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बस्तर पंडुम 2026 बना जनजातीय गौरव का राष्ट्रीय मंच, अमित शाह की मौजूदगी में संस्कृति, कला और परंपरा का विराट उत्सव

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जगदलपुर, बस्तर | छत्तीसगढ़

By ACGN 7647981711, 9303948009

एयरपोर्ट स्वागत से लेकर लालबाग मैदान में सांस्कृतिक समापन तक, बच्चों की प्रस्तुति, जनजातीय प्रदर्शनी और विजेता कलाकारों के सम्मान ने रचा इतिहास

जगदलपुर ACGN:- बस्तर की धरती एक बार फिर अपनी सांस्कृतिक गरिमा, जनजातीय आत्मा और परंपरागत वैभव के साथ राष्ट्रीय पटल पर चमक उठी जब संभाग स्तरीय बस्तर पंडुम 2026 के समापन समारोह में देश के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जगदलपुर पहुंचे। मां दंतेश्वरी एयरपोर्ट पर उनके आगमन के साथ ही बस्तर में उत्साह, उल्लास और गौरव का वातावरण बन गया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, वन मंत्री केदार कश्यप, सांसद महेश कश्यप, कांकेर सांसद भोजराज नाग, जगदलपुर विधायक किरण सिंह देव, महापौर संजय पांडे सहित अनेक जनप्रतिनिधियों ने आत्मीयता के साथ उनका स्वागत किया। प्रशासनिक स्तर पर कमिश्नर डोमन सिंह, आईजी सुन्दरराज पी, कलेक्टर आकाश छिकारा और एसपी शलभ सिन्हा की उपस्थिति ने आयोजन की गंभीरता और भव्यता को और मजबूती दी।

जगदलपुर के ऐतिहासिक लालबाग मैदान में आयोजित तीन दिवसीय बस्तर पंडुम 2026 का समापन केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि यह बस्तर की आत्मा, जनजातीय समाज की पहचान और उनके संघर्ष, सृजन और संस्कारों का जीवंत दस्तावेज बन गया। इस आयोजन ने यह संदेश स्पष्ट किया कि बस्तर केवल प्राकृतिक संपदाओं का क्षेत्र नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक आत्मा का एक मजबूत स्तंभ है।

समापन अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जनजातीय संस्कृति पर आधारित विशाल प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने एक-एक स्टॉल पर जाकर जनजातीय समाज के दैनिक जीवन, उनकी कला, शिल्प, परंपराओं और ज्ञान परंपरा को नजदीक से देखा और समझा। ढोकरा शिल्प की बारीक कारीगरी, टेराकोटा की मिट्टी से उकेरी गई आकृतियां, वुड कार्विंग की जीवंत कलाकृतियां, बांस और लौह शिल्प की मजबूत संरचनाएं, जनजातीय वेशभूषा और आभूषणों की विशिष्ट पहचान ने उन्हें मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने जनजातीय चित्रकला, तुम्बा कला, सीसल कला और लोक चित्रों को देखकर कहा कि यह केवल कला नहीं, बल्कि पीढ़ियों से संचित जीवन दर्शन है।

प्रदर्शनी में दंडामी माड़िया, अबूझमाड़िया, मुरिया, भतरा और हल्बा जनजातियों की पारंपरिक वेशभूषा, आभूषण और जीवनशैली को बेहद प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया। जनजातीय चित्रकला के माध्यम से जंगल, नदी, पर्वत, देवी-देवताओं और सामुदायिक जीवन को सजीव रूप में उकेरा गया। वहीं वैद्यराजों द्वारा वन औषधियों का जीवंत प्रदर्शन यह बताता नजर आया कि आधुनिक चिकित्सा से बहुत पहले बस्तर के जंगलों में स्वास्थ्य का विज्ञान विकसित हो चुका था।

