महाराजाधिराज उदय चंद महिला महाविद्यालय में साहित्य और राष्ट्रीय चेतना पर दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ
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बर्धमान, पश्चिम बंगाल
By ACGN 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- विनोद यादव
‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने पर भारत, नेपाल और मॉरीशस के विद्वानों ने साझा किए शोध एवं विचार
बर्धमान ACGN :- महाराजाधिराज उदय चंद महिला महाविद्यालय, बर्धमान के इतिहास विभाग एवं आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आईक्यूएसी) द्वारा हिंदी विश्वविद्यालय, हावड़ा के सहयोग से “राष्ट्र की कथा : औपनिवेशिक भारत में साहित्य और राष्ट्रीय चेतना – वंदे मातरम् के 150 वर्ष का उत्सव” विषय पर दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ 7 जुलाई 2026 को किया गया।
यह संगोष्ठी भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएसएसआर) के पूर्वी क्षेत्रीय केंद्र, कोलकाता तथा शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से महाविद्यालय के एपीजे अब्दुल कलाम सभागार में आयोजित की गई।
उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता बर्धमान विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) शंकर कुमार नाथ ने मुख्य अतिथि के रूप में की। कार्यक्रम में महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. अशरफी खातून, प्रख्यात इतिहासकार प्रो. प्रोजित कुमार पालित, प्रो. अपराजिता धर, मॉरीशस से डॉ. गिरजनंद सिंह बिसेसुर, डॉ. निशा ठाकुर, डॉ. हेमंत साहा सहित भारत एवं विदेश के अनेक शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों ने सहभागिता की।

कार्यक्रम का शुभारंभ वंदे मातरम् के सामूहिक गायन, दीप प्रज्ज्वलन, अतिथियों के स्वागत तथा संगोष्ठी की सार-संग्रह पुस्तिका के विमोचन के साथ हुआ।
संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य औपनिवेशिक भारत में राष्ट्रीय चेतना के निर्माण में साहित्य की भूमिका का विश्लेषण करना तथा ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूर्ण होने के ऐतिहासिक अवसर को अकादमिक विमर्श के माध्यम से स्मरण करना है। दो दिनों तक आयोजित होने वाले विभिन्न शैक्षणिक सत्रों में साहित्य, राष्ट्रवाद, मुद्रण संस्कृति, औपनिवेशिक विरोधी आंदोलन, सांस्कृतिक पहचान तथा अंतःविषयक शोध विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा व्याख्यान एवं शोध पत्र प्रस्तुत किए जाएंगे।

आयोजकों के अनुसार संगोष्ठी में भारत के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं शैक्षणिक संस्थानों के साथ-साथ नेपाल और मॉरीशस के विद्वानों द्वारा ऑफलाइन और ऑनलाइन माध्यम से 80 से अधिक शोध पत्र प्रस्तुत किए जा रहे हैं। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साहित्य, इतिहास और राष्ट्रीय चेतना के विषय में सार्थक संवाद को नई दिशा मिलेगी।
महाविद्यालय प्रशासन ने विश्वास व्यक्त किया कि यह अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी साहित्य, इतिहास, संस्कृति और राष्ट्रीय चेतना पर शोध को नई ऊर्जा प्रदान करेगी तथा देश-विदेश के शिक्षाविदों के बीच शैक्षणिक सहयोग को और अधिक मजबूत बनाएगी।
प्रदीप मिश्रा
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