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बालको प्रबंधन के खिलाफ गरजा ‘खटिया खड़ी आंदोलन’, मजदूरों के अधिकारों की लड़ाई में उतरे अमित जोगी

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कोरबा छत्तीसगढ़

By ACGN 7647981711, 9303948009

स्थानीय युवाओं को रोजगार, वेतन वृद्धि बहाल करने और ईएसआईसी बनने तक मुफ्त इलाज की मांग; प्रबंधन ने मांगों पर विचार का दिया आश्वासन

कोरबा, बालको। औद्योगिक क्षेत्र भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (BALCO) में स्थानीय मजदूरों और युवाओं के साथ हो रहे कथित अन्याय के विरोध में शुक्रवार को बड़ा जनआंदोलन देखने को मिला। अमित जोगी के नेतृत्व में जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जोगी) द्वारा बालको पावर प्लांट के सामने ‘खटिया खड़ी आंदोलन’ आयोजित किया गया। इस आंदोलन में सैकड़ों की संख्या में कार्यकर्ता, स्थानीय मजदूर और क्षेत्रीय नागरिक शामिल हुए और बालको प्रबंधन की मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ जोरदार विरोध दर्ज कराया।


आंदोलन के दौरान अमित जोगी ने बालको प्रबंधन से चर्चा करते हुए कहा कि वर्ष 2004 में कंपनी द्वारा क्षेत्र के 90 प्रतिशत स्थानीय लोगों को रोजगार देने का वादा किया गया था, लेकिन आज भी यह वादा धरातल पर नजर नहीं आता। उन्होंने कहा कि स्थानीय युवाओं को रोजगार देने के बजाय बाहरी लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे क्षेत्र के युवाओं में भारी नाराजगी है। उन्होंने मांग की कि स्थानीय बेरोजगारों को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार दिया जाए।


उन्होंने मजदूरों से जुड़े वेतन के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया। जोगी ने कहा कि पहले अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के कर्मचारियों को 12 प्रतिशत वेतन वृद्धि दी जाती थी, जिसे घटाकर अब 8 प्रतिशत कर दिया गया है। इसे मजदूरों के अधिकारों के साथ अन्याय बताते हुए उन्होंने वेतन वृद्धि को पुनः 12 प्रतिशत करने की मांग की।
आंदोलन के दौरान जोगी कांग्रेस के पदाधिकारियों और मजदूरों ने बालको प्रबंधन पर कई गंभीर आरोप भी लगाए। उन्होंने बताया कि आईटीआई कर चुके और अप्रेंटिस के रूप में कार्य करने वाले कई स्थानीय युवा पिछले 15 से 20 वर्षों से मजदूर के रूप में काम कर रहे हैं, लेकिन उन्हें आज तक नियमित नहीं किया गया है। इसके विपरीत बाहरी लोगों को नियमित नौकरी देकर स्थानीय युवाओं की उपेक्षा की जा रही है।पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि मजदूरों के साथ कार्यस्थल पर कठोर व्यवहार किया जाता है। यदि कोई मजदूर लगातार काम करने के बाद कुछ मिनट आराम कर ले या थोड़ी देर आंख बंद कर ले, तो उसकी तस्वीर खींचकर उसे तीन दिनों के लिए निलंबित कर दिया जाता है। इसी तरह संयंत्र के अंदर मार्गों पर लगाए गए स्पीड मीटर को भी मजदूरों के खिलाफ कार्रवाई का आधार बनाया जा रहा है। कई स्थानों पर ढलान होने के कारण बिना एक्सीलेटर दिए वाहन की गति बढ़ जाती है और इसी आधार पर वाहन चला रहे मजदूर को तीन दिन के लिए निलंबित कर दिया जाता है।
आंदोलन के दौरान एक पदाधिकारी ने यह भी आरोप लगाया कि वह स्वयं बालको संयंत्र में मजदूर के रूप में कार्यरत हैं और आंदोलन में शामिल होने के कारण पिछले तीन दिनों से उनके घर की बिजली और पानी की सुविधा बंद कर दी गई है। उन्होंने इसे मजदूरों की आवाज दबाने का प्रयास बताया।

पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि मजदूरों के साथ कार्यस्थल पर कठोर व्यवहार किया जाता है। यदि कोई मजदूर लगातार काम करने के बाद कुछ मिनट आराम कर ले या थोड़ी देर आंख बंद कर ले, तो उसकी तस्वीर खींचकर उसे तीन दिनों के लिए निलंबित कर दिया जाता है। इसी तरह संयंत्र के अंदर मार्गों पर लगाए गए स्पीड मीटर को भी मजदूरों के खिलाफ कार्रवाई का आधार बनाया जा रहा है। कई स्थानों पर ढलान होने के कारण बिना एक्सीलेटर दिए वाहन की गति बढ़ जाती है और इसी आधार पर वाहन चला रहे मजदूर को तीन दिन के लिए निलंबित कर दिया जाता है।
आंदोलन के दौरान एक पदाधिकारी ने यह भी आरोप लगाया कि वह स्वयं बालको संयंत्र में मजदूर के रूप में कार्यरत हैं और आंदोलन में शामिल होने के कारण पिछले तीन दिनों से उनके घर की बिजली और पानी की सुविधा बंद कर दी गई है। उन्होंने इसे मजदूरों की आवाज दबाने का प्रयास बताया।

अमित जोगी ने एक महत्वपूर्ण मांग रखते हुए कहा कि संयंत्र में काम करने वाले कई मजदूरों का अभी तक कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) में पंजीयन नहीं हो पाया है। ऐसे मजदूरों और उनके परिवारों को चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पाती। उन्होंने मांग की कि जब तक इन मजदूरों का ईएसआईसी पंजीयन नहीं हो जाता, तब तक कम से कम बालको प्रबंधन अपने अस्पताल में उन मजदूरों और उनके परिवारजनों को मुफ्त इलाज की सुविधा उपलब्ध कराए।


आंदोलन के दौरान कार्यकर्ताओं ने स्थानीय रोजगार, मजदूरों की सुरक्षा और सम्मानजनक कार्य वातावरण की मांग को लेकर जोरदार नारेबाजी की। हालांकि इस दौरान पुलिस प्रशासन और जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जोगी) के पदाधिकारियों के बीच कुछ समय के लिए हल्की बहस और नोकझोंक की स्थिति भी देखने को मिली, जिसे बाद में समझाइश के बाद शांत करा लिया गया। अमित जोगी ने कहा कि जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ हमेशा मजदूरों और स्थानीय लोगों के अधिकारों की लड़ाई लड़ती रही है और आगे भी यह संघर्ष जारी रहेगा।


इस आंदोलन के बाद बालको प्रबंधन ने प्रतिनिधियों से चर्चा करते हुए मजदूरों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने और उन्हें शीघ्र पूरा करने का आश्वासन दिया है। आंदोलन में शामिल मजदूरों और कार्यकर्ताओं ने इसे अपनी एक महत्वपूर्ण सफलता बताते हुए कहा कि यदि मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो भविष्य में आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।

खटिया खड़ी आंदोलन के बीच अनदेखा रहा शांति नगर का धरना, मजदूरों से क्यों नहीं मिले  अमित जोगी?

कोरबा में हुए “खटिया खड़ी आंदोलन” के दौरान एक महत्वपूर्ण सवाल भी सामने आया है। जिस क्षेत्र के आसपास यह आंदोलन आयोजित किया गया, उसी के समीप शांति नगर में धूल प्रदूषण और स्थानीय रोजगार की मांग को लेकर मजदूर लगभग 26–27 दिनों से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हुए हैं।
हैरानी की बात यह है कि इतने लंबे समय से चल रहे इस आंदोलन के बावजूद आंदोलन का नेतृत्व कर रहे  अमित जोगी ने धरना स्थल पर जाकर मजदूरों से मुलाकात तक नहीं की और न ही उनकी समस्याओं पर कोई चर्चा की। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब मजदूर इतने दिनों से संघर्ष कर रहे थे, तो उनकी सुध लेने की जरूरत क्यों नहीं समझी गई?
स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा भी तेज है कि क्या यह आंदोलन केवल राजनीतिक उपस्थिति दर्ज कराने तक ही सीमित रह गया। वहीं  जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे ) के कुछ स्थानीय नेताओं पर भी सवाल उठ रहे हैं कि जब मजदूर इतने दिनों से धरने पर बैठे थे, तब उन्होंने पहले ही इस मुद्दे को गंभीरता से क्यों नहीं उठाया।
अब सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि क्या ऐसे आंदोलनों से वास्तव में स्थानीय समस्याओं का समाधान होगा, या फिर मजदूरों की आवाज केवल राजनीति की भीड़ में दबकर रह जाएगी।

प्रदीप मिश्रा
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