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सच की तह तक

कोरबा की राख में दबा सच: चौथी बार टूटा राखड़ डैम, 25 वर्षीय ऑपरेटर की मौत ने खड़े किए सिस्टम पर गंभीर सवाल

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कोरबा छत्तीसगढ़

By ACGN 7647981711, 9303948009


कोरबा। औद्योगिक विकास की चमक के पीछे छिपी भयावह सच्चाई एक बार फिर सामने आई है। छत्तीसगढ़ की ऊर्जा राजधानी कहे जाने वाले कोरबा में छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी लिमिटेड के अंतर्गत संचालित हसदेव थर्मल पावर प्लांट के झाबु क्षेत्र स्थित राखड़ डैम का तटबंध रविवार 19 अप्रैल 2026 को फिर टूट गया। पिछले दो महीनों में यह चौथी बार हुआ हादसा था, लेकिन इस बार राख के इस ढेर ने एक युवा की जिंदगी ही निगल ली।


मरम्मत कार्य के दौरान काम कर रही पोकलेन और जेसीबी मशीन अचानक राखड़ के दलदल में धंस गई। मशीन के साथ उसमें बैठे ऑपरेटर तुलेश्वर कश्यप (25 वर्ष), निवासी ग्राम सेंडल, मडवारानी, राख और कीचड़ के भारी दबाव में दब गए और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। यह केवल एक औद्योगिक दुर्घटना नहीं थी, यह उस लापरवाही की परिणति थी जिसके संकेत पिछले दो महीनों से लगातार सामने आ रहे थे।
आज छुट्टी लेकर घर जाने वाला था तुलेश्वर, कुछ ही दिनों में होने वाली थी शादी


इस घटना का सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि मृतक तुलेश्वर कश्यप मात्र 25 वर्ष का युवा था। परिवार के अनुसार आज का काम पूरा करने के बाद वह छुट्टी लेकर घर लौटने वाला था।
घर में इन दिनों खुशी का माहौल था, क्योंकि कुछ ही दिनों बाद उसका विवाह होने वाला था। परिवार वाले शादी की तैयारियों में जुटे हुए थे। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।
जिस घर में कुछ दिनों बाद शहनाई बजने वाली थी, वहां अब मातम पसरा हुआ है। परिवार के लोग इस सदमे से उबर नहीं पा रहे हैं।
गांव के लोगों का कहना है कि तुलेश्वर परिवार का सहारा था और उसकी मौत ने पूरे गांव को झकझोर दिया है।
राख में दब गया एक परिवार का भविष्य


हादसे के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। आसपास के गांवों से ग्रामीण घटनास्थल पर पहुंच गए। राख के विशाल ढेर और टूटे तटबंध के बीच धंसी हुई मशीन उस त्रासदी की गवाही दे रही थी।

सरपंच का आरोप: “बार-बार चेतावनी के बाद भी नहीं जागा प्रबंधन”
ग्राम के सरपंच लखन सिंह कंवर ने इस पूरे हादसे को सीधे तौर पर प्रबंधन की लापरवाही बताया है। उन्होंने कहा कि 20 फरवरी से लगातार राखड़ डैम फटने और कमजोर तटबंध की घटनाओं की जानकारी कई बार प्रबंधन को दी गई थी। ग्रामीणों की ओर से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और संभावित खतरे को रोकने की मांग भी उठाई गई थी।
सरपंच के अनुसार, “हमने कई बार प्रबंधन को लिखित और मौखिक रूप से बताया कि डैम की स्थिति ठीक नहीं है और कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। लेकिन हमारी बातों को गंभीरता से नहीं लिया गया। अगर समय रहते सुधारात्मक कदम उठाए गए होते, तो शायद आज एक युवा की जान नहीं जाती।”
उन्होंने तीखा सवाल उठाते हुए कहा कि “जब लगातार चेतावनी दी जा रही थी, तो प्रबंधन आखिर किस बात का इंतजार कर रहा था? क्या किसी बड़ी त्रासदी के बाद ही व्यवस्था जागती है?”
सरपंच का कहना है कि इस लापरवाही ने केवल एक मजदूर की जान नहीं ली, बल्कि यह दिखा दिया कि चेतावनियों और ग्रामीणों की आवाज को किस तरह नजरअंदाज किया गया।
ग्रामीणों का आरोप है कि अगर समय रहते डैम की मजबूती और सुरक्षा पर ध्यान दिया गया होता, तो आज यह हादसा नहीं होता और एक परिवार का भविष्य उजड़ने से बच सकता था।


