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जल संरक्षण के साथ मिल रहा बंपर रोजगार, “मोर गांव, मोर तरिया” अभियान से संवर रहे ग्रामीण क्षेत्र

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बिलासपुर, छत्तीसगढ़

By ACGN 7647981711, 9303948009

जल संरक्षण और रोजगार सृजन का अनूठा संगम, बिलासपुर जिले में 38 नए तालाबों के निर्माण से ग्रामीण विकास को मिल रही नई दिशा

बिलासपुर ACGN:- छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी जल संरक्षण एवं संवर्धन योजना “मोर गांव, मोर तरिया” अभियान के तहत बिलासपुर जिले में व्यापक स्तर पर कार्य किए जा रहे हैं। इस अभियान के माध्यम से गांवों में जल संरक्षण को बढ़ावा देने के साथ-साथ ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है। अभियान ग्रामीण विकास, पर्यावरण संरक्षण और जल सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हो रहा है।
राज्य सरकार द्वारा जल संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देने के उद्देश्य से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में बिलासपुर जिले के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में नवीन तालाबों के निर्माण कार्य तेजी से संचालित किए जा रहे हैं। इन कार्यों से आने वाले वर्षों में जल संकट की समस्या को कम करने में मदद मिलेगी तथा कृषि और पशुपालन को भी मजबूती मिलेगी।


जनपद पंचायत मस्तूरी की ग्राम पंचायत बोहारडीह में नवीन तरिया (तालाब) निर्माण का कार्य युद्धस्तर पर जारी है। प्रशासन ने मानसून पूर्व सभी निर्माण कार्यों को गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। अधिकारियों का मानना है कि यदि वर्षा ऋतु से पहले निर्माण कार्य पूर्ण हो जाता है तो इस वर्ष अधिक मात्रा में वर्षा जल का संचयन किया जा सकेगा, जिससे क्षेत्र के जल स्रोतों को मजबूती मिलेगी।


जिले में जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए कुल 38 नवीन तालाबों के निर्माण को प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है। इन सभी परियोजनाओं पर तेजी से कार्य किया जा रहा है। तालाबों के निर्माण से भू-जल स्तर में सुधार होगा, किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध होगा तथा मवेशियों के लिए निस्तारी की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित होगी। इसके अलावा गर्मी के मौसम में ग्रामीण क्षेत्रों में होने वाली जल संकट की समस्या से भी राहत मिलेगी।


“मोर गांव, मोर तरिया” अभियान ग्रामीणों के लिए दोहरा लाभ लेकर आया है। एक ओर गांवों में स्थायी जल संरचनाओं का निर्माण हो रहा है, वहीं दूसरी ओर बड़ी संख्या में स्थानीय श्रमिकों को रोजगार भी मिल रहा है। निर्माण कार्यों में स्थानीय ग्रामीणों की भागीदारी से उन्हें अपने गांव में ही रोजगार उपलब्ध हो रहा है, जिससे पलायन पर प्रभावी रोक लग रही है और ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है।
प्रशासन द्वारा निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए विशेष निगरानी रखी जा रही है। अधिकारी नियमित रूप से निर्माण स्थलों का निरीक्षण कर रहे हैं ताकि कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप और समय-सीमा के भीतर पूरे हो सकें। शासन का उद्देश्य केवल जल संरचनाओं का निर्माण करना नहीं, बल्कि उन्हें दीर्घकालिक और उपयोगी बनाना भी है।
“मोर गांव, मोर तरिया” अभियान आज जल संरक्षण, रोजगार सृजन और ग्रामीण विकास का एक सफल मॉडल बनकर उभर रहा है। इससे न केवल गांवों की तस्वीर बदल रही है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा की मजबूत नींव भी तैयार हो रही है।

प्रदीप मिश्रा
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