नवरात्रि का पर्व देवी आराधना और नारी शक्ति का प्रतीक
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कोरबा, छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009
भागवताचार्य पंडित हिमांशु जोशी ने बताया नवरात्रि बुराई पर अच्छाई की विजय और हिंदू नववर्ष के शुभारंभ का पावन अवसर
कोरबा ACGN:- चैत्र नवरात्रि हिंदू धर्म का अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। यह पर्व मुख्य रूप से बुराई पर अच्छाई की विजय और देवी शक्ति की उपासना का प्रतीक है। इस दौरान श्रद्धालु पूरे भक्ति भाव से दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना करते हैं।
भागवताचार्य पंडित हिमांशु जोशी ने बताया कि चैत्र नवरात्रि केवल देवी आराधना का पर्व ही नहीं है, बल्कि यह हिंदू नववर्ष के प्रारंभ का भी प्रतीक है। हिंदू पंचांग के अनुसार नया वर्ष चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से प्रारंभ होता है। यह उत्सव नारी शक्ति और प्रकृति की उपासना का संदेश देता है, जो समाज में महिलाओं के महत्व और सम्मान को दर्शाता है।
उन्होंने बताया कि नवरात्रि का समय ध्यान, जप और आत्म निरीक्षण के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इन नौ दिनों में श्रद्धालु व्रत रखकर मां शक्ति की आराधना करते हैं और आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। सनातन परंपरा में यह पर्व आस्था, श्रद्धा और सांस्कृतिक मूल्यों का प्रतीक माना जाता है, जिसमें सभी हिंदू मिलकर मां की भक्ति में लीन रहते हैं।
नवरात्रि का पर्व नारी शक्ति के महत्व को भी उजागर करता है। यदि नारी लक्ष्मी के रूप में सुख और समृद्धि प्रदान करती है तो समय आने पर वह दुर्गा और काली के रूप में अधर्म का विनाश भी कर सकती है।
पंडित हिमांशु जोशी ने बताया कि इस वर्ष चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से 27 मार्च तक मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस बार माता डोली पर सवार होकर आ रही हैं, जिसे सामाजिक उथल-पुथल, प्राकृतिक परिवर्तन और रोगों में वृद्धि का संकेत माना जाता है। इसके बावजूद श्रद्धालु पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ माता की आराधना करेंगे।
प्रदीप मिश्रा
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