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डिजिटल अरेस्ट ठगी का बड़ा खुलासा, 37 लाख की साइबर ठगी में 5 अंतर्राज्यीय आरोपी गिरफ्तार

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रायगढ़, छत्तीसगढ़

By ACGN 7647981711, 9303948009

संवाददाता संजय जेठवानी


फर्जी IPS, CBI और टेलीकॉम अधिकारी बनकर रचते थे जाल, राजस्थान से दबिश देकर गिरोह पकड़ा, देशभर में 1.40 करोड़ की ठगी का खुलासा

रायगढ़ साइबर पुलिस ने “डिजिटल अरेस्ट” के नाम पर की जा रही बड़ी साइबर ठगी का पर्दाफाश करते हुए महिला सहित पांच अंतर्राज्यीय आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह बेहद संगठित तरीके से फर्जी टेलीकॉम अधिकारी, पुलिस अफसर और सीबीआई अधिकारी बनकर लोगों को डराता था और उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग जैसे मामलों में फंसाने की धमकी देकर भारी रकम ऐंठता था।


मामले का खुलासा तब हुआ जब रायगढ़ के सेवानिवृत्त विद्युत विभाग पर्यवेक्षक नरेन्द्र ठाकुर ने फरवरी 2026 में साइबर थाना में शिकायत दर्ज कराई कि उनसे डिजिटल अरेस्ट का भय दिखाकर 36,97,117 रुपये की ठगी की गई है। आरोपियों ने खुद को टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) का अधिकारी बताकर संपर्क किया और बाद में फर्जी पुलिस एवं सीबीआई अधिकारियों से वीडियो कॉल कर पीड़ित को गिरफ्तारी का डर दिखाया।

साइबर ठगी का पीड़ित


ठगों ने पीड़ित से बैंक खातों और संपत्ति की जानकारी लेकर अलग-अलग खातों में पैसे ट्रांसफर कराए, यह कहकर कि जांच पूरी होने पर रकम वापस कर दी जाएगी। भय और दबाव में आकर पीड़ित ने 30 जनवरी से 11 फरवरी के बीच लगभग 37 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। हालांकि शिकायत मिलते ही साइबर पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए करीब 2 लाख रुपये होल्ड करवा लिए।


एसएसपी शशि मोहन सिंह के निर्देशन में साइबर थाना रायगढ़ ने तकनीकी जांच, बैंक ट्रेल और साइबर इंटेलिजेंस के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया। जांच में सामने आया कि ठगी की रकम का एक हिस्सा राजस्थान के भीलवाड़ा स्थित खातों में जमा हुआ है। इसके बाद विशेष टीम गठित कर भीलवाड़ा में दबिश दी गई, जहां बंधन बैंक के कर्मचारी राहुल व्यास को हिरासत में लिया गया। पूछताछ में पूरे गिरोह का खुलासा हुआ।
गिरफ्तार आरोपियों में राहुल व्यास (मास्टरमाइंड), रविराज सिंह, संजय मीणा, आरती राजपूत और गौरव व्यास शामिल हैं। पूछताछ में सामने आया कि आरोपी लंबे समय से साइबर ठगी में सक्रिय थे और विभिन्न राज्यों में लोगों को डिजिटल अरेस्ट का भय दिखाकर ठगी करते थे। गिरोह ने इंटरनेट और वीडियो के माध्यम से साइबर अपराध के तरीके सीखे और संगठित रूप से काम करना शुरू किया।


पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह द्वारा देशभर में करीब 1,40,77,300 रुपये की ठगी की जा चुकी है। आरोपियों के बैंक खातों में भारी लेन-देन के साक्ष्य मिले हैं, जिनमें से कई खाते सीज कर दिए गए हैं। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 7 मोबाइल फोन, 1 लैपटॉप और अन्य महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य जब्त किए हैं।
पूरे ऑपरेशन को एसएसपी शशि मोहन सिंह के निर्देशन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनिल सोनी के मार्गदर्शन तथा सीएसपी मयंक मिश्रा एवं डीएसपी साइबर उन्नति ठाकुर के पर्यवेक्षण में अंजाम दिया गया। कार्रवाई में थाना प्रभारी साइबर निरीक्षक विजय चेलक सहित पूरी टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही।


इस मामले पर कड़ा संदेश देते हुए एसएसपी शशि मोहन सिंह ने आम जनता से अपील की है कि डिजिटल अरेस्ट, फर्जी पुलिस, सीबीआई या टेलीकॉम अधिकारी बनकर आने वाले कॉल से सतर्क रहें। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कोई भी जांच एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर पैसे ट्रांसफर नहीं कराती। ऐसे मामलों में घबराएं नहीं, तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।
यह कार्रवाई न केवल रायगढ़ पुलिस की सतर्कता और तकनीकी दक्षता को दर्शाती है, बल्कि आम नागरिकों के लिए भी एक महत्वपूर्ण चेतावनी है कि साइबर अपराधी लगातार नए-नए तरीकों से लोगों को निशाना बना रहे हैं।


प्रदीप मिश्रा
निष्पक्ष, निर्भीक और जनसरोकारों के प्रति समर्पित अंजोर छत्तीसगढ़ न्यूज़

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