राज्यसभा चुनाव में दिलीप राय की दमदार जीत, बीजेडी–कांग्रेस की रणनीति रही फेल
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भुवनेश्वर, ओडिशा
By ACGN 7647981711, 9303948009
ओड़िशा ब्यूरो स्वामी विजयानंद जी महाराज
भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार ने दूसरे वरीयता मतों से पलटा मुकाबला, कई विधायकों ने पार्टी लाइन से हटकर किया समर्थन
भुवनेश्वर ACGN:- ओडिशा में हुए राज्यसभा चुनाव में भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार दिलीप राय ने दमदार बाजी मारते हुए अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी बीजेडी और कांग्रेस के संयुक्त उम्मीदवार डॉ. दत्तेश्वर होता को पराजित कर दिया। चुनाव के परिणाम ने राज्य की राजनीति में नया समीकरण खड़ा कर दिया और बीजेडी तथा कांग्रेस की रणनीति को बड़ा झटका लगा।

इस चुनाव में बीजेडी उम्मीदवार संतृप्त मिश्र, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मनमोहन सामल और सुजीत कुमार भी जीत हासिल करने में सफल रहे। मनमोहन सामल और सुजीत कुमार को 35–35 प्रथम वरीयता मत प्राप्त हुए, जबकि संतृप्त मिश्र को 31 प्रथम वरीयता मत मिले। वहीं दिलीप राय और डॉ. दत्तेश्वर होता दोनों को 23–23 प्रथम वरीयता मत मिले, लेकिन दूसरे वरीयता मतों की गणना में दिलीप राय ने बढ़त बनाते हुए जीत दर्ज कर ली।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि दिलीप राय को बीजेडी और कांग्रेस के कुछ विधायकों का भी समर्थन मिला। बीजेडी से निलंबित विधायक अरविंद महापात्र और सनातन महाकुड के साथ ही बांकी विधायक देवी रंजन त्रिपाठी, बस्ता विधायक सुबसिनी जेना, बालिगुड़ा विधायक चक्रमणि कहर, कटक–चौद्वार विधायक सौभिक बिस्वाल, जयदेव विधायक नब किशोर मल्लिक और त्रितोल विधायक रमाकांत भोई ने पार्टी सुप्रीमो के निर्देशों की अनदेखी करते हुए दिलीप राय के पक्ष में मतदान किया। इसी तरह कांग्रेस के विधायक दाशरथी गमांग, रमेश जेना और सोफिया फिरदौस ने भी उन्हें वोट दिया। बताया जा रहा है कि दिलीप राय को जीत के लिए जरूरी संख्या से चार वोट अधिक मिले।
जीत के बाद दिलीप राय ने भाजपा के सभी विधायकों, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मनमोहन सामल सहित उन सभी विधायकों का आभार जताया जिन्होंने उन्हें समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि अगर हॉर्स ट्रेडिंग होती तो कई धनवान लोग चुनाव जीत सकते थे, लेकिन उनकी जीत विश्वास, आंतरिक समर्थन और भावनात्मक जुड़ाव की वजह से हुई है।

गौरतलब है कि ओडिशा में चौथी राज्यसभा सीट को लेकर राजनीति काफी गरमाई हुई थी। दिलीप राय के निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरने के बाद चुनाव बेहद दिलचस्प हो गया था। इससे पहले बीजेडी और कांग्रेस ने मिलकर डॉ. दत्तेश्वर होता को संयुक्त उम्मीदवार घोषित किया था। इस सीट को लेकर भाजपा, बीजेडी और कांग्रेस के बीच प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गई थी। अंततः इस मुकाबले में भाजपा नेतृत्व की रणनीति सफल साबित हुई। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस परिणाम का असर आने वाले पंचायत और नगर निकाय चुनावों में भी देखने को मिल सकता है।
प्रदीप मिश्रा
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