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सरकारी ड्यूटी के बीच घर में ‘गुमनाम क्लिनिक!11:10 बजे निजी क्लिनिक , 11:18 बजे छुट्टी का व्हाट्सएप आवेदन ! हाटी स्वास्थ्य केंद्र में 8 मिनट का यह अंतर आखिर क्या है कहानी?

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रायगढ़, छत्तीसगढ़

By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- अनीता गर्ग रायगढ़

PHC हाटी में सुपरवाइजर के पद पर पदस्थ लालजी राठौर पर निजी मकान में क्लिनिक संचालित करने और मरीजों को इंजेक्शन सहित एलोपैथी उपचार देने के आरोप, छुट्टी आवेदन के समय ने बढ़ाया संदेह

रायगढ़। सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की कार्यप्रणाली को लेकर हाटी क्षेत्र से सामने आई जानकारी ने स्वास्थ्य विभाग को सवालों के घेरे में ला दिया है। पीएचसी हाटी में सुपरवाइजर के पद पर पदस्थ लालजी राठौर पर अपने निजी मकान में बिना स्पष्ट नाम-पहचान के क्लिनिक संचालित करने और वहां मरीजों का उपचार करने का आरोप है। जानकारी के अनुसार वहां मरीजों को इंजेक्शन आदि लगाने सहित एलोपैथी पद्धति से उपचार किए जाने की बात भी सामने आ रही है। हालांकि इसकी वास्तविकता और वैधानिक स्थिति जांच का विषय है।

मामला मंगलवार का बताया जा रहा है, जब स्वास्थ्य विभाग की ओर से टीकाकरण संबंधी सरकारी ड्यूटी निर्धारित थी। मरीज अस्पताल पहुंचे तो पहले कर्मचारियों की ओर से बताया गया कि लालजी राठौर टीकाकरण की ड्यूटी पर गए हैं। बाद में पूछताछ करने पर बताया गया कि वे छुट्टी पर हैं।

इसी बीच जानकारी के अनुसार सुबह करीब 11:10 बजे लालजी राठौर अपने मकान में संचालित बताए जा रहे निजी क्लिनिक में मरीज देखते नजर आए, जिसका वीडियो भी बनाए जाने की बात सामने आई है। इसके कुछ ही मिनट बाद कथित तौर पर 11:18 बजे व्हाट्सएप के माध्यम से छुट्टी का आवेदन भेजा गया।

यहीं से पूरे मामले में कई सवाल खड़े हो गए हैं। यदि संबंधित कर्मचारी वास्तव में छुट्टी पर थे तो छुट्टी का आवेदन पहले क्यों नहीं दिया गया? और यदि मंगलवार को टीकाकरण की सरकारी ड्यूटी निर्धारित थी तो ड्यूटी के दौरान निजी स्थान पर मरीजों का उपचार कैसे किया जा रहा था?

मामला केवल उपस्थिति और छुट्टी आवेदन तक सीमित नहीं है। निजी मकान में बिना स्पष्ट नाम के क्लिनिक संचालित होना, वहां मरीजों को इंजेक्शन लगाना तथा एलोपैथी उपचार किए जाने की जानकारी भी संबंधित विभाग के लिए जांच का विषय है। क्या ऐसा उपचार करने की वैधानिक अनुमति है? क्या संबंधित क्लिनिक पंजीकृत है? क्या वहां दवाओं और इंजेक्शन के उपयोग के लिए आवश्यक नियमों का पालन किया जा रहा है? इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा।

सबसे बड़ा सवाल स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर है। यदि सरकारी कर्मचारी की ड्यूटी गांव-गांव टीकाकरण के लिए लगाई गई थी, तो उसकी वास्तविक उपस्थिति की निगरानी किस स्तर पर की जा रही थी? यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह केवल एक कर्मचारी का मामला नहीं, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की निगरानी और जवाबदेही पर भी गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।

फिलहाल वीडियो, निजी क्लिनिक में मौजूदगी का समय, सरकारी ड्यूटी और 11:18 बजे भेजे गए छुट्टी आवेदन की पूरी कड़ी की निष्पक्ष जांच जरूरी है। आरोप सही हैं तो कार्रवाई होनी चाहिए और यदि आरोप गलत हैं तो स्वास्थ्य विभाग को तथ्य सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

प्रदीप मिश्रा (संपादक)
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