श्रमिकों के सशक्तिकरण का नया दौर, सुरक्षा से सम्मान तक बढ़े कदम
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रायपुर, छत्तीसगढ़
By ACGN – 7647981711, 9303948009
56.83 लाख श्रमिक पंजीकृत, शिक्षा-स्वास्थ्य से आवास और सामाजिक सुरक्षा तक योजनाओं का विस्तार
रायपुर। किसी भी राज्य की विकास यात्रा में श्रमिकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। श्रमिकों की मेहनत को सम्मान, सुरक्षित कार्यस्थल, सामाजिक सुरक्षा और बेहतर जीवन की सुविधाएं मिले, इसी उद्देश्य से छत्तीसगढ़ सरकार का श्रम विभाग विभिन्न योजनाओं और पहलों के माध्यम से श्रमिक कल्याण को नई गति देने का दावा कर रहा है। श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन के निर्देशन में बीते ढाई वर्षों में प्रशासनिक व्यवस्था के विस्तार से लेकर शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, कौशल विकास और डिजिटल सेवाओं तक कई पहलें की गई हैं।
33 श्रम कार्यालयों से सेवाओं की पहुंच बढ़ी
श्रम कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन और श्रमिकों की समस्याओं के त्वरित निराकरण के लिए पांच नए जिलों में श्रम पदाधिकारी कार्यालय स्थापित किए गए हैं। पांच श्रम पदाधिकारी कार्यालयों को सहायक श्रमायुक्त कार्यालय के रूप में उन्नत किया गया है। अब प्रदेश में 10 सहायक श्रमायुक्त कार्यालय और 23 श्रम पदाधिकारी कार्यालय, यानी कुल 33 श्रम कार्यालय संचालित हैं।
56 लाख से अधिक श्रमिक सामाजिक सुरक्षा के दायरे में
छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मंडल, भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल तथा असंगठित कर्मकार राज्य सामाजिक सुरक्षा मंडल के माध्यम से अब तक करीब 56.83 लाख श्रमिकों का पंजीयन किया जा चुका है। वर्ष 2026 में 30 जून तक विभिन्न योजनाओं के माध्यम से लगभग 3.48 लाख श्रमिकों को बीमा, चिकित्सा, स्वास्थ्य, शिक्षा और कौशल उन्नयन जैसी सुविधाओं का लाभ दिया गया है। इन योजनाओं पर करीब 173.32 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।
आवास से लेकर ई-रिक्शा तक बढ़ी सहायता
मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक आवास सहायता योजना के तहत आवास निर्माण या घर खरीदने के लिए सहायता राशि एक लाख से बढ़ाकर डेढ़ लाख रुपये कर दी गई है। वहीं दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना के तहत पात्र महिला निर्माण श्रमिकों को ई-रिक्शा खरीदने के लिए सहायता राशि भी डेढ़ लाख रुपये तक की गई है।
श्रमिकों के बच्चों की पढ़ाई पर विशेष जोर
श्रमिक परिवारों के बच्चों की शिक्षा को भी योजनाओं से जोड़ा गया है। अटल कैरियर निर्माण योजना के तहत पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के बच्चों को इंजीनियरिंग और चिकित्सा जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए निःशुल्क कोचिंग उपलब्ध कराने की पहल की गई है।
अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के तहत पात्र निर्माण श्रमिकों के प्रथम दो बच्चों को कक्षा छठवीं से बारहवीं तक उत्कृष्ट निजी आवासीय विद्यालयों में निःशुल्क शिक्षा दी जा रही है। वर्ष 2026-27 से लाभान्वित बच्चों की संख्या 100 से बढ़ाकर 200 कर दी गई है।
पांच रुपये में पौष्टिक भोजन
शहीद वीर नारायण सिंह श्रम अन्न योजना श्रमिकों के लिए राहत का माध्यम बनी है। इसके तहत पंजीकृत निर्माण, संगठित और असंगठित श्रमिकों को मात्र पांच रुपये में गरम और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। प्रदेश के 18 जिलों में 39 भोजन केंद्र संचालित हैं।
डिजिटल सेवाओं से पारदर्शिता पर जोर
श्रम विभाग का ‘ई-श्रम साथी’ मोबाइल एप श्रमिकों और नियोजकों को पंजीयन, संपर्क तथा रोजगार संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने के लिए डिजिटल माध्यम के रूप में विकसित किया गया है। वहीं मॉडल लेबर चौक सुविधा केंद्रों के माध्यम से श्रमिकों को पंजीयन, योजनाओं के आवेदन, भोजन, पेयजल और विश्राम जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है।
मृत्यु और दिव्यांगता पर आर्थिक सहायता
मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक मृत्यु एवं दिव्यांग सहायता योजना के तहत सामान्य मृत्यु पर आश्रितों को एक लाख रुपये, कार्यस्थल दुर्घटना में मृत्यु पर पांच लाख रुपये तथा स्थायी दिव्यांगता पर ढाई लाख रुपये की सहायता का प्रावधान है। अपंजीकृत निर्माण श्रमिकों की कार्यस्थल दुर्घटना में मृत्यु पर भी आश्रितों को एक लाख रुपये की सहायता दी जा रही है।
असंगठित कर्मकार राज्य सामाजिक सुरक्षा मंडल के अंतर्गत पंजीकृत श्रमिक की मृत्यु पर आश्रितों को एक लाख रुपये और दिव्यांगता की स्थिति में 50 हजार रुपये की सहायता का प्रावधान है।
सुरक्षित कार्यस्थल और बेहतर श्रम व्यवस्था पर जोर
कारखानों में श्रमिकों को कार्य के अनुरूप सुरक्षा प्रशिक्षण दिया जा रहा है। वहीं श्रम कानूनों में समयानुकूल बदलाव कर सेवाओं को सरल और पारदर्शी बनाने का प्रयास किया गया है। दुकान एवं स्थापना नियमों में बदलाव के बाद श्रम पहचान पंजीयन प्रमाण-पत्र 24 घंटे के भीतर जारी करने का प्रावधान किया गया है।
कुल मिलाकर, श्रम विभाग की इन पहलों का उद्देश्य श्रमिकों को केवल योजनाओं का लाभार्थी बनाना नहीं, बल्कि उन्हें सुरक्षित, सम्मानजनक और आत्मनिर्भर जीवन की दिशा में आगे बढ़ाना है। शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, सामाजिक सुरक्षा, कौशल विकास और डिजिटल सेवाओं का विस्तार श्रमिक परिवारों के भविष्य को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
प्रदीप मिश्रा
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