लेमरू में दौड़ी जिंदगी की नई रफ्तार, संजीवनी 108 सेवा से ग्रामीणों को त्वरित उपचार
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कोरबा, छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009
कलेक्टर कुणाल दुदावत की पहल पर दुर्गम वनांचल में एम्बुलेंस तैनात, 20 गांवों की 16 हजार आबादी को मिल रहा स्वास्थ्य लाभ
कोरबा जिले के अत्यंत दुर्गम वनांचल लेमरू क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में एक नई पहल शुरू हुई है। कलेक्टर श्री कुणाल दुदावत के निर्देश पर यहां संजीवनी एक्सप्रेस 108 एंबुलेंस सेवा की तैनाती की गई है, जिससे अब दूरस्थ गांवों के ग्रामीणों को आपात स्थिति में त्वरित उपचार उपलब्ध हो रहा है। जिला मुख्यालय से लगभग 80 से 90 किलोमीटर दूर स्थित इस क्षेत्र में पहाड़ी कोरवा और बिरहोर जैसी विशेष पिछड़ी जनजातियों की बड़ी आबादी निवास करती है और लंबे समय तक यहां स्वास्थ्य सुविधाएं सीमित थीं।
पहले किसी भी आपात स्थिति में मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने में 5 से 6 घंटे तक का समय लग जाता था, जिससे कई बार मरीजों की स्थिति गंभीर हो जाती थी। इस चुनौती को देखते हुए प्रशासन ने लेमरू क्षेत्र में आधुनिक सुविधाओं से लैस संजीवनी 108 एंबुलेंस सेवा शुरू की है, जो अब एक फोन कॉल पर गांवों तक पहुंचकर मरीजों को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध करा रही है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि आयुष्मान आरोग्य मंदिर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लेमरू के अंतर्गत आने वाले लगभग 20 गांवों की 16 हजार से अधिक आबादी को इस सेवा का सीधा लाभ मिल रहा है। इनमें लगभग 1700 से अधिक लोग विशेष पिछड़ी जनजातियों से संबंधित हैं। गढ़उपरोड़ा, देवपहरी, अरसेना, नकिया, लेमरू, रापा, बड़गांव, छातीबहार, लामपहाड़, डोकरमना और विमलता जैसे दूरस्थ गांव अब इस सेवा से सीधे जुड़ गए हैं।
संजीवनी 108 एंबुलेंस केवल मरीजों को अस्पताल पहुंचाने का साधन नहीं है बल्कि यह एक चलती-फिरती जीवनरक्षक इकाई के रूप में कार्य कर रही है। इसमें फोल्डेबल और कैनवास स्ट्रेचर, व्हीलचेयर, ऑक्सीजन सिलेंडर, पल्स ऑक्सीमीटर, बीपी और शुगर जांच उपकरण, बर्न किट, डिलीवरी किट, सक्षन मशीन और आवश्यक दवाओं की व्यवस्था उपलब्ध है। गंभीर मरीजों के लिए एएलएस सुविधा के तहत वेंटिलेटर भी लगाया गया है और प्रशिक्षित ईएमटी स्टाफ हर समय सेवा के लिए तैनात रहता है।
पिछले एक वर्ष में इस सेवा के माध्यम से लगभग 1200 मरीजों को समय पर उपचार मिल चुका है। हृदयघात, सड़क दुर्घटनाएं, सर्पदंश, प्रसव संबंधी जटिलताएं और मलेरिया-डेंगू जैसी गंभीर बीमारियों में यह सेवा कई लोगों के लिए जीवनरक्षक साबित हुई है। पहले जहां मरीजों को चारपाई पर ढोकर अस्पताल ले जाना पड़ता था, वहीं अब एंबुलेंस की सायरन सुनते ही ग्रामीण रास्ता बना देते हैं क्योंकि उन्हें पता है कि यह सेवा किसी की जान बचाने आई है।
कोरबा जिले को हाल ही में 12 नई संजीवनी 108 एंबुलेंस प्राप्त हुई हैं, जिनमें से एक को विशेष रूप से लेमरू क्षेत्र में तैनात किया गया है। जिले में पहले से 11 पुरानी 108 और 14 महतारी 102 एंबुलेंस सेवाएं संचालित हैं, जिससे पूरे जिले की आपातकालीन स्वास्थ्य व्यवस्था और अधिक मजबूत हुई है।
लेमरू प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अपनी गुणवत्तापूर्ण सेवाओं के कारण पहले ही राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक का प्रमाण पत्र प्राप्त कर चुका है। अब संजीवनी 108 सेवा के जुड़ने से यहां की स्वास्थ्य व्यवस्था और सुदृढ़ हो गई है तथा दूरस्थ क्षेत्रों के मरीजों को समय पर बेहतर उपचार उपलब्ध कराना संभव हो पाया है।
इस पहल से आर्थिक रूप से कमजोर आदिवासी परिवारों को भी बड़ी राहत मिली है क्योंकि दुर्गम रास्तों और संसाधनों की कमी के कारण निजी वाहन का खर्च उठाना उनके लिए कठिन था। अब सरकारी एंबुलेंस सेवा के माध्यम से उन्हें बिना किसी अतिरिक्त बोझ के त्वरित चिकित्सा सहायता मिल रही है। लेमरू के ग्रामीणों के लिए यह सेवा अब केवल सुविधा नहीं बल्कि भरोसे का प्रतीक बन चुकी है और इसने वनांचल क्षेत्र में स्वास्थ्य सुरक्षा की नई उम्मीद जगाई है।
प्रदीप मिश्रा
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