बारिश ने खोली कोरबा की व्यवस्था की पोल: घरों में घुसा पानी, उफनते नाले में बह गई स्कॉर्पियो
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कोरबा, छत्तीसगढ़
By ACGN 7647 981711, 9303948009
कोरबा ACGN:- कोरबा में तेज बारिश ने एक बार फिर शहर की जलनिकासी व्यवस्था की जमीनी हकीकत सामने ला दी। भारी बारिश के बाद शहर के कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई और कई घरों में पानी घुस गया। रवि शंकर नगर में भी बारिश का पानी घरों तक पहुंच गया, जबकि सड़कों पर तेज बहाव के साथ पानी बहता नजर आया। दूसरी ओर शहर का दादर नाला उफान पर आ गया और नाला पार करने की कोशिश कर रही एक स्कॉर्पियो पानी के तेज बहाव में बह गई। गनीमत रही कि वाहन में सवार तीन युवकों को मौके पर मौजूद लोगों ने सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
उफनते दादर नाले को पार करने की कोशिश, तेज बहाव में बह गई स्कॉर्पियो

भारी बारिश के बाद दादर नाले में पानी का बहाव बेहद तेज हो गया था। ऐसी स्थिति में नाला पार करना जान जोखिम में डालने के बराबर था। बताया जा रहा है कि मौके पर मौजूद लोगों ने स्कॉर्पियो सवार युवकों को नाला पार करने से मना भी किया था, लेकिन इसके बावजूद वाहन लेकर नाला पार करने का प्रयास किया गया।
नाला पार करते समय स्कॉर्पियो तेज बहाव की चपेट में आ गई।

देखते ही देखते वाहन पानी के साथ बहने लगा। घटना का लाइव वीडियो भी सामने आया है, जिसमें स्कॉर्पियो को तेज बहाव के बीच बहते हुए देखा जा सकता है। घटना के बाद नाले के दोनों तरफ बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए और मौके पर हड़कंप मच गया।

बताया जा रहा है कि करीब आधे घंटे तक स्कॉर्पियो पानी के बहाव में तैरती और बहती रही। इस दौरान वाहन में सवार तीन युवक गाड़ी के ऊपर मौजूद रहे। मौके पर मौजूद लोगों ने तत्परता दिखाते हुए तीनों युवकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। समय रहते बचाव होने से एक बड़ा हादसा टल गया।
रवि शंकर नगर में घरों में घुसा पानी, सड़क पर तेज बहाव

भारी बारिश का असर रवि शंकर नगर में भी देखने को मिला। बारिश का पानी कई घरों में घुस गया, जिससे रहवासियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। वहीं सड़कों पर पानी तेज बहाव के साथ बहता रहा। कई जगह सड़कें पानी से लबालब नजर आईं और लोगों को आवाजाही में परेशानी हुई।

घरों में पानी घुसने से लोगों की चिंता बढ़ गई। बारिश के दौरान सड़कों पर तेज बहते पानी ने शहर की जलनिकासी व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कनकी-सर्वमंगला रोड पर SECL डंपिंग का मलबा, बस भी फंसी

उधर भारी बारिश के कारण कनकी-सर्वमंगला मार्ग पर भी हालात बिगड़ गए। बताया गया कि SECL की डंपिंग से मलबा सड़क की ओर बह आया, जिसके कारण मार्ग पर पानी और मलबा जमा हो गया। स्थिति इतनी खराब हो गई कि एक कार बेसमेंट तक पानी में डूबने की स्थिति में पहुंच गई।

इसी मार्ग पर करीब 40 से 50 यात्रियों को लेकर जा रही एक बस भी फंस गई। बस के फंसने के बाद सड़क पर वाहनों की लंबी कतार लग गई और करीब तीन घंटे तक यातायात प्रभावित रहा। बारिश, पानी और मलबे के कारण यात्रियों और राहगीरों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।

