अपर कलेक्टर पर मारपीट के आरोप, कर्मचारियों की थाने में शिकायत; अधिकारी ने कहा, आरोप बेबुनियाद
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सूरजपुर, छत्तीसगढ़
By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- सौरभ साहू
लाइफ लाइन एक्सप्रेस की व्यवस्था के दौरान विवाद, दोनों पक्षों के दावे सामने; पुलिस जांच से खुलेगा घटनाक्रम का सच

सूरजपुर ACGN:- जिले के विश्रामपुर में लाइफ लाइन एक्सप्रेस के आयोजन के बीच नगर पंचायत के प्लेसमेंट कर्मचारियों और अपर कलेक्टर जगन्नाथ वर्मा के बीच विवाद का मामला सामने आया है।

कर्मचारियों ने अपर कलेक्टर पर मारपीट और धमकी देने के गंभीर आरोप लगाते हुए विश्रामपुर थाने में लिखित शिकायत दी है। वहीं अपर कलेक्टर ने कर्मचारियों के आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद बताते हुए मारपीट से साफ इनकार किया है। मामले में पुलिस ने शिकायत लेकर जांच शुरू कर दी है।

बताया जा रहा है कि विश्रामपुर रेलवे स्टेशन में लाइफ लाइन एक्सप्रेस के आयोजन को लेकर नगर पंचायत के प्लेसमेंट कर्मचारियों की ड्यूटी साफ-सफाई, सड़क सुधार और अन्य व्यवस्थाओं में लगाई गई थी।

इसी दौरान अपर कलेक्टर जगन्नाथ वर्मा मौके पर पहुंचे और व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। कर्मचारियों का आरोप है कि कार्य को लेकर नाराजगी जताते हुए अधिकारी ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया और कथित रूप से मारपीट एवं धमकी दी।

घटना के बाद कर्मचारियों में नाराजगी फैल गई और उन्होंने काम बंद कर नगर पंचायत कार्यालय पहुंचकर अपनी शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद कर्मचारी विश्रामपुर थाने पहुंचे और पूरे घटनाक्रम की लिखित शिकायत देते हुए कार्रवाई की मांग की।

कर्मचारी आकाश सिन्हा का आरोप है कि काम के दौरान अपर कलेक्टर ने नाराज होकर कर्मचारियों के साथ अभद्र व्यवहार किया और मारपीट की। वहीं कर्मचारी रितेश सिंह ने भी घटना को लेकर कार्रवाई की मांग की है।

अपर कलेक्टर बोले,सिर्फ व्यवस्था सुधारने के दिए निर्देश
दूसरी ओर अपर कलेक्टर जगन्नाथ वर्मा ने कर्मचारियों द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि लाइफ लाइन एक्सप्रेस जैसे महत्वपूर्ण आयोजन को देखते हुए मौके पर साफ-सफाई और आवश्यक व्यवस्थाओं को लेकर निर्देश दिए गए थे। उन्होंने किसी भी कर्मचारी के साथ मारपीट या धमकी देने से इनकार किया है।

अब पुलिस जांच पर टिकी निगाहें
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक योगेश देवांगन ने बताया कि पुलिस को कर्मचारियों की शिकायत प्राप्त हुई है। शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच की जाएगी और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि विवाद के दौरान वास्तव में क्या हुआ? क्या कर्मचारियों के साथ मारपीट हुई या फिर कार्य संबंधी विवाद को अलग रूप दिया गया? यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो क्या जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होगी? और यदि आरोप गलत साबित होते हैं तो क्या बिना आधार के शिकायत कर प्रशासनिक अधिकारी की छवि प्रभावित करने वालों पर भी कार्रवाई होगी?

फिलहाल मामला जांच के अधीन है। इसलिए किसी भी पक्ष को दोषी मानने के बजाय पुलिस जांच के निष्कर्ष का इंतजार करना जरूरी है। लेकिन इतना तय है कि मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच ही दोनों पक्षों के आरोपों के बीच छिपे सच को सामने ला सकती है।

प्रदीप मिश्रा
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