खनिज से मैन्युफैक्चरिंग तक छत्तीसगढ़ का बड़ा दांव!
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रायपुर, छत्तीसगढ़
By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :अनादि पांडेय रायपुर
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय बोले, सिर्फ खनिज उत्पादन नहीं, अन्वेषण से प्रसंस्करण और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग तक विकसित होगी पूरी वैल्यू चेन; 5 क्रिटिकल मिनरल ब्लॉक्स की नीलामी में निवेशकों से भागीदारी का आह्वान
रायपुर ACGN:- छत्तीसगढ़ अब अपनी खनिज संपदा को केवल खनन और उत्पादन तक सीमित रखने के बजाय अन्वेषण से लेकर प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, एडवांस मैन्युफैक्चरिंग और रिसाइक्लिंग तक पूरी मिनरल वैल्यू चेन प्रदेश में विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने नवा रायपुर में आयोजित क्रिटिकल एवं स्ट्रेटेजिक मिनरल ब्लॉक्स की नीलामी की आठवीं किश्त के रोड शो में यह बात कही।
मुख्यमंत्री ने कहा कि क्रिटिकल एवं स्ट्रेटेजिक मिनरल्स आने वाले समय में भारत की आर्थिक प्रगति, तकनीकी आत्मनिर्भरता और सामरिक सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण होंगे। रक्षा उद्योग से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, क्लीन एनर्जी, बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक्स और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग तक इन खनिजों की भूमिका लगातार बढ़ रही है।

छत्तीसगढ़ के 5 क्रिटिकल मिनरल ब्लॉक्स नीलामी में
नीलामी की आठवीं किश्त में देश के सात राज्यों के 20 क्रिटिकल एवं स्ट्रेटेजिक मिनरल ब्लॉक्स शामिल हैं, जिनमें छत्तीसगढ़ के 5 ब्लॉक्स हैं। मुख्यमंत्री ने निवेशकों से इन ब्लॉक्स की नीलामी में सक्रिय भागीदारी का आह्वान करते हुए कहा कि यह केवल खदान हासिल करने का अवसर नहीं, बल्कि प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, तकनीकी विकास और नए उद्योग स्थापित करने का बड़ा अवसर है।
मुख्यमंत्री के अनुसार कटघोरा और बस्तर में लिथियम एवं दुर्लभ मृदा तत्व, बलरामपुर में ग्रेफाइट, वैनेडियम एवं गैलियम, बालोद में फास्फोराइट तथा महासमुंद में निकेल, क्रोमियम और ग्लाकोनाइट जैसी खनिज संभावनाएं प्रदेश को नई औद्योगिक दिशा दे सकती हैं।

खनिज बाहर भेजने के बजाय प्रदेश में हो मूल्य संवर्धन
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल खनिज उत्पादन बढ़ाना नहीं है। खनिजों का प्रसंस्करण, वैल्यू एडिशन और उनसे जुड़े आधुनिक उद्योग प्रदेश में विकसित किए जाएंगे, ताकि प्राकृतिक संसाधनों का अधिकतम आर्थिक लाभ छत्तीसगढ़ और यहां के लोगों को मिले।
नवा रायपुर में एआई आधारित डेटा सेंटर पार्क और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर तथा राजनांदगांव में इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं। ऐसे उद्योगों में क्रिटिकल मिनरल्स की जरूरत होगी और प्रदेश में खनिज संसाधनों की उपलब्धता निवेश के लिए प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त दे सकती है।

निवेशकों के लिए आसान होगी राह
मुख्यमंत्री ने बताया कि नई औद्योगिक नीति, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और वन क्लिक सिंगल विंडो सिस्टम 2.0 के माध्यम से निवेश प्रक्रियाओं को सरल किया गया है। पूंजी निवेश सहायता, स्टांप शुल्क एवं विद्युत शुल्क में छूट, ब्याज अनुदान और रोजगार आधारित प्रोत्साहन जैसी सुविधाएं निवेशकों को दी जा रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में खनिज, ऊर्जा, भूमि, कनेक्टिविटी और औद्योगिक अधोसंरचना की उपलब्धता क्रिटिकल मिनरल आधारित उद्योगों के लिए मजबूत आधार तैयार करती है।

खनिज राजस्व 16 हजार करोड़ रुपए से अधिक
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य निर्माण के समय छत्तीसगढ़ का खनिज राजस्व लगभग 400 करोड़ रुपए था। ढाई वर्ष पहले यह करीब 12 हजार करोड़ रुपए था, जो अब बढ़कर 16 हजार करोड़ रुपए से अधिक हो गया है। खनिज राजस्व का उपयोग विकास एवं जनकल्याण कार्यों में किया जा रहा है। डीएमएफ के माध्यम से खनन प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास पर भी कार्य किया जा रहा है।

ई-रेत संगवारी और टिन पोर्टल का शुभारंभ
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने ई-रेत संगवारी पोर्टल और टिन पोर्टल का शुभारंभ किया। ई-रेत संगवारी के माध्यम से प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों को रियायती दर पर रेत उपलब्ध कराने की व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और सुगम बनाया जाएगा।
वहीं टिन पोर्टल के माध्यम से दंतेवाड़ा क्षेत्र के टिन से जुड़े आदिवासी समुदायों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने और व्यवस्था में पारदर्शिता लाने का प्रयास किया गया है।

सीएमडीसी के दो महत्वपूर्ण एमओयू
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम (सीएमडीसी) और इंडियन ओवरसीज बैंक के बीच एमओयू किया गया। इसके अलावा कोरन्डम कटिंग एवं पॉलिशिंग के प्रशिक्षण के लिए सीएमडीसी और पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के बीच भी समझौता हुआ। इससे वित्तीय सहयोग, कौशल विकास और खनिज क्षेत्र में मूल्य संवर्धन को गति मिलने की उम्मीद है।
केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने कहा कि क्रिटिकल मिनरल्स में आत्मनिर्भरता भारत की आर्थिक और रणनीतिक शक्ति के लिए आवश्यक है। वहीं केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने खनन के साथ पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय समुदायों के हित और सुनियोजित विकास पर जोर दिया।

छत्तीसगढ़ के लिए नई औद्योगिक संभावना
कार्यक्रम में अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में पिछले ढाई वर्षों में 40 एक्सप्लोरेशन प्रोजेक्ट शुरू किए गए हैं और 2,800 किलोमीटर से अधिक जियोलॉजिकल सर्वे पूरा किया गया है। राज्य में अब तक 65 खनिज ब्लॉक्स की नीलामी की जा चुकी है।
अब छत्तीसगढ़ के सामने चुनौती केवल खनिज उत्पादन बढ़ाने की नहीं, बल्कि खनिज संपदा को उद्योग, निवेश, तकनीक और रोजगार में बदलने की है। यदि अन्वेषण से लेकर मैन्युफैक्चरिंग और रिसाइक्लिंग तक पूरी वैल्यू चेन प्रदेश में विकसित होती है, तो छत्तीसगढ़ देश के क्रिटिकल मिनरल इकोसिस्टम का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।
मुख्यमंत्री का संदेश स्पष्ट है, छत्तीसगढ़ अब केवल खनिज निकालने वाला राज्य नहीं, बल्कि खनिजों से नई अर्थव्यवस्था और नए उद्योग गढ़ने वाला राज्य बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
प्रदीप मिश्रा
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