हिड़मा को आदर्श मानने वाले ही ‘दिमागी नक्सली’: CM साय
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रायपुर, छत्तीसगढ़
By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- अनादि पांडेय रायपुर
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का बड़ा बयान,नक्सली हिंसा का महिमामंडन भी समाज के लिए घातक; बोले, बस्तर अब भय से निकलकर शांति, विश्वास और विकास की राह पर
रायपुर ACGN:- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने नक्सलवाद को लेकर बड़ा बयान देते हुए कहा है कि कुख्यात नक्सली हिड़मा जैसे लोगों को आदर्श मानने और नक्सली हिंसा का समर्थन करने वाले ही ‘दिमागी नक्सली’ हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि हिंसा और निर्दोष लोगों की हत्या करने वालों का महिमामंडन किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं हो सकता।
एक निजी चैनल को दिए साक्षात्कार में मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ लंबे और पीड़ादायक नक्सली दौर से निकलकर अब शांति, विश्वास और विकास की नई राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। सुरक्षाबलों के साहस, केंद्र और राज्य सरकार की इच्छाशक्ति तथा बस्तर के लोगों के सहयोग से नक्सलवाद समाप्ति की ओर है।
हिंसा के नायकों का महिमामंडन क्यों?
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कुछ लोग आज भी ऐसे कुख्यात नक्सलियों को अपना आदर्श मानते हैं, जिन पर निर्दोष नागरिकों और सुरक्षाबलों की हत्या में शामिल होने के आरोप रहे हैं। उन्होंने कहा कि नक्सली हिंसा ने बस्तर की कई पीढ़ियों को भय, अभाव और पिछड़ेपन का सामना करने के लिए मजबूर किया।
मुख्यमंत्री के अनुसार बंदूक के दम पर निर्दोष लोगों की जान लेने वाला व्यक्ति समाज का आदर्श नहीं हो सकता। बस्तर ने नक्सली हिंसा में अनेक नागरिकों, जनप्रतिनिधियों और सुरक्षाबलों को खोया है तथा कई परिवारों ने अपनों को खोने का दर्द झेला है।
विचारों की स्वतंत्रता, लेकिन हिंसा का समर्थन नहीं
मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति को अपनी बात रखने और असहमति व्यक्त करने का अधिकार है, लेकिन हिंसा को उचित ठहराना और निर्दोष लोगों की हत्या करने वालों को नायक के रूप में प्रस्तुत करना स्वीकार्य नहीं है।
उन्होंने कहा कि नक्सलवाद की चुनौती केवल जंगल और बंदूक तक सीमित नहीं है। हिंसा को वैचारिक समर्थन देने और नक्सली हिंसा के जिम्मेदार लोगों का महिमामंडन करने वाली मानसिकता भी गंभीर चिंता का विषय है।
बस्तर की बदल रही तस्वीर
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर अब भय और हिंसा की पहचान से निकलकर विकास की नई तस्वीर गढ़ रहा है। स्कूल, सड़क, स्वास्थ्य सुविधाएं और सरकारी योजनाएं दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंच रही हैं। युवाओं के लिए शिक्षा, कौशल और रोजगार के नए अवसर तैयार हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि बस्तर का युवा अब बंदूक नहीं, बल्कि किताब, कलम, कौशल और रोजगार चाहता है। सरकार का लक्ष्य है कि बस्तर के हर युवा को आगे बढ़ने का अवसर मिले और हर परिवार विकास तथा सुशासन से जुड़े।
‘नए छत्तीसगढ़ में हिंसा के लिए कोई जगह नहीं’
मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई केवल सुरक्षा की लड़ाई नहीं, बल्कि बस्तर के भविष्य को बचाने की लड़ाई थी। सुरक्षाबलों ने अपने प्राणों की परवाह किए बिना इस संघर्ष को निर्णायक दौर तक पहुंचाया है।
उन्होंने कहा कि अब समाज की भी जिम्मेदारी है कि हिंसा की विचारधारा का किसी भी रूप में महिमामंडन न होने दे। बस्तर की नई पीढ़ी के आदर्श वे लोग होने चाहिए जो शिक्षा, सेवा, मेहनत, नवाचार और राष्ट्र निर्माण के जरिए समाज को आगे बढ़ा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि बस्तर में स्थापित हो रही शांति को स्थायी बनाते हुए क्षेत्र को पर्यटन, शिक्षा, रोजगार और विकास की नई पहचान दिलाई जाएगी।
प्रदीप मिश्रा संपादक
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