कोई बोले — “अगर चावल-चना समय पर मिल जाए तो घर की होली भी रंगीन हो जाए।”
हमने बनाया – हम ही पहुँचाएँगे… हर थाली में विकास…मोदी की गारंटी – मुफ्त अन्न का विश्वास
टंकराम वर्मा – राजस्व
पटवारी की कलम भी फागुन में गुलाल उड़ाती है। जमीन के कागजों का रंग कभी लाल, कभी पीला। गांव वाला कहे — “अगर नक्शा और हकीकत एक ही रंग में मिल जाएँ तो मजा आ जाए।”
हमने बनाया – हम ही सुधारेंगे.. न्यायपूर्ण जमीन – मजबूत विकास मोदी की गारंटी –सबका साथ सबका विश्वास
गजेंद्र यादव – शिक्षा
स्कूलों में बच्चों की हंसी फागुन जैसी। यहाँ खाना भी मिलता है और नाश्ता भी बस किताब और शिक्षक दोनों साथ मिल जाएँ तो ज्ञान का रंग और गहरा हो जाए।
हमने बनाया – हम ही पढ़ाएँगे.. शिक्षा से विकास… मोदी की गारंटी – उज्ज्वल विश्वास
गुरु खुशवंत साहेब – कौशल विकास
युवा हुनर सीख रहे हैं, मशीन और कंप्यूटर की दुनिया में कदम रख रहे हैं।… बस नौकरी भी उसी गति से आ जाए तो फागुन का रंग स्थायी हो जाए।
हमने बनाया – हम ही सिखाएँगे.. कौशल से विकास…मोदी की गारंटी – रोजगार विश्वास
राजेश अग्रवाल – पर्यटन
झरने, जंगल और मंदिर .. छत्तीसगढ़ का पर्यटन भी फागुन जैसा रंगीन।..पर्यटक आएँ और कहें —“अरे वाह! यहाँ तो हर मौसम होली है।” बस खदानों से ये बाख जाएँ
हमने बनाया – हम ही सजाएँगे…पर्यटन से विकास…मोदी की गारंटी – विश्वास
🌈 समापन
फगुआ की मर्यादा …अरे भाई, बुरा ना मानो होली है!
रंग का नशा था, भांग की तरंग थी,…कलम हाथ में थी पर सोच थोड़ी दंग थी।…कब शब्द फिसले, कब अक्षर लड़खड़ाए,…कब वाक्य टेढ़े-मेढ़े हो जाए —कुछ समझ न आया, रंग ने ऐसा घेरा डाला।
अगर कहीं तंज ज्यादा लग गया हो,..तो समझ लीजिए गुलाल आंख में चला गया था।..दिल पर मत लेना सरकार या सरकार के प्यारे,..आज अक्षर भी थे थोड़ा हो गये मतवाले।
भांग उतरते ही सब सीधा हो जाएगा,..तब तक हंसी में ही संदेश समझ लीजिए भाई साहब!
जोगीरा सा रा रा रा…
ढोलक थमी, रंग बैठा, पर हंसी अभी बाकी है।…लोकतंत्र की असली होली वही है जिसमें सवाल भी हों और मुस्कान भी।..
चौपाल से आखिरी आवाज आई … विकास हो रहा, सरकार पर जनता की नजर है, रंग बरसे भीगे चुनर वाली, बजट की गेंद उछली,सड़क चमकी, नल-जल फुहार में जनता मुस्काई ।
जनता बोली: “सरकार जी, विकास तो खूब हो रहा है, पर किसका ? यह भी तो बताईए न।”
सरकार मुस्कुराया, जवाब में हल्की झलक दी,“भाई, रंग तो सबके लिए है,और विकास… वो तो देख रहे हैं जनता की निगाह है, मोदी की गारंटी में!” “बुरा न मानो होली है… जोगीरा सा रा रा रा!”
जहां वादों पर गुलाल, सवालों पर अबीर और तंज भी ठहाकों में तब्दील ढोल की थाप पे बजट इठलाए,घोषणाएं पिच पर छक्का लगाए।सवाल भी रंग में भीग मुस्काएं,जवाब भांग की तरंग में इतराएं। आज न आलोचना नाराज़ होगी, न प्रशंसा बेकाबू सब कुछ हंसी की चाशनी में डूबा, व्यंग्य भी मीठा और थोड़ा सा चुभू।बुरा ना मानो होली है…यह होली विशेषांक है जनाब यहां सियासत भी हंसी में सराबोर है, और पाठक ठहाकों से लोटपोट होने को मजबूर है!
स्पेशल नोट:
यह लेख होली, फागुन और व्यंग्य पर आधारित मजाक है।
सभी रंग, ठहाके और तंज सिर्फ मनोरंजन और हंसी के लिए हैं।
किसी भी मंत्री, अधिकारी या विभाग पर व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं है।
तो भाई-बहनों… दिल पर मत लेना, हंसते रहो और कहो — बुरा न मानो होली है!
सवालों ने अबीर छिड़का, ठहाके हवा में गूंजे,
हर तंज हंसी में घुला, और जोगीरा सा रा रा रा बजा
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