काफी देर तक शव राख के मलबे में दबा रहा। प्रशासन और पुलिस की टीम ने ग्रामीणों की मदद से शव को बाहर निकाला।
जैसे ही मृतक के परिजन मौके पर पहुंचे, वहां का माहौल बेहद भावुक और तनावपूर्ण हो गया। ग्रामीणों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने शव को वहीं रखकर विरोध शुरू कर दिया और जिम्मेदारों पर कार्रवाई तथा उचित मुआवजे की मांग की।
लंबे विरोध और बातचीत के बाद अंततः प्रबंधन की ओर से 25 लाख रुपये मुआवजा देने की घोषणा की गई। इसके बाद ही शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा जा सका।
लेकिन सवाल यह है कि क्या एक युवा की जिंदगी की कीमत सिर्फ मुआवजे की राशि से तय की जा सकती है?
प्रशासन मौके पर, लेकिन जवाब अभी भी अधूरे


घटना की जानकारी मिलते ही प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। इस दौरान एसडीएम कटघोरा तन्मय खन्ना, तहसीलदार दर्री प्रियंका चंद्रा, नगर पुलिस अधीक्षक दर्री विमल पाठक, थाना प्रभारी दर्री आशीष सिंह अपने दल-बल के साथ घटनास्थल पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित किया।
एसडीएम तन्मय खन्ना का बयान


एसडीएम तन्मय खन्ना ने बताया कि प्रशासन को घटना की सूचना मिलते ही टीम मौके पर पहुंची और पूरे घटनाक्रम का निरीक्षण किया गया।
उन्होंने कहा“यह घटना गंभीर है। इससे पहले भी राखड़ डैम टूटने की घटनाएं सामने आई थीं और उनकी जांच चल रही है। इस मामले की भी विस्तृत तकनीकी जांच कराई जाएगी। संयंत्र प्रबंधन से रिपोर्ट मांगी जाएगी और उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।”
लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जब पहले तीन हादसे हो चुके थे तो क्या उस समय कोई ठोस कदम उठाया गया था?
नगर पुलिस अधीक्षक विमल पाठक का बयान


नगर पुलिस अधीक्षक विमल पाठक ने बताया कि पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की है।
उन्होंने कहा “मृतक के शव को पंचनामा के बाद पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पूरे मामले की जांच की जा रही है और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर विधिक कार्रवाई की जाएगी।”
प्रबंधन की सफाई और जिम्मेदारी का सवाल
घटना के बाद छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी लिमिटेड के अधिकारी भी घटनास्थल पहुंचे। इनमें रायपुर से आए देवेंद्र नाथ और हेमंत सिंह शामिल थे।
देवेंद्र नाथ ने कहा


“पहले भी राखड़ डैम टूटने की घटनाएं सामने आई थीं और उनकी जांच चल रही है। जांच के दौरान अधीक्षण अभियंता नेताम का स्थानांतरण रायपुर किया गया है, कार्यपालन अभियंता नारायण पटेल का भी ट्रांसफर किया गया है और राखड़ डैम की देखरेख करने वाले अभियंता तंवर को निलंबित किया गया है।”
मुख्य अभियंता हेमंत सिंह ने कहा


