सुरता–मोहनपुर बांस नर्सरी में बांस कटाई से मचा हड़कंप, वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल
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सूरजपुर, छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- संतोष यादव
स्थानीय लोगों ने बड़ी संख्या में बांस काटे जाने का लगाया आरोप, विभाग की निगरानी और जवाबदेही पर उठे सवाल
सूरजपुर ACGN:- रामानुज नगर विकासखण्ड के अंतर्गत स्थित सुरता–मोहनपुर बांस नर्सरी में बड़ी संख्या में बांस कटे होने की तस्वीरें सामने आने के बाद क्षेत्र में वन विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नर्सरी से लंबे समय से बांस की कटाई की जा रही है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने समय रहते न तो इसकी रोकथाम के लिए प्रभावी कदम उठाए और न ही मामले को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक की।

ग्रामीणों का कहना है कि बांस नर्सरी का उद्देश्य वन संपदा का संरक्षण, संवर्धन और पर्यावरण संतुलन बनाए रखना है। ऐसे में यदि नर्सरी के भीतर बड़ी संख्या में बांस कटे हुए दिखाई दे रहे हैं, तो यह अपने आप में जांच का विषय है। लोगों का आरोप है कि वन विभाग की नियमित निगरानी होती तो इस प्रकार की स्थिति उत्पन्न नहीं होती।

ग्रामीणों ने यह भी सवाल उठाया है कि यदि बांस की कटाई विभाग की अनुमति से की गई है, तो इसकी सूचना स्थानीय स्तर पर क्यों नहीं दी गई। कटाई का उद्देश्य क्या था, कितने बांस काटे गए, किसके आदेश पर काटे गए और उनका उपयोग कहां किया गया, इन सभी सवालों के जवाब अब तक सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। इसी कारण लोगों के बीच संदेह की स्थिति बनी हुई है।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि वन क्षेत्र की सुरक्षा और संरक्षण की जिम्मेदारी वन विभाग पर होती है, लेकिन इस मामले में विभाग की भूमिका संदेह के घेरे में दिखाई दे रही है। लोगों का कहना है कि यदि अवैध कटाई हुई है तो यह विभाग की निगरानी व्यवस्था की गंभीर विफलता है, और यदि विभागीय अनुमति से कटाई हुई है तो पारदर्शिता का पालन किया जाना चाहिए था।
ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए। जांच में यह स्पष्ट किया जाए कि बांस की कटाई किसके निर्देश पर हुई, क्या इसके लिए सक्षम अधिकारी की अनुमति ली गई थी, कटे हुए बांस का रिकॉर्ड क्या है तथा विभाग द्वारा निर्धारित सभी नियमों का पालन किया गया या नहीं। यदि किसी भी स्तर पर अनियमितता या लापरवाही सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों और जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए।

क्षेत्र के लोगों का कहना है कि वन संपदा किसी एक विभाग की नहीं बल्कि पूरे समाज की धरोहर है। इसकी सुरक्षा और संरक्षण में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती। लोगों ने शासन और उच्च वन अधिकारियों से मांग की है कि मामले का स्वतः संज्ञान लेकर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी निगरानी व्यवस्था लागू की जाए।
हालांकि, इस मामले में वन विभाग का आधिकारिक पक्ष समाचार लिखे जाने तक प्राप्त नहीं हो सका है। इसलिए समाचार में उल्लेखित अवैध कटाई और विभागीय लापरवाही संबंधी बातें स्थानीय लोगों द्वारा लगाए गए आरोपों पर आधारित हैं। विभाग का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
प्रदीप मिश्रा
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