धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 पारित, अवैध धर्मांतरण पर लगेगा सख्त अंकुश: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
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रायपुर, छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009
नए कानून से सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक पहचान को मिलेगा बल, धर्म परिवर्तन प्रक्रिया होगी पारदर्शी
रायपुर – ACGN: विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ विधानसभा द्वारा पारित धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 को राज्य की सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक संतुलन की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को हिंदू नववर्ष और चैत्र नवरात्रि की शुभकामनाएं देते हुए मां दुर्गा से प्रदेश की समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले कुछ समय से समाज के कमजोर वर्गों को प्रलोभन, दबाव या भ्रम में डालकर धर्मांतरण कराने की घटनाएं सामने आती रही हैं, जिससे समाज के ताने-बाने पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कहा कि नए विधेयक के लागू होने से ऐसी गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण लगेगा और समाज में संतुलन तथा विश्वास का वातावरण मजबूत होगा।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि अब धर्म परिवर्तन से जुड़ी हर प्रक्रिया को पूरी तरह विधिसम्मत और पारदर्शी बनाना अनिवार्य होगा। इसके तहत संबंधित पक्षों को पहले से ही अधिकृत अधिकारी को सूचना देना होगी। इसके बाद आवेदन की सार्वजनिक सूचना जारी की जाएगी और निर्धारित समयसीमा के भीतर उसकी जांच की जाएगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि धर्मांतरण किसी प्रकार के प्रलोभन, दबाव या अनुचित प्रभाव के बिना ही हो रहा है।
उन्होंने बताया कि पहले लागू कानून अपेक्षाकृत कम प्रभावी था, जिसके कारण अवैध गतिविधियों को रोकने में अपेक्षित सफलता नहीं मिल पाई थी। नए विधेयक में कठोर दंडात्मक प्रावधान जोड़े गए हैं, जिससे ऐसे मामलों में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई संभव हो सकेगी।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि अनियंत्रित धर्मांतरण से कई बार सामाजिक असंतुलन और अशांति की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। इस विधेयक के माध्यम से राज्य में शांति, सद्भाव और सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा को और अधिक मजबूत किया जाएगा।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने स्वर्गीय Dilip Singh Judeo को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उन्होंने धर्मांतरण के खिलाफ जनजागरण का जो अभियान चलाया था, वह आज भी समाज के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने कहा कि समाज की जागरूकता और सहभागिता से ही इस दिशा में स्थायी सकारात्मक बदलाव संभव है।
मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि यह विधेयक प्रदेश में पारदर्शिता, न्याय और सामाजिक एकता को और मजबूत करेगा तथा छत्तीसगढ़ को एक संतुलित और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध राज्य के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
प्रदीप मिश्रा
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