एचटीटीपी स्याहीमुड़ी सड़क विवाद : सुरक्षा के नाम पर बंद रास्ता, संवाद से खुला, जय सिंह अग्रवाल की भूमिका निर्णायक
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कोरबा छत्तीसगढ़
By ACGN 7647 9817119303 948009
वार्ड क्रमांक 51 स्याहीमुड़ी में आवागमन, महिला सुरक्षा और कॉलोनी सुरक्षा को लेकर उठा विवाद, राजनीतिक हस्तक्षेप से समाधान ,तीन दिन तक ठहरा समाधान, चौथे दिन संवाद से खुला रास्ता


कोरबा | छत्तीसगढ़
कोरबा नगर पालिक निगम के वार्ड क्रमांक 51 स्याहीमुड़ी में स्थित एचटीटीपी कॉलोनी से स्याहीमुड़ी को जोड़ने वाला का प्रवेश मार्ग अचानक बंद होना महज एक प्रशासनिक निर्णय नहीं रहा, बल्कि यह धीरे–धीरे एक ऐसे टकराव में बदल गया, जहां ग्रामीणों के आवागमन का अधिकार, महिलाओं की सुरक्षा और कॉलोनी में रहने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों के परिवारों की सुरक्षा और संरक्षा आमने–सामने खड़ी नजर आने लगी।
एचटीटीपी प्रबंधन द्वारा सुरक्षा का हवाला देते हुए स्याहीमुड़ी–रामनगर को जोड़ने वाले मार्ग को मलवा डालकर पूरी तरह बंद किए जाने के बाद क्षेत्र में असंतोष फैल गया। ग्रामीणों ने सबसे पहले इस समस्या को स्थानीय स्तर पर सुलझाने का प्रयास किया। वार्ड क्रमांक 51 के ग्रामीणों और महिलाओं ने लगातार तीन से चार दिनों तक स्थानीय पार्षद से चर्चा की, अपनी समस्याएं साझा कीं और मार्ग खुलवाने की मांग रखी। पार्षद द्वारा प्रबंधन से बातचीत भी की गई, लेकिन इन प्रयासों के बावजूद कोई ठोस समाधान सामने नहीं आ सका। मार्ग बंद रहा और आमजन की परेशानियां दिन–ब–दिन बढ़ती चली गईं।

स्थानीय स्तर पर समाधान न निकल पाने के बाद ग्रामीणों को यह महसूस हुआ कि मामला केवल एक वार्ड या एक सड़क तक सीमित नहीं रह गया है। महिलाओं, बुजुर्गों और अभिभावकों में असुरक्षा और आक्रोश गहराने लगा। अंततः ग्रामीणों ने मजबूर होकर पूर्व राजस्व मंत्री जय सिंह अग्रवाल से हस्तक्षेप की गुहार लगाई।

जय सिंह अग्रवाल के रामनगर पहुंचते ही स्थिति ने नया मोड़ लिया। उन्होंने ग्रामीणों की बातें सुनीं और विशेष रूप से महिलाओं से सीधे संवाद कर उनकी आशंकाओं को समझा। महिलाओं ने बताया कि मार्ग बंद होने के बाद उन्हें अंधेरे और सुनसान वैकल्पिक रास्तों से गुजरना पड़ रहा है, जहां अकेले निकलने में भय बना रहता है। बच्चों का स्कूल, ट्यूशन और बाजार आना–जाना भी जोखिम भरा हो गया है।

दूसरी ओर एचटीटीपी प्रबंधन की चिंताएं भी उतनी ही गंभीर थीं। कॉलोनी परिसर से सटी सीएसईबी की शासकीय भूमि पर पिछले कुछ समय में अवैध रूप से दुकानों का निर्माण कर लिया गया था। इन्हीं दुकानों के कारण वहां बाहरी लोगों की आवाजाही बढ़ी, असामाजिक तत्वों का जमावड़ा शुरू हुआ और स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई। जब प्रबंधन या सुरक्षा कर्मियों द्वारा दुकानदारों और वहां मौजूद लोगों को मना किया जाता, तो विवाद की स्थिति खड़ी कर दी जाती थी। कुछ स्थानीय लोग दुकानदारों के साथ मिलकर जानबूझकर टकराव की स्थिति निर्मित करते थे।

प्रबंधन के अनुसार, इन अवैध दुकानों के खुलने के बाद से कॉलोनी परिसर में चोरी की घटनाएं, गाली–गलौज, शराब के नशे में हुड़दंग कॉलोनी परिसर में तेज रफ्तार से वाहन चलना और कालोनी परिसर में महिलाओं से अभद्रता की शिकायतें लगातार सामने आ रही थीं। इस संबंध में पूर्व में तहसील कार्यालय, नगर पालिका निगम और अन्य संबंधित विभागों को भी शिकायतें दी गईं, लेकिन किसी प्रकार की प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी। कॉलोनी में रहने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के परिवार, विशेषकर महिलाएं और बच्चे, लगातार मानसिक तनाव में जीने को मजबूर थे। हाल ही में कॉलोनी परिसर में एक महिला के साथ हुई छेड़छाड़ की घटना ने सुरक्षा को लेकर आशंकाओं को और गहरा कर दिया, जिसके बाद प्रबंधन पर सख्त कदम उठाने का दबाव बन गया और मार्ग बंद करने जैसा कठोर निर्णय लिया गया।