स्थानीय व्यंजन स्टॉलों ने बस्तर की खानपान परंपरा को भी राष्ट्रीय पहचान दी। जोंधरी लाई के लड्डू, मंडिया पेज, आमट, चापड़ा चटनी, कुलथी दाल, पान बोबो, तीखुर जैसे पारंपरिक व्यंजनों के साथ लांदा और सल्फी जैसे पारंपरिक पेय पदार्थों ने आगंतुकों का ध्यान खींचा। इन व्यंजनों के पीछे छिपी जनजातीय जीवनशैली और प्रकृति से संतुलन की सोच ने यह स्पष्ट किया कि बस्तर की संस्कृति पूरी तरह से प्रकृति के साथ सामंजस्य में विकसित हुई है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस अवसर पर कहा कि बस्तर पंडुम केवल उत्सव नहीं, बल्कि जनजातीय संस्कृति को सहेजने और अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जनजातीय कला, शिल्प, भाषा और परंपराओं के संरक्षण के लिए निरंतर प्रयास कर रही है और बस्तर पंडुम जैसे आयोजनों से स्थानीय कलाकारों को पहचान, सम्मान और आत्मविश्वास मिल रहा है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बस्तर पंडुम की बारह विधाओं में आयोजित प्रतियोगिताओं के विजेता दलों से भेंट की और उन्हें सम्मानित कर उत्साहवर्धन किया। जनजातीय नृत्य, गीत, नाट्य, वाद्ययंत्र, वेशभूषा, आभूषण, शिल्प, चित्रकला, पेय पदार्थ, व्यंजन, आंचलिक साहित्य और वन औषधि जैसी विधाओं में कलाकारों ने अपनी अद्भुत प्रतिभा का प्रदर्शन किया। यह आयोजन इस बात का प्रमाण बना कि बस्तर की जनजातीय परंपराएं आज भी जीवंत हैं और आधुनिक मंच पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाए हुए हैं।

समापन समारोह का एक भावनात्मक और यादगार क्षण तब देखने को मिला जब हजारों स्कूली बच्चों ने “ऐसा जादू है मेरे बस्तर में” गीत पर सामूहिक सांस्कृतिक प्रस्तुति दी। बच्चों की अनुशासित, भावपूर्ण और आत्मविश्वास से भरी प्रस्तुति ने पूरे मैदान को तालियों से गूंजा दिया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह स्वयं बच्चों की प्रस्तुति से प्रभावित हुए और ताली बजाकर उनका उत्साहवर्धन किया। बालिकाओं द्वारा प्रस्तुत मलखंभ प्रदर्शन ने भी दर्शकों को रोमांचित कर दिया। बच्चों की कला, अनुशासन और आत्मविश्वास ने यह संदेश दिया कि बस्तर की नई पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़ी हुई है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने भी बच्चों और कलाकारों की सराहना की। उल्लेखनीय है कि “ऐसा जादू है मेरे बस्तर में” गीत हिंदी और हल्बी बोली में रचा गया है, जिसमें बस्तर की बादल अकादमी के कलाकारों की आवाज और दायरा बैंड के आधुनिक संगीत का सुंदर समन्वय देखने को मिला। यह गीत आज बस्तर की पहचान बनता जा रहा है, खासकर युवाओं और बच्चों के बीच।

संभाग स्तरीय बस्तर पंडुम 2026 में सुकमा जिले के जनजातीय नाट्य दल ने विशेष उपलब्धि हासिल की। मुड़िया जनजाति पर आधारित नाट्य प्रस्तुति के लिए सुकमा जिले को प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया गया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कलाकारों को स्मृति चिन्ह और 50 हजार रुपये का चेक प्रदान कर सम्मानित किया। कोंटा विकासखंड के सुदूर ग्राम पंचायत कोंडासांवली के आश्रित गांव पारला गट्टा के कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

मुड़िया जनजाति के 13 सदस्यीय दल ने ताड़ के पत्ते, मयूर पंख, तीर-धनुष और मछली पकड़ने के जाल जैसे दैनिक उपयोग की वस्तुओं को मंच पर कलात्मक ढंग से प्रस्तुत कर अपने जीवन और संस्कृति की कहानी कही। कलाकार लेकम लक्का, प्रकाश सोड़ी, विनोद सोड़ी, जोगा सुदाम और उनकी टीम की इस सफलता ने पूरे सुकमा जिले को गौरवान्वित किया। कलाकारों को संभाग स्तर तक पहुंचाने में नोडल अधिकारी मनीराम मरकाम और पी श्रीनिवास राव की भूमिका भी सराहनीय रही।

बस्तर पंडुम 2026 का यह आयोजन प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और जनजातीय समाज के बीच विश्वास और संवाद का मजबूत सेतु बनकर उभरा। यह केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि बस्तर के बदलते चेहरे, सशक्त होती पहचान और आत्मसम्मान की कहानी है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति ने इस आयोजन को राष्ट्रीय महत्व प्रदान किया और यह संदेश दिया कि बस्तर की संस्कृति और जनजातीय समाज देश की प्राथमिकता में हैं।

समापन समारोह के साथ ही बस्तर पंडुम 2026 इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया, लेकिन इसके प्रभाव, स्मृतियां और संदेश लंबे समय तक बस्तर की धरती और यहां के लोगों के मन में जीवित रहेंगे। यह आयोजन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगा कि अपनी जड़ों से जुड़े रहकर ही विकास और आधुनिकता का रास्ता मजबूत किया जा सकता है।

प्रदीप मिश्रा

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