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फ्लाई-ऐश से बन रहीं पर्यावरण-अनुकूल सड़कें, हरित विकास की नई मिसाल गढ़ रहा एनएचएआई

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रायपुर, छत्तीसगढ़

By ACGN 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- अनादि पांडेय

विश्व पर्यावरण दिवस विशेष: औद्योगिक कचरे के पुनर्चक्रण, जल संरक्षण और वन्यजीव संरक्षण के साथ विकसित हो रहा आधुनिक राजमार्ग नेटवर्क

रायपुर ACGN:- विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की दिशा में किए जा रहे प्रयासों के बीच भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा सड़क निर्माण के क्षेत्र में अपनाए जा रहे नवाचार चर्चा का विषय बने हुए हैं। आधुनिक सड़क अधोसंरचना के विकास के साथ-साथ पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से एनएचएआई विभिन्न परियोजनाओं में औद्योगिक कचरे के पुनर्चक्रण, जल संरक्षण और वन्यजीव संरक्षण को प्राथमिकता दे रहा है।


राजमार्ग निर्माण में थर्मल पावर प्लांटों से निकलने वाली फ्लाई-ऐश (राख) का उपयोग कर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में उल्लेखनीय पहल की गई है। छत्तीसगढ़ में वर्ष 2024-25 के दौरान 2.17 करोड़ मीट्रिक टन तथा वर्ष 2025-26 में 62 लाख मीट्रिक टन से अधिक फ्लाई-ऐश का उपयोग सड़क निर्माण में किया गया। वहीं वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक लगभग 20 लाख मीट्रिक टन फ्लाई-ऐश विभिन्न परियोजनाओं में खपाई जा चुकी है। इससे न केवल औद्योगिक कचरे का वैज्ञानिक उपयोग हो रहा है बल्कि पर्यावरणीय प्रदूषण को कम करने में भी मदद मिल रही है।
एनएचएआई द्वारा स्टील उद्योग से निकलने वाले स्लैग, अनुपयोगी टायरों के रबर और बायो-बिटुमेन जैसी वैकल्पिक सामग्रियों का भी उपयोग किया जा रहा है। वर्ष 2024-25 में 30,477 मीट्रिक टन तथा वर्ष 2025-26 में 2,691 मीट्रिक टन पुनर्चक्रित सामग्री का उपयोग कर ग्रीन हाईवे निर्माण को बढ़ावा दिया गया है।


जल संरक्षण के क्षेत्र में भी कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे 13 अमृत सरोवरों का निर्माण एवं जीर्णोद्धार किया गया है। वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने के लिए वाटर हार्वेस्टिंग पिट्स की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। साथ ही निर्माण कार्यों एवं पौधों की सिंचाई के लिए 323 किलोलीटर शोधित जल का उपयोग कर स्वच्छ पेयजल की बचत सुनिश्चित की गई है।


वन्यजीव संरक्षण को ध्यान में रखते हुए छत्तीसगढ़ के संवेदनशील वन क्षेत्रों में इको-फ्रेंडली अधोसंरचना विकसित की जा रही है। सीतानदी-उदंती अभ्यारण्य क्षेत्र में लगभग तीन किलोमीटर लंबी अत्याधुनिक सुरंग का निर्माण इसका प्रमुख उदाहरण है। इस परियोजना से वाहनों का आवागमन भूमिगत होगा और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास पर न्यूनतम प्रभाव पड़ेगा। इसके अलावा साउंड बैरियर्स, मंकी कैनोपी, एलिफेंट पास और एनिमल अंडरपास जैसी सुविधाएं भी विकसित की जा रही हैं।


स्थानीय जैव विविधता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए राजमार्गों के किनारे बी-कॉरिडोर और मेडिसीन पार्क विकसित करने की योजना पर भी कार्य किया जा रहा है। इससे प्राकृतिक परागण को बढ़ावा मिलेगा और किसानों की फसल उत्पादकता में वृद्धि होगी। वहीं औषधीय पौधों के रोपण से पर्यावरण संरक्षण के साथ स्थानीय समुदायों को भी लाभ मिलेगा।
एनएचएआई द्वारा संचालित “एक पेड़ माँ के नाम 2.0” अभियान के अंतर्गत पिछले वर्ष छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे एवं डिवाइडर्स पर ढाई लाख से अधिक पौधे लगाए गए। यह पहल हरित राजमार्गों के निर्माण और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।


विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर एनएचएआई की ये पहलें यह संदेश देती हैं कि विकास और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे के पूरक हो सकते हैं, बशर्ते योजनाओं का क्रियान्वयन दूरदृष्टि और संवेदनशीलता के साथ किया जाए।

प्रदीप मिश्रा
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