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सनातन संस्कृति और परंपराओं की रक्षा के लिए केंद्र व राज्य सरकार कठोर कदम उठाए : स्वामी बिजयानंद जी

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भुवनेश्वर, ओडिशा

By ACGN 7647981711, 9303948009

धार्मिक परंपराओं के संरक्षण, श्री जगन्नाथ संस्कृति की मर्यादा और आस्था के सम्मान को लेकर संत समाज ने जताई चिंता

भुवनेश्वर। सनातन संस्कृति विद्वत परिषद के राष्ट्रीय सचिव एवं हिन्दूराष्ट्र महासभा भारत के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष स्वामी बिजयानंद जी महाराज ने कहा है कि सनातन संस्कृति और परंपराओं के विरुद्ध जाने वाले किसी भी संस्थान अथवा गतिविधि पर केंद्र एवं राज्य सरकारों को गंभीरता से विचार करते हुए कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत की हजारों वर्षों पुरानी संस्कृति, आध्यात्मिक परंपरा और धार्मिक विरासत केवल आस्था का विषय नहीं बल्कि हमारी सभ्यता की पहचान है।


एक धार्मिक आयोजन में उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए स्वामी बिजयानंद जी महाराज ने कहा कि श्रीक्षेत्र पुरी भगवान श्री जगन्नाथ की पवित्र भूमि है, जहां सनातन परंपराएं सदियों से जीवंत हैं। उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति ने मानव कल्याण, सद्भाव और विश्व शांति का संदेश दिया है।
उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में गुरु-शिष्य परंपरा, ऋषि-मुनियों की ज्ञान परंपरा और शास्त्रों में वर्णित जीवन मूल्यों का विशेष महत्व है। आधुनिकता के नाम पर यदि इन परंपराओं को तोड़ने या विकृत रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया जाता है तो यह समाज की भावनाओं से जुड़ा गंभीर विषय बन जाता है।


स्वामी बिजयानंद जी ने कहा कि भगवान श्री जगन्नाथ की रथ यात्रा सनातन संस्कृति की महान परंपरा है, जिसमें लाखों श्रद्धालु आस्था के साथ शामिल होते हैं। उन्होंने कहा कि धार्मिक परंपराओं को उनकी मूल भावना और शास्त्रीय मान्यताओं के अनुरूप ही प्रस्तुत किया जाना चाहिए। उन्होंने हाल ही में भगवान श्री जगन्नाथ पर आधारित प्रस्तावित एनिमेटेड फिल्म को लेकर गजपति महाराजा द्वारा जताई गई आपत्ति का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि धार्मिक विषयों पर आधारित किसी भी प्रस्तुति में शास्त्रों, परंपराओं और करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं का सम्मान आवश्यक है।


स्वामी बिजयानंद जी ने कहा कि रचनात्मक स्वतंत्रता के साथ धार्मिक संवेदनशीलता का संतुलन बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसे विषयों पर आधारित सामग्री की समीक्षा विद्वानों और विशेषज्ञों की समिति के माध्यम से कराई जानी चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो।


उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति की रक्षा केवल किसी एक वर्ग की जिम्मेदारी नहीं बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है। उन्होंने साधु-संतों और श्रद्धालुओं से अपनी संस्कृति, परंपराओं और आध्यात्मिक विरासत के प्रति जागरूक रहने का आह्वान किया।
स्वामी बिजयानंद जी ने कहा कि भारत की सनातन संस्कृति का मूल संदेश है — “सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः”। यही भावना विश्व कल्याण और मानवता के मार्ग को दिखाती है।

प्रदीप मिश्रा
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