सामने सलाम, पीछे निशाना: पत्रकारों की रोज़मर्रा की जंग
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बलांगीर, ओडिशा
By ACGN 7647981711, 9303948009
ओड़िशा ब्यूरो स्वामी विजयानंद जी महाराज
पत्रकार पवन अग्रवाल ने कहा—आलोचना तथ्यों और मुद्दों तक सीमित रहे, व्यक्तिगत हमलों से पत्रकारिता कमजोर होती है
बलांगीर में ओडिशा यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट एसोसिएशन की बलांगीर शाखा के संगठन संपादक पत्रकार पवन अग्रवाल ने पत्रकारिता के सामने आने वाली चुनौतियों पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है, लेकिन इस स्तंभ को मजबूत बनाए रखने वाले पत्रकार अक्सर एक कड़वी सच्चाई से जूझते हैं। कई बार सामने प्रशंसा और सम्मान मिलता है, लेकिन पीठ पीछे अनावश्यक आलोचना और आरोप लगाए जाते हैं।
उन्होंने कहा कि पत्रकारों को तीखी प्रतिक्रिया और आलोचना सहने की आदत होती है क्योंकि वे सार्वजनिक हित से जुड़े मुद्दों को उजागर करते हैं। फिर भी यह आवश्यक है कि आलोचना तथ्यों और मुद्दों तक सीमित रहे और उसे व्यक्तिगत हमलों या अपमानजनक टिप्पणियों का रूप न दिया जाए।
पवन अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि बिना प्रमाण के किसी पत्रकार की छवि खराब करने का प्रयास न केवल अनैतिक है बल्कि यह कानूनी विवाद को भी जन्म दे सकता है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है और समाज के प्रत्येक व्यक्ति को इसका पालन करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि एक सच्चा पत्रकार हर प्रतिक्रिया को समझता है, सही आलोचना से सीखता है और निराधार बातों को नजरअंदाज करता है। वहीं समाज का भी दायित्व है कि वह असहमति को सभ्य और तथ्यात्मक तरीके से व्यक्त करे।
उन्होंने अंत में कहा कि पत्रकार की असली ताकत उसकी निष्पक्षता, साहस और विश्वसनीयता में होती है। आलोचना अवश्य करें, लेकिन मर्यादा में करें क्योंकि शब्द भी जिम्मेदारी मांगते हैं।
प्रदीप मिश्रा
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