ग्रामीणों की बातें सुनकर स्थिति की गंभीरता को समझते हुए जय सिंह अग्रवाल ने तत्काल एचटीटीपी प्रबंधन के मुख्य अभियंता हेमंत सिंह और अतिरिक्त मुख्य अभियंता राजेश पांडे से संपर्क किया और दोनों पक्षों को आमने–सामने बैठाकर समाधान निकालने का प्रस्ताव रखा। इरेक्ट हॉस्टल में हुई बैठक में राजनीतिक प्रतिनिधियों, स्थानीय नेताओं और क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों की मौजूदगी ने संवाद को मजबूती दी।

बैठक के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि यह विवाद किसी एक पक्ष की जिद नहीं, बल्कि लंबे समय से चली आ रही प्रशासनिक उपेक्षा, अवैध अतिक्रमण और संवादहीनता का परिणाम था। प्रारंभ में प्रबंधन द्वारा केवल तीन फीट चौड़ा मार्ग खोलने का प्रस्ताव रखा गया, जिसे ग्रामीणों ने व्यावहारिक न मानते हुए अस्वीकार कर दिया। अंततः जय सिंह अग्रवाल के संतुलित और मध्यस्थतापूर्ण हस्तक्षेप के बाद चारपहिया वाहनों के आवागमन योग्य छह फीट चौड़ा मार्ग खोलने पर सहमति बनी।

इस दौरान स्याहीमुड़ी ग्रामीणों और एचटीटीपी प्रबंधन के बीच आयोजित संवाद में पूर्व राजस्व मंत्री जय सिंह अग्रवाल की भूमिका केंद्र में रही। संवाद बैठक में नगर पालिका निगम के नेता प्रतिपक्ष कृपाराम साहू, कांग्रेस जिला अध्यक्ष मुकेश राठौर, स्याहीमुड़ी की पूर्व पार्षद अगहन बाई कंवर, कांग्रेस दर्री–पाली ब्लॉक अध्यक्ष राजेंद्र तिवारी, पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष सुधीर जैन, प्रदेश कांग्रेस सचिव विकास सिंह, ब्लाक अध्यक्ष पालूराम साहू, युवा जिलाध्यक्ष राकेश पंकज, पार्षद सुखसागर निर्मलकर, रवि चंदेल, पूर्व पार्षद मस्तुल सिंह कंवर, रोपा तिर्की, जिला उपाध्यक्ष राजेन्द्र सिंह ठाकुर, वरिष्ठ कांग्रेस नेत्री रेखा त्रिपाठी, आशीष अग्रवाल, सुरेन्द्र यादव, देवीदयाल तिवारी, संगीता श्रीवास, डॉ.डी आर नेताम, शशि साहु, जाकिर खान, सत्येन्द्र सिंह ठाकुर, विवेक श्रीवास, सफर अली, वर्धन मारिया, सर्यकांत महंत, मनीष अग्रवाल, राहुल अग्रवाल, डोरी लाल राठौर, संतराम, सीमा कुर्रे, सुरेश राठौर, प्रदीप भारिया, गाडिरया जी, ईरशाद अली, ज्योति याहु, मनोज यादव, गौतम साहु, जोध सिंह, तिरीथ राम सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं, गणमान्य नागरिक और वरिष्ठ जन उपस्थित रहे।
यह मामला एक बार फिर यह साबित करता है कि जब स्थानीय समस्याओं को समय रहते गंभीरता से नहीं लिया जाता, तो वे सुरक्षा, राजनीति और सामाजिक तनाव का रूप ले लेती हैं। एचटीटीपी कॉलोनी मार्ग का विवाद प्रशासन के लिए भी एक स्पष्ट संदेश है कि सुरक्षा और जनसुविधा के बीच संतुलन संवाद से ही संभव है। फिलहाल मार्ग खुलना राहत जरूर है, लेकिन जब तक अवैध दुकानों, असामाजिक गतिविधियों और महिला सुरक्षा पर स्थायी कार्रवाई नहीं होती, तब तक इस समाधान को पूर्ण नहीं माना जा सकता।
यह विवाद सत्ता और विपक्ष दोनों के लिए एक राजनीतिक परीक्षा भी बनकर सामने आया। सत्ता पक्ष के लिए यह सवाल खड़ा हुआ कि नगर निगम और प्रशासन ने समय रहते अवैध अतिक्रमण पर कार्रवाई क्यों नहीं की, जबकि विपक्ष के लिए यह मौका था कि वह जनभावनाओं के साथ खड़ा होकर दबाव बनाए। अंततः समाधान राजनीतिक टकराव से नहीं, बल्कि संवाद और मध्यस्थता से निकला जो यह दर्शाता है कि जमीनी मुद्दों पर टकराव नहीं, समन्वय ही टिकाऊ रास्ता है।
नगर निगम की भूमिका : चुप्पी से टकराव तक
इस पूरे विवाद में नगर निगम की निष्क्रियता सबसे बड़ा सवाल बनकर उभरी। सीएसईबी की जमीन पर अवैध दुकानों का निर्माण होना और लंबे समय तक उस पर कार्रवाई न होना प्रशासनिक लापरवाही का उदाहरण है। यदि समय रहते अतिक्रमण हटाया जाता, तो न तो सुरक्षा संकट पैदा होता और न ही मार्ग बंद करने जैसी नौबत आती।
एचटीटीपी कॉलोनी विवाद ने एक बार फिर यह उजागर किया कि शहरी अव्यवस्था का सबसे बड़ा खामियाजा महिलाएं भुगतती हैं। एक ओर ग्रामीण महिलाओं को वैकल्पिक, असुरक्षित रास्तों से गुजरने की मजबूरी, तो दूसरी ओर कॉलोनी में रहने वाली महिलाओं के लिए असामाजिक तत्वों का डर—दोनों स्थितियां यह बताती हैं कि महिला सुरक्षा केवल नारे नहीं, बल्कि ठोस प्रशासनिक कार्रवाई की मांग करती है।
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