छत्तीसगढ़ में पट्टा वितरण की प्रक्रिया शुरू, सरकारी भूमि पर काबिज लोगों को मिलेगा मालिकाना हक
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रायपुर छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009
संवाददाता:- अनादि पांडेय
2017 से पहले सरकारी जमीन पर रह रहे पात्र परिवारों को मिलेगा लाभ, 15 अगस्त 2026 तक सर्वे पूरा करने के निर्देश
रायपुर। प्राप्त जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ़ सरकार ने शहरी क्षेत्रों में लंबे समय से सरकारी भूमि पर रह रहे लोगों को बड़ी राहत देने की दिशा में कदम बढ़ा दिया है। राज्य सरकार ने वर्ष 2017 से पहले सरकारी जमीन पर काबिज पात्र लोगों को पट्टा देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में व्यापक स्तर पर सर्वे कराया जा रहा है। राजस्व विभाग ने इस कार्य को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश जारी किए हैं ताकि पात्र परिवारों को नियमानुसार भूमि अधिकार प्रदान किए जा सकें।
राजस्व विभाग द्वारा सभी जिलों के कलेक्टरों को निर्देशित किया गया है कि 15 अगस्त 2026 तक सर्वे कार्य पूरा कर उसकी रिपोर्ट संचालक भू-अभिलेख को भेजी जाए। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर पात्र हितग्राहियों की सूची तैयार की जाएगी और इसके बाद पट्टा वितरण की प्रक्रिया शुरू होगी। इस कार्य के लिए नगर निगम और राजस्व विभाग की संयुक्त टीमों का गठन किया गया है, जो क्षेत्रवार सर्वे कर वास्तविक पात्र लोगों की पहचान करेंगी।
सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार नगर निगम क्षेत्रों में 600 वर्गफीट तक तथा नगर पालिका और नगर पंचायत क्षेत्रों में 800 वर्गफीट तक कब्जा रखने वाले लोगों को ही योजना का पात्र माना जाएगा। निर्धारित सीमा से अधिक भूमि पर कब्जा रखने वाले लोगों को अतिक्रमणकारी माना जाएगा और उन्हें इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा। प्रारंभिक रूप से पट्टा 30 वर्षों के लिए जारी किया जाएगा, जिसे बाद में नियमानुसार नवीनीकृत भी किया जा सकेगा।
शासन ने स्पष्ट किया है कि कुछ श्रेणी के लोगों को इस योजना के दायरे से बाहर रखा गया है। जिन लोगों के पास पहले से पक्का मकान है, उन्हें इसका लाभ नहीं मिलेगा। इसके अलावा तालाब, नाले, जलस्रोत, ग्रीन बेल्ट, फुटपाथ तथा सार्वजनिक स्थलों पर अवैध कब्जा करने वाले लोगों को भी पात्र नहीं माना जाएगा। रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और विकास कार्यों में बाधा बनने वाले अतिक्रमण भी योजना में शामिल नहीं किए जाएंगे।
पट्टा प्राप्त करने के लिए आवेदकों को आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। इनमें मतदाता सूची में नाम, बिजली या टेलीफोन बिल, संपत्तिकर अथवा समेकित कर रिकॉर्ड, जलकर भुगतान संबंधी दस्तावेज, भवन या दुकान अनुज्ञा, कम से कम पांच वर्ष पुराने आधार कार्ड अथवा ड्राइविंग लाइसेंस शामिल हैं। दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही पात्र हितग्राहियों का अंतिम चयन किया जाएगा।
राजस्व विभाग और नगरीय निकायों की संयुक्त टीमों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि केवल वास्तविक पात्र लोगों को ही इस योजना का लाभ मिले और किसी भी प्रकार के गलत दावे स्वीकार न किए जाएं। शासन का मानना है कि इस निर्णय से वर्षों से सरकारी भूमि पर रह रहे हजारों परिवारों को कानूनी सुरक्षा और स्थायी आवास का अधिकार मिल सकेगा।
प्रदीप मिश्रा
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