पश्चिम एशिया संकट पर प्रधानमंत्री का राज्यसभा में बड़ा बयान: भारत सतर्क, हर चुनौती से निपटने की पूरी तैयारी
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नई दिल्ली
By ACGN 7647981711, 9303948009
भारत सतर्क, हर चुनौती से निपटने की पूरी तैयारी
ऊर्जा संकट, व्यापार मार्ग और भारतीयों की सुरक्षा पर चिंता—कूटनीति के जरिए शांति और आपूर्ति व्यवस्था बनाए रखने के प्रयास जारी
पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 मार्च 2026 को राज्यसभा में विस्तृत वक्तव्य देते हुए कहा कि इस संघर्ष ने पूरी दुनिया में गंभीर ऊर्जा संकट की स्थिति पैदा कर दी है और इसका असर भारत पर भी पड़ रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और देश के हितों की रक्षा के लिए हर स्तर पर रणनीति के साथ काम कर रही है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध को तीन सप्ताह से अधिक समय हो चुका है, जिसके कारण वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है। विशेष रूप से पेट्रोल, डीजल, गैस और उर्वरक जैसे आवश्यक संसाधनों की आपूर्ति पर असर पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि खाड़ी देशों में करीब एक करोड़ भारतीय काम करते हैं और उनकी सुरक्षा भारत सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग होर्मुज समुद्री मार्ग (Strait of Hormuz) में भी स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है, जहां कई जहाज फंसे हुए हैं और उनमें बड़ी संख्या में भारतीय क्रू सदस्य भी मौजूद हैं। ऐसे में भारत लगातार कूटनीतिक प्रयास कर रहा है ताकि अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग सुरक्षित और सुचारू रूप से संचालित हो सकें।
प्रधानमंत्री ने बताया कि युद्ध शुरू होने के बाद से उन्होंने पश्चिम एशिया के कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों से दो दौर की बातचीत की है और भारत लगातार ईरान, इजरायल और यूनाइटेड स्टेट सहित कई देशों के संपर्क में है। भारत का मुख्य उद्देश्य संवाद और कूटनीति के माध्यम से क्षेत्र में शांति बहाल करना है।
प्रधानमंत्री ने यह भी जानकारी दी कि संकट की स्थिति में विदेशों में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है। अब तक 3 लाख 75 हजार से अधिक भारतीय सुरक्षित अपने देश लौट चुके हैं, जबकि ईरान से 1000 से अधिक भारतीयों को सुरक्षित निकाला गया है, जिनमें बड़ी संख्या में मेडिकल छात्र भी शामिल हैं।
ऊर्जा सुरक्षा के संदर्भ में प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत ने पिछले वर्षों में अपनी ऊर्जा आपूर्ति को मजबूत और विविधतापूर्ण बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं। पहले भारत 27 देशों से ऊर्जा आयात करता था, जबकि अब यह संख्या बढ़कर 41 देशों तक पहुंच चुकी है। साथ ही देश में रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार की क्षमता को भी लगातार बढ़ाया गया है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि भारत किसी एक ही स्रोत पर निर्भर न रहे और आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़े। इसी उद्देश्य से देश में जहाज निर्माण, रक्षा उत्पादन, ऊर्जा संसाधनों और औद्योगिक उत्पादन को मजबूत किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि मौजूदा वैश्विक संकट से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने एक अंतर-मंत्रालयी समूह का गठन किया है, जो आयात-निर्यात, ऊर्जा आपूर्ति, गैस, उर्वरक और महंगाई से जुड़े मुद्दों पर लगातार समीक्षा कर रहा है। इसके साथ ही सात नए एम्पावर्ड ग्रुप भी बनाए गए हैं, जो त्वरित और दीर्घकालिक रणनीति के तहत काम करेंगे।
प्रधानमंत्री ने राज्यों से भी सहयोग की अपील करते हुए कहा कि संकट के समय गरीबों, श्रमिकों और प्रवासी कामगारों का विशेष ध्यान रखना जरूरी है। साथ ही आवश्यक वस्तुओं की जमाखोरी और कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी।
अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को आश्वस्त करते हुए कहा कि भारत हर चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि युद्ध के दुष्प्रभाव लंबे समय तक रह सकते हैं, लेकिन सरकार पूरी सतर्कता और गंभीरता के साथ रणनीति बनाकर काम कर रही है और देश की जनता का हित ही सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
प्रदीप मिश्रा
निष्पक्ष निर्भीक और सच्ची खबरों और जनहित के प्रति समर्पित पत्रकारिता के साथ देश में तेजी से बढ़ता विश्वसनीय वेब पोर्टल अंजोर छत्तीसगढ़ न्यूज़
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