मातृभूमि और मातृभाषा ओड़िया की समृद्धि जरूरी, महा बिशुब मिलन समारोह में उठी आवाज
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गंजाम, ओडिशा
By ACGN 7647981711, 9303948009
संवाददाता अनिल कुमार चौधरी
बरहामपुर में विकल्प समाचार पत्र के तत्वावधान में भव्य आयोजन, साहित्यकारों और बुद्धिजीवियों ने भाषा संरक्षण पर रखे विचार
गंजाम। ओडिशा के बरहामपुर स्थित विकल्प भवन में साप्ताहिक “विकल्प समाचार पत्र” के तत्वावधान में महा बिशुब मिलन समारोह धूमधाम और उत्साह के साथ आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मातृभूमि और मातृभाषा ओड़िया की समृद्धि और संरक्षण पर जोर देते हुए साहित्यकारों, शिक्षाविदों और समाजसेवियों ने अपने विचार व्यक्त किए।

समारोह में डॉ. सरोजिनी रथ मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं जबकि डॉ. विद्युत प्रभा साहू अतिथि के रूप में शामिल हुईं। कार्यक्रम में राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त पूर्व शिक्षक सुभाष चंद्र राउत, पूरब काजू निगम के अध्यक्ष सुबास चंद्र महाराणा, उत्कल टीवी के निदेशक एस. नागेश्वर पूस्टि, प्रेस क्लब के कोषाध्यक्ष शिव नारायण पांडा, नंदीघोष टीवी के दक्षिण ओडिशा प्रमुख देव हरि बेहरा तथा पूर्व कॉरपोरेटर एन. हाडु बाबू पात्र सहित कई गणमान्य लोग मंचासीन रहे।

संपादक जय राम महाराणा के मार्गदर्शन में आयोजित इस समारोह के प्रथम चरण की अध्यक्षता डॉ. मंजू प्रभा दास ने की और मंच संचालन नृत्य प्रशिक्षक सुनंदा पाढ़ी ने किया। इस अवसर पर सुश्री पद्मिनी मिश्र, सुचेता पाणिग्रही और निहारिका साहू ने सौ से अधिक कवियों और कवयित्रियों की कविताओं का सुमधुर संचालन किया।
द्वितीय सत्र की अध्यक्षता अधिवक्ता सुधांशु शेखर साहू ने की। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति अपनी मातृभाषा से प्रेम नहीं करता, वह अपनी मां से प्रेम करने के समान नहीं है। उन्होंने कहा कि आधुनिक युग में सभी भाषाओं को सीखना जरूरी है, लेकिन अपनी मातृभाषा और संस्कृति को कभी नहीं भूलना चाहिए। मातृभूमि और भाषा की समृद्धि के लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति को ईमानदारी से प्रयास करना होगा।

समारोह के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले सात लोगों को सम्मानित किया गया। डॉ. सरोजिनी रथ को “बीणापाणि पुरस्कार”, सुभाष चंद्र राउत को “गणपति पुरस्कार”, कालीमेघी की सरपंच सुश्री अर्चना कुमारी त्रिपाठी को वर्ष 2025 के सर्वश्रेष्ठ सरपंच सम्मान, अमरेंद्र कुमार जेना को “सन ऑफ द सन” पुरस्कार तथा सुजाता पात्र, शिव सुंदर रथ और हाढी बंधु माली को विशेष सम्मान से नवाजा गया।

कार्यक्रम में सौ से अधिक कवियों और साहित्य प्रेमियों ने भाग लेकर अपनी कविताएं और निबंध प्रस्तुत किए। भोजनावकाश के बाद सभी ने मिलकर ओड़िया नववर्ष को उत्साहपूर्वक मनाया। अंत में परिचर्चा के अध्यक्ष सुधांशु शेखर साहू ने कहा कि भाषा, संस्कृति, पर्यावरण, जल और आध्यात्मिक विचारों की रक्षा समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है और अपनी मातृभाषा पर हमें गर्व होना चाहिए।
प्रदीप मिश्रा
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