जनता का पैसा, नेताओं का दिखावा: आखिर कब बदलेगी व्यवस्था
|
😊 कृपया इस न्यूज को शेयर करें😊
|
बलांगीर, ओडिशा
By ACGN 7647981711, 9303948009
ओड़िशा ब्यूरो स्वामी विजयानंद जी महाराज
सत्ता सेवा का माध्यम नहीं, प्रदर्शन का मंच बन गई; जनता अब जागरूक होकर सवाल कर रही है कि टैक्स की कमाई कहां जा रही है
बलांगीर। भारत एक लोकतांत्रिक देश है और सरकार की वास्तविक शक्ति जनता के हाथों में है। लेकिन आज का सवाल यह है कि जनता द्वारा टैक्स के रूप में दिया गया पैसा वास्तव में उनके कल्याण पर खर्च हो रहा है या सिर्फ राजनीतिक दिखावे और आत्म-प्रचार की भेंट चढ़ रहा है।
सहयोग फाउंडेशन, बलांगीर के अनिल मोदी ने स्थिति की समीक्षा करते हुए कहा कि मजदूर, कर्मचारी और व्यापारी इस उम्मीद में टैक्स देते हैं कि उन्हें बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं और बुनियादी सुविधाएं मिलेंगी। लेकिन वास्तविकता यह है कि यह मेहनत की कमाई अक्सर भव्य आयोजनों, विज्ञापनों, सरकारी कार्यालयों की रंग-रोगन या नेताओं के प्रदर्शन की सजावट में बर्बाद हो रही है।

मुख्य बिंदु जो अनिल मोदी ने उजागर किए:
योजनाओं में पारदर्शिता का अभाव: करोड़ों रुपये की योजनाएं कागजों पर बड़ी दिखती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर अधूरा निर्माण और भ्रष्टाचार आम होता जा रहा है।
रंग बदलने की राजनीति: सत्ता परिवर्तन के साथ सरकारी इमारतों का रंग बदलना और भव्य उद्घाटन, जनता के पैसे की खुली बर्बादी है।
एक राष्ट्र, एक पहचान की मांग: फिजूलखर्ची रोकने के लिए सभी सरकारी कार्यालयों का एक समान और स्थायी स्वरूप तय होना चाहिए।
जवाबदेही जरूरी: ‘सबका साथ, सबका विकास’ तभी सार्थक होगा जब हर सरकारी खर्च का हिसाब पारदर्शी हो और पैसा केवल प्रचार के लिए न बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे वास्तविक विकास कार्यों पर खर्च हो।

अनिल मोदी ने साफ कहा कि सत्ता सेवा का माध्यम है, प्रदर्शन का मंच नहीं। जनता अब जागरूक हो रही है और वह अपनी मेहनत की कमाई का सही हिसाब मांग रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार और राजनीतिक दल जनता की मेहनत को दिखावे में खर्च करना बंद नहीं करेंगे तो लोकतंत्र में विश्वास धीरे-धीरे कमजोर होगा।
प्रदीप मिश्रा
निष्पक्ष निर्भीक और सच्ची खबरों और जनहित के प्रति समर्पित पत्रकारिता के साथ देश में तेजी से बढ़ता विश्वसनीय वेब पोर्टल अंजोर छत्तीसगढ़ न्यूज़
|
Whatsapp बटन दबा कर इस न्यूज को शेयर जरूर करें |
Advertising Space






