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जनता से बदसलूकी पर मुख्यमंत्री का बड़ा एक्शन: दुर्ग जनपद सीईओ निलंबित

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।रायपुर, छत्तीसगढ़


By ACGN 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- अनादि पांडेय


सुशासन के मंच पर जवाबदेही का बड़ा संदेश, जनता का अपमान करने वाले अधिकारी पर तत्काल कार्रवाई

सुशासन तिहार में शिकायतकर्ता से अशिष्ट व्यवहार पड़ा भारी, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दिया जीरो टॉलरेंस का संदेशरायपुर ACGN :- छत्तीसगढ़ में सुशासन तिहार के दौरान आम नागरिकों के साथ अशिष्ट व्यवहार करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कड़ा संदेश दिया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि जनता की समस्याएं सुनने और उनका समाधान करने के लिए आयोजित किए जा रहे शिविरों में किसी भी प्रकार की लापरवाही, अभद्रता अथवा गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इसी कड़ी में दुर्ग जिले के ग्राम थनौद में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर के दौरान जनपद पंचायत दुर्ग के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) श्री रूपेश कुमार पाण्डेय द्वारा आम नागरिकों के साथ कथित अशिष्ट व्यवहार का मामला सामने आने पर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने तत्काल संज्ञान लिया और दुर्ग संभागायुक्त को उनके निलंबन के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद संभागायुक्त दुर्ग ने तत्काल प्रभाव से निलंबन आदेश जारी कर दिया।
वीडियो क्लिप बनी कार्रवाई का आधार
जानकारी के अनुसार सुशासन तिहार के तहत आयोजित शिविर में एक शिकायतकर्ता के साथ सीईओ रूपेश कुमार पाण्डेय के व्यवहार का वीडियो सोशल मीडिया और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा का विषय बना था। कलेक्टर दुर्ग द्वारा भेजे गए प्रस्ताव और उपलब्ध वीडियो फुटेज के परीक्षण के बाद प्रथम दृष्टया यह पाया गया कि अधिकारी द्वारा अपने कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही और आम नागरिक के प्रति अशिष्ट व्यवहार किया गया।
मामले में अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया था, लेकिन प्रस्तुत जवाब संतोषजनक नहीं पाए जाने पर निलंबन की कार्रवाई की गई।
लोकसेवक का पहला धर्म है शिष्ट व्यवहार
निलंबन आदेश में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के अनुसार प्रत्येक शासकीय सेवक का दायित्व है कि वह पूर्ण सत्यनिष्ठा, कर्तव्यपरायणता और शालीनता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करे। नियम 3 तथा नियम 3-क के तहत कोई भी अधिकारी अपने पदीय कर्तव्यों के निर्वहन में अशिष्टता या अनुचित व्यवहार नहीं कर सकता।
लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता ही सर्वोपरि होती है और सरकारी अधिकारी जनता के सेवक के रूप में कार्य करते हैं। ऐसे में किसी भी नागरिक के साथ अभद्र व्यवहार शासन की मंशा और प्रशासनिक मूल्यों के विपरीत माना जाता है।
मुख्यमंत्री का स्पष्ट संदेश — जनता का सम्मान सर्वोपरि
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय लगातार सुशासन तिहार के माध्यम से प्रदेशभर में यह संदेश दे रहे हैं कि सरकार केवल योजनाएं बनाने तक सीमित नहीं है बल्कि जनता के बीच जाकर समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिकता है। ऐसे समय में यदि कोई अधिकारी जनता के साथ असम्मानजनक व्यवहार करता है तो वह सरकार की जनहितकारी मंशा को भी प्रभावित करता है।
राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इस कार्रवाई को मुख्यमंत्री के उस संदेश के रूप में देखा जा रहा है जिसमें उन्होंने स्पष्ट किया है कि सुशासन केवल योजनाओं और घोषणाओं का नाम नहीं, बल्कि जनता के प्रति संवेदनशील और जवाबदेह प्रशासन का नाम है।
अन्य अधिकारियों के लिए भी चेतावनी
प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि यह कार्रवाई केवल एक अधिकारी के निलंबन तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे प्रशासनिक अमले के लिए एक स्पष्ट संकेत है कि जनता की शिकायतों को गंभीरता से सुना जाए और उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित किया जाए। आने वाले समय में सुशासन तिहार और अन्य जनसंपर्क कार्यक्रमों में अधिकारियों की जवाबदेही और अधिक बढ़ सकती है।
निलंबन अवधि में मिलेगा जीवन निर्वाह भत्ता
संभागायुक्त द्वारा जारी आदेश के अनुसार निलंबन अवधि में श्री रूपेश कुमार पाण्डेय को नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता प्रदान किया जाएगा। आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।
प्रश्न यह भी…
क्या यह कार्रवाई प्रदेश के अन्य जिलों में भी अधिकारियों के व्यवहार में बदलाव लाएगी? क्या जनसुनवाई और समाधान शिविरों में आम नागरिकों को अब अधिक सम्मानजनक वातावरण मिलेगा? और क्या प्रशासनिक जवाबदेही की यह मिसाल भविष्य में शासन-प्रशासन की कार्यशैली को और अधिक जनोन्मुखी बनाएगी?

