जड़ी-बूटियों से बदल रही तस्वीर, महिलाओं को मिल रहा स्वावलंबन का संबल
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रायपुर, छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009
औषधि पादप बोर्ड की पहल से ग्रामीण महिलाएं बनीं उद्यमी, ‘छत्तीसगढ़ हर्बल्स’ को मिल रही नई पहचान
रायपुर ACGN:- छत्तीसगढ़ के वनांचल में पाई जाने वाली समृद्ध औषधीय संपदा अब केवल स्वास्थ्य तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह प्रदेश की महिलाओं के आर्थिक स्वावलंबन का मजबूत आधार बनती जा रही है। राज्य सरकार की पहल और औषधि पादप बोर्ड की नई कार्ययोजना के तहत ग्रामीण महिलाएं जड़ी-बूटियों के संग्रहण से आगे बढ़कर उनके प्रसंस्करण और विपणन में सक्रिय भागीदारी निभा रही हैं। इससे न केवल उनकी आय में वृद्धि हो रही है, बल्कि आत्मनिर्भरता की दिशा में भी वे मजबूती से कदम बढ़ा रही हैं।

वन क्षेत्रों में सदियों से संजोया गया पारंपरिक ज्ञान अब वैज्ञानिक पद्धति से जुड़कर नई पहचान बना रहा है। स्थानीय वैद्यों और पारंपरिक जानकारों का चिन्हांकन कर उनके ज्ञान को संरक्षित किया जा रहा है, जिससे समाज को लाभ मिलने के साथ-साथ महिलाओं को भी आर्थिक मजबूती मिल रही है। यह पहल परंपरा और आधुनिकता के संगम का सशक्त उदाहरण बन रही है।
जड़ी-बूटियों के संग्रहण से लेकर उनके प्रसंस्करण तक महिलाओं की भूमिका में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। महिला स्व-सहायता समूहों को आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे वे कच्चे उत्पादों को चूर्ण, अर्क और तेल के रूप में तैयार कर बेहतर मूल्य प्राप्त कर रही हैं। ‘छत्तीसगढ़ हर्बल्स’ ब्रांड के माध्यम से इन उत्पादों को बाजार में पहचान मिल रही है, जिससे बिचौलियों की भूमिका कम हुई है और लाभ सीधे महिलाओं तक पहुंच रहा है।

प्रदेश में 65 से अधिक लघु वन उपज प्रजातियों की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी और उनके मूल्य संवर्धन का कार्य किया जा रहा है। इससे न केवल वन संसाधनों का संरक्षण हो रहा है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है। बस्तर सहित विभिन्न क्षेत्रों में दुर्लभ जड़ी-बूटियों की उपलब्धता छत्तीसगढ़ को ‘जड़ीबूटी गढ़’ के रूप में स्थापित कर रही है।
विपणन व्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए प्रदर्शनियों और रिटेल आउटलेट्स के माध्यम से हर्बल उत्पादों को सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जा रहा है। इससे ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘लखपति दीदी’ जैसे अभियानों को भी गति मिल रही है।
इसके साथ ही औषधीय पौधों की नर्सरी विकसित करने की जिम्मेदारी महिला समूहों को सौंपकर स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित किए जा रहे हैं। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ पलायन की समस्या पर भी नियंत्रण पाया जा रहा है।
राज्य सरकार के इस समेकित प्रयास से छत्तीसगढ़ की महिलाएं आत्मनिर्भर बनकर एक सशक्त समाज की नींव रख रही हैं। वनांचल की इन महिलाओं की सफलता यह साबित कर रही है कि सही मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर वे विकास की नई इबारत लिख सकती हैं।
प्रदीप मिश्रा
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