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अरबों का कोयला देने वाला भटगांव पेयजल संकट से बेहाल : वार्ड 8 और 10 में नलों से निकल रहा काला पानी 

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भटगांव, छत्तीसगढ़ 

By ACGN 7647981711, 9303948009 

संवाददाता :- सौरभ साहू 

खनन प्रभावित क्षेत्र में मूलभूत सुविधाओं पर उठे सवाल, स्वच्छ पेयजल को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश 

भटगांव ACGN:- प्रदेश में ‘काले हीरे की नगरी’ के नाम से पहचान रखने वाला भटगांव क्षेत्र, जहां से देश की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर कोयला उत्पादन किया जाता है, वहीं दूसरी ओर यहां के नागरिक आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करते नजर आ रहे हैं। एसईसीएल भटगांव क्षेत्र की खदानों से हर महीने अरबों रुपये मूल्य का कोयला उत्पादन होने के बावजूद खनन प्रभावित वार्डों में स्वच्छ पेयजल की गंभीर समस्या सामने आई है। 



नगर पंचायत भटगांव के वार्ड क्रमांक 8 और 10 में पेयजल संकट लगातार गहराता जा रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जलापूर्ति के दौरान नलों से कई घंटों तक काला और कोयला मिश्रित पानी निकलता है, जो न तो पीने योग्य है और न ही घरेलू उपयोग के लिए सुरक्षित। इससे आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है और स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं भी बढ़ती जा रही हैं। 



स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह समस्या नई नहीं है, बल्कि लंबे समय से बनी हुई है। जिस क्षेत्र में वर्षों से कोयला खनन गतिविधियां संचालित हो रही हैं, वहां जल स्रोतों और पेयजल व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए था, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति इसके विपरीत दिखाई दे रही है। 



क्षेत्रवासियों ने यह भी बताया कि जल शोधन (फिल्टर) की व्यवस्था मौजूद होने के बावजूद वार्ड 8 और 10 तक दूषित पानी पहुंचने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। लोगों का कहना है कि खदान क्षेत्र से आने वाला पानी पहले सीधे प्रभावित इलाकों में पहुंचता है और बाद में शोधन प्रक्रिया से गुजरता है, जिससे जल गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। 

ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि एसईसीएल की खदानों से वर्षों से बड़े पैमाने पर उत्पादन होने के बावजूद खनन प्रभावित परिवार आज भी रोजगार और बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे में पेयजल संकट ने लोगों की समस्याओं को और अधिक गंभीर बना दिया है। 



स्थानीय लोगों ने जलापूर्ति व्यवस्था की निगरानी और रखरखाव पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि नियमित निरीक्षण और गुणवत्ता परीक्षण की कमी के कारण समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा है। 

नागरिकों का कहना है कि जब भटगांव क्षेत्र देश को ऊर्जा देने में अहम भूमिका निभा रहा है, तब यहां के खनन प्रभावित क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा सुनिश्चित करना संबंधित विभागों और एसईसीएल की जिम्मेदारी है। 

क्षेत्रवासियों ने उच्चस्तरीय जांच, जल गुणवत्ता परीक्षण तथा एसईसीएल और संबंधित विभागों की संयुक्त निगरानी में स्थायी समाधान की मांग की है, ताकि लोगों को सुरक्षित पेयजल मिल सके और उन्हें मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष न करना पड़े। 

प्रदीप मिश्रा 
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