नालों और नालियों के ऊपर अतिक्रमण की शिकायतें, कार्रवाई सिर्फ नोटिस तक?
कोरबा में जलभराव की समस्या के बीच शहर के नालों और नालियों के ऊपर तथा उनके आसपास बढ़ रहे अतिक्रमण को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों द्वारा समय-समय पर नगर पालिका निगम में नालों और नालियों के ऊपर किए जा रहे अतिक्रमण तथा जलनिकासी के रास्ते बाधित होने की शिकायतें किए जाने की बात सामने आती रही है।
सवाल यह है कि शिकायत मिलने के बाद उसका वास्तविक निराकरण किस तरह किया जाता है? स्थानीय स्तर पर यह आरोप सामने आते रहे हैं कि अतिक्रमण संबंधी शिकायतों पर कार्रवाई कई बार केवल नोटिस जारी करने तक सीमित रह जाती है। नोटिस जारी होने के बाद यदि मौके से अतिक्रमण नहीं हटता और जलनिकासी का रास्ता पहले की तरह बाधित रहता है, तो फिर शिकायत का वास्तविक निराकरण कैसे माना जाए?
नालों और नालियों के ऊपर अतिक्रमण होने से उनके प्राकृतिक बहाव की क्षमता प्रभावित हो सकती है। कई स्थानों पर नालों और नालियों के ऊपर या उनके किनारे निर्माण अथवा अन्य प्रकार के अवरोध होने की स्थिति में बारिश का पानी तेजी से आगे नहीं बढ़ पाता। ऐसे में तेज बारिश के दौरान नालियां ओवरफ्लो होने और पानी सड़कों तथा रिहायशी क्षेत्रों में फैलने का खतरा बढ़ जाता है।
सिर्फ नोटिस नहीं, जमीन पर कार्रवाई की जरूरत
नगर निगम के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती केवल बारिश के बाद जलभराव से निपटना नहीं, बल्कि जलभराव के संभावित कारणों को स्थायी रूप से दूर करना भी है। यदि नालों और नालियों के ऊपर अतिक्रमण की शिकायतें मिल रही हैं तो संबंधित स्थानों का स्थल निरीक्षण कर यह जांच करना जरूरी है कि कहीं अतिक्रमण के कारण जलनिकासी का मार्ग तो प्रभावित नहीं हो रहा।
शिकायतकर्ता को केवल नोटिस जारी कर मामले को समाप्त करने के बजाय यदि अतिक्रमण नियम विरुद्ध पाया जाता है तो नियमानुसार उसे हटाने की कार्रवाई भी होनी चाहिए। क्योंकि कागजों में शिकायत का निराकरण और जमीन पर समस्या का समाधान दोनों अलग-अलग बातें हैं।
आज स्थिति यह है कि बारिश के दौरान रवि शंकर नगर जैसे इलाकों में घरों में पानी घुस रहा है, सड़कों पर तेज बहाव के साथ पानी चल रहा है और दादर नाले में वाहन बहने जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं। ऐसे में नालों और नालियों की वास्तविक स्थिति की जांच और उनके बहाव क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त रखना बेहद जरूरी हो जाता है।
बारिश हर साल होगी, पानी के रास्ते खुले रहेंगे या नहीं?
भारी बारिश प्राकृतिक स्थिति है, लेकिन बारिश के पानी की निकासी के लिए नालों और नालियों का सुचारु रहना भी उतना ही जरूरी है। यदि पानी के प्राकृतिक रास्तों पर अतिक्रमण बढ़ता रहा और शिकायतों का निराकरण केवल नोटिस तक सीमित रहा तो आने वाले समय में जलभराव की समस्या और गंभीर हो सकती है।
दादर नाले में स्कॉर्पियो का बहना लोगों के लिए एक बड़ी चेतावनी है। वहीं रवि शंकर नगर में घरों में पानी घुसना और सड़कों पर तेज बहाव के साथ पानी चलना यह बताता है कि जलनिकासी व्यवस्था को लेकर जमीनी स्तर पर गंभीरता से काम करने की जरूरत है।
अब सवाल नगर निगम से है, क्या नालों और नालियों के ऊपर हो रहे अतिक्रमण की शिकायतों का वास्तविक निराकरण होगा? क्या केवल नोटिस जारी करने के बजाय जरूरत पड़ने पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाएगी? और क्या बारिश से पहले शहर के जलनिकासी मार्गों का व्यापक सर्वे कर उन्हें बाधामुक्त किया जाएगा?
क्योंकि बारिश हर साल आएगी, लेकिन यदि पानी के रास्ते ही अतिक्रमण और अवरोध से बंद होते रहे तो हर बार जलभराव, सड़क जाम और हादसों का खतरा बढ़ता रहेगा। अब जरूरत कागजों में शिकायत निपटाने की नहीं, बल्कि जमीन पर समस्या का स्थायी समाधान करने की है।

प्रदीप मिश्रा
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