मुख्य अभियंता हेमंत सिंह ने कहा कि यह घटना बेहद ही गंभीर है और इसकी जांच कराई जाएगी पूर्व में राखड डैम के चौथी बार फटने की घटनाओं में उन्होंने कहा कि पूर्व में राखड डैम फटने की घटना की जांच कार्यवाही  चल रही है इसी बीच यह घटना घटित हो गई है इसकी भी जांच की जाएगी क्योंकि यहां पूर्व में राखड डैम फटने की वजह से  डैम की मजबूती के लिए कार्य चल रहा था इस बीच घटना घटी है और उन्होंने यह भी बताया जांच के दौरान कुछ अधिकारियों को ट्रांसफर और निलंबित किया गया है जिसमें विभागीय  कार्यपालन अभियंता एवं अभियंता को निलंबित किया गया है एवं अधीक्षण अभियंता का स्थानांतरण हो गया है “घटनाओं की तकनीकी जांच जारी है। जांच पूरी होने के बाद दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।”
हालांकि जब पत्रकारों ने पूछा कि जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाएगा या नहीं, तो अधिकारी स्पष्ट जवाब देने से बचते नजर आए।
दो महीनों में चार बार टूटा डैम
ग्रामीणों का कहना है कि झाबु स्थित यह राखड़ डैम पिछले दो महीनों में चार बार टूट चुका है। हर बार मरम्मत के दावे किए जाते हैं, लेकिन कुछ ही दिनों में तटबंध फिर ध्वस्त हो जाता है।
यदि किसी संरचना को बार-बार मरम्मत करनी पड़े और फिर भी वह ढह जाए, तो यह केवल तकनीकी त्रुटि नहीं बल्कि प्रबंधन की गंभीर विफलता का संकेत है।
हसदेव नदी तक पहुंची राख
तटबंध टूटने से लाखों क्यूबिक मीटर राखड़ युक्त पानी बहते हुए सीधे हसदेव नदी में जा मिला। कई स्थानों पर नदी का पानी सफेद दिखाई देने लगा। ग्रामीणों का कहना है कि इसका असर आने वाले समय में खेती, पेयजल और पर्यावरण पर पड़ सकता है।
हादसों की समयरेखा
02 फरवरी 2026
झाबु राखड़ डैम का तटबंध पहली बार टूटा।
20 फरवरी 2026
मरम्मत के बाद दूसरी बार डैम ध्वस्त हुआ।
02 मार्च 2026
तीसरी बार तटबंध टूट गया।
19 अप्रैल 2026
चौथी बार तटबंध टूटा और 25 वर्षीय जेसीबी ऑपरेटर तुलेश्वर कश्यप की मौत हो गई, सबसे बड़ा सवाल दो  महीने में चार हादसे, एक 25 वर्षीय युवक की मौत… शादी की तैयारियों के बीच उजड़ता एक परिवार… और हर बार वही जवाब  “जांच जारी है।”
क्या यह केवल हादसा है? या फिर यह उस व्यवस्था की विफलता है जहां जिम्मेदारी तय करने से पहले फाइलें बंद कर दी जाती हैं?
कोरबा की यह घटना केवल एक औद्योगिक दुर्घटना नहीं है। यह उस सच की परत खोलती है जिसमें विकास की कीमत अक्सर मजदूरों और ग्रामीणों को अपनी जिंदगी देकर चुकानी पड़ती है। जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक राखड़ डैम की दीवारें ही नहीं, व्यवस्था पर जनता का भरोसा भी टूटता रहेगा।

एक मौत, अनगिनत सवाल
जो JCB ऑपरेटर आज नहीं रहा, वह किसी का पति था, किसी का बेटा, किसी का पिता। उसका घर रोज की उम्मीद पर चलता था। वह सुबह निकला था – काम करने, जीवन चलाने। राख के उस सैलाब ने न सिर्फ एक इंसान को निगला, बल्कि एक पूरे परिवार के सपनों को भी दफन कर दिया।
सवाल यह है कि क्या उसकी यह कुर्बानी सिर्फ एक FIR और जाँच आदेश तक सिमट जाएगी? या फिर इस बार सच में कोई जवाबदेही तय होगी?
जनता की नजरें प्रशासन और सरकार पर टिकी हैं।

प्रदीप मिश्रा
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