जब ग्रामीण दर-दर भटके तब कौन था साथ? जनसुनवाई टली तो श्रेय लेने पर भड़के राठौर, मंत्री पर तीखा हमला
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कोरबा, छत्तीसगढ़
By ACGN – 7647981711, 9303948009
ग्रामीणों की लड़ाई, नेताओं में श्रेय की होड़! मानिकपुर जनसुनवाई स्थगित होने पर राठौर का मंत्री पर तीखा हमला
राठौर का सवाल- जब ग्रामीण मदद मांगने पहुंचे थे तब साथ क्यों नहीं दिया, अब जनसुनवाई स्थगित होने का श्रेय क्यों?
कोरबा ACGN :- मानिकपुर ओपन कास्ट परियोजना के विस्तार को लेकर 21 अगस्त को प्रस्तावित पर्यावरणीय जनसुनवाई स्थगित होने के बाद कोरबा की राजनीति गरमा गई है। जनसुनवाई स्थगित होने के फैसले को लेकर अब राजनीतिक श्रेय की बहस छिड़ गई है। कोरबा जिला कांग्रेस अध्यक्ष मुकेश कुमार राठौर ने मंत्री एवं क्षेत्रीय विधायक लखनलाल देवांगन के 18 अगस्त के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उनके दावे पर सवाल खड़े किए हैं।
राठौर ने कहा कि मानिकपुर परियोजना से प्रभावित आठ गांवों के ग्रामीण पूरे घटनाक्रम के प्रत्यक्ष गवाह हैं। उनका कहना है कि ग्रामीण अपनी जायज मांगों को लेकर 22 जुलाई को जनसुनवाई की अधिसूचना जारी होने के बाद मंत्री देवांगन के पास पहुंचे थे। ग्रामीणों को उम्मीद थी कि क्षेत्रीय विधायक और मंत्री होने के नाते वे उनकी समस्याओं को एसईसीएल प्रबंधन और प्रशासन के सामने मजबूती से रखेंगे।
कांग्रेस नेता का आरोप है कि ग्रामीणों को अपेक्षित सहयोग नहीं मिला और कथित तौर पर उन्हें यह कहकर निराश किया गया कि अब इस स्तर पर कुछ नहीं हो सकता तथा प्रबंधन जो दे रहा है, उसे स्वीकार कर लेना चाहिए।
22 जुलाई से 17 अगस्त तक क्या हुआ?
राठौर ने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि जनसुनवाई स्थगित कराने में मंत्री की पहल महत्वपूर्ण थी, तो 22 जुलाई से 17 अगस्त के बीच उनके द्वारा की गई ठोस पहल, पत्राचार और बैठकों का विवरण जनता के सामने आना चाहिए।
उन्होंने कहा कि ग्रामीणों के संघर्ष और लगातार पत्राचार के बीच पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने एसईसीएल के सीएमडी सहित संबंधित अधिकारियों के समक्ष ग्रामीणों की समस्याएं उठाईं। इसके बाद मामला प्रशासन के समक्ष गंभीरता से पहुंचा और कलेक्टर ने ग्रामीणों की मांगों एवं परिस्थितियों को देखते हुए जनसुनवाई स्थगित करने का निर्णय लिया। जनसुनवाई स्थगित होने की सूचना 17 अगस्त को प्रकाशित हुई।
बरबसपुर और बालको के मामलों का भी दिया उदाहरण
राठौर ने बरबसपुर में प्रस्तावित शराब दुकान और बालको प्रबंधन द्वारा लघु व्यवसायियों को हटाने के नोटिस का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों मामलों में प