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महात्मा गांधी नरेगा से जल संरक्षण का महाअभियान, रोजगार और ग्रामीण समृद्धि को मिली नई ताकत

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रायपुर, छत्तीसगढ़

By ACGN 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- अनादि पांडेय

‘मोर गांव-मोर पानी’ अभियान बना जल संरक्षण, रोजगार और महिला सशक्तिकरण का मजबूत आधार

रायपुर ACGN:- जलवायु परिवर्तन और बढ़ते जल संकट के दौर में छत्तीसगढ़ ने जल संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़कर विकास का एक नया मॉडल प्रस्तुत किया है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अंतर्गत 24 अप्रैल 2025 से संचालित ‘मोर गांव-मोर पानी’ महाअभियान प्रदेश के गांवों में जल संरक्षण, रोजगार सृजन और आजीविका संवर्धन का सशक्त माध्यम बनकर उभरा है।
इस अभियान के तहत प्रदेशभर में लगभग 1610 करोड़ रुपये की लागत से एक लाख से अधिक जल संरक्षण एवं संवर्धन कार्यों का निर्माण किया जा रहा है। इन स्थायी परिसंपत्तियों के निर्माण से एक ओर जहां जल सुरक्षा मजबूत हो रही है, वहीं दूसरी ओर प्रतिदिन 11 लाख से अधिक ग्रामीण श्रमिकों को रोजगार मिल रहा है। उल्लेखनीय है कि इनमें 57 प्रतिशत महिलाएं शामिल हैं, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और सशक्तिकरण को दर्शाता है।


राज्य सरकार ने जल संरक्षण को सीधे आजीविका से जोड़ते हुए कई नवाचार किए हैं। प्रदेश में समाज के कमजोर एवं संवेदनशील वर्गों की निजी भूमि पर 13 हजार 65 आजीविका डबरियों का निर्माण पूरा किया जा चुका है। इन डबरियों के माध्यम से ग्रामीण परिवारों को मत्स्य पालन, बागवानी तथा अन्य आयवर्धक गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है, जिससे उनकी आय में वृद्धि हो रही है।


इसी प्रकार ‘नवा तरिया-आय के जरिया’ पहल के अंतर्गत 624 सामुदायिक तालाबों का विकास किया जा रहा है। इन तालाबों से स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को जोड़कर स्थायी रोजगार और आय के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इससे जल संरक्षण केवल प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन का विषय न रहकर ग्रामीण आर्थिक विकास का भी महत्वपूर्ण माध्यम बन गया है।


प्रदेश में प्रधानमंत्री आवास ग्रामीण योजना के अंतर्गत निर्मित 1.50 लाख से अधिक आवासों में हितग्राहियों ने स्वयं अपने खर्च से वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम स्थापित किए हैं। इससे वर्षा जल संचयन को बढ़ावा मिला है और भूजल स्तर सुधारने में सहायता मिल रही है।
अभियान की एक बड़ी विशेषता आधुनिक तकनीक का व्यापक उपयोग है। जल संरक्षण कार्यों की वैज्ञानिक योजना और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए जीआईएस आधारित युक्तधारा प्लानिंग, सीएलएआरटी एप और वाटरशेड सिद्धांतों का उपयोग किया जा रहा है। वहीं जलदूत प्रणाली के माध्यम से खुले कुओं के जलस्तर की नियमित निगरानी की जा रही है। ग्राम पंचायत भवनों में भूजल स्तर का लेखा-जोखा दर्ज कर स्थानीय स्तर पर जल बजट तैयार करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।


मनरेगा कार्यों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक ग्राम पंचायत में क्यूआर कोड आधारित सूचना प्रणाली लागू की गई है। इसके माध्यम से ग्रामीण अपने गांव में स्वीकृत और पूर्ण हुए कार्यों की जानकारी आसानी से प्राप्त कर सकते हैं। रोजगार दिवस, आवास दिवस, सामाजिक अंकेक्षण और जनसंवाद जैसे कार्यक्रमों के जरिए योजना में पारदर्शिता और जनविश्वास को और मजबूत किया जा रहा है।
‘मोर गांव-मोर पानी’ अभियान की सबसे बड़ी उपलब्धि इसमें आम जनता की सक्रिय भागीदारी है। जनप्रतिनिधियों, पंचायतों, स्वयं सहायता समूहों, युवाओं, सामाजिक संगठनों और ग्रामीण समुदाय की सहभागिता से यह अभियान अब जनआंदोलन का रूप ले चुका है। ग्राम सभाओं, जागरूकता अभियानों और संवाद कार्यक्रमों के माध्यम से जल संरक्षण को लोगों की जीवनशैली का हिस्सा बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
जल संरक्षण, रोजगार सृजन, महिला सशक्तिकरण, तकनीकी नवाचार और पारदर्शिता को एक साथ जोड़ने वाला यह अभियान छत्तीसगढ़ में ग्रामीण विकास की नई कहानी लिख रहा है। ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका प्रयास’ की भावना को साकार करते हुए यह पहल प्रदेश को पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण समृद्धि की दिशा में नई ऊंचाइयों तक पहुंचा रही है।

प्रदीप मिश्रा
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