रायपुर ACGN :- छत्तीसगढ़ में सुशासन तिहार के दौरान आम नागरिकों के साथ अशिष्ट व्यवहार करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कड़ा संदेश दिया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि जनता की समस्याएं सुनने और उनका समाधान करने के लिए आयोजित किए जा रहे शिविरों में किसी भी प्रकार की लापरवाही, अभद्रता अथवा गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इसी कड़ी में दुर्ग जिले के ग्राम थनौद में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर के दौरान जनपद पंचायत दुर्ग के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) श्री रूपेश कुमार पाण्डेय द्वारा आम नागरिकों के साथ कथित अशिष्ट व्यवहार का मामला सामने आने पर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने तत्काल संज्ञान लिया और दुर्ग संभागायुक्त को उनके निलंबन के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद संभागायुक्त दुर्ग ने तत्काल प्रभाव से निलंबन आदेश जारी कर दिया।
वीडियो क्लिप बनी कार्रवाई का आधार
जानकारी के अनुसार सुशासन तिहार के तहत आयोजित शिविर में एक शिकायतकर्ता के साथ सीईओ रूपेश कुमार पाण्डेय के व्यवहार का वीडियो सोशल मीडिया और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा का विषय बना था। कलेक्टर दुर्ग द्वारा भेजे गए प्रस्ताव और उपलब्ध वीडियो फुटेज के परीक्षण के बाद प्रथम दृष्टया यह पाया गया कि अधिकारी द्वारा अपने कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही और आम नागरिक के प्रति अशिष्ट व्यवहार किया गया।
मामले में अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया था, लेकिन प्रस्तुत जवाब संतोषजनक नहीं पाए जाने पर निलंबन की कार्रवाई की गई।
लोकसेवक का पहला धर्म है शिष्ट व्यवहार
निलंबन आदेश में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के अनुसार प्रत्येक शासकीय सेवक का दायित्व है कि वह पूर्ण सत्यनिष्ठा, कर्तव्यपरायणता और शालीनता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करे। नियम 3 तथा नियम 3-क के तहत कोई भी अधिकारी अपने पदीय कर्तव्यों के निर्वहन में अशिष्टता या अनुचित व्यवहार नहीं कर सकता।
लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता ही सर्वोपरि होती है और सरकारी अधिकारी जनता के सेवक के रूप में कार्य करते हैं। ऐसे में किसी भी नागरिक के साथ अभद्र व्यवहार शासन की मंशा और प्रशासनिक मूल्यों के विपरीत माना जाता है।
मुख्यमंत्री का स्पष्ट संदेश — जनता का सम्मान सर्वोपरि
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय लगातार सुशासन तिहार के माध्यम से प्रदेशभर में यह संदेश दे रहे हैं कि सरकार केवल योजनाएं बनाने तक सीमित नहीं है बल्कि जनता के बीच जाकर समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिकता है। ऐसे समय में यदि कोई अधिकारी जनता के साथ असम्मानजनक व्यवहार करता है तो वह सरकार की जनहितकारी मंशा को भी प्रभावित करता है।
राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इस कार्रवाई को मुख्यमंत्री के उस संदेश के रूप में देखा जा रहा है जिसमें उन्होंने स्पष्ट किया है कि सुशासन केवल योजनाओं और घोषणाओं का नाम नहीं, बल्कि जनता के प्रति संवेदनशील और जवाबदेह प्रशासन का नाम है।
अन्य अधिकारियों के लिए भी चेतावनी
प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि यह कार्रवाई केवल एक अधिकारी के निलंबन तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे प्रशासनिक अमले के लिए एक स्पष्ट संकेत है कि जनता की शिकायतों को गंभीरता से सुना जाए और उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित किया जाए। आने वाले समय में सुशासन तिहार और अन्य जनसंपर्क कार्यक्रमों में अधिकारियों की जवाबदेही और अधिक बढ़ सकती है।
निलंबन अवधि में मिलेगा जीवन निर्वाह भत्ता
संभागायुक्त द्वारा जारी आदेश के अनुसार निलंबन अवधि में श्री रूपेश कुमार पाण्डेय को नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता प्रदान किया जाएगा। आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।

प्रदीप मिश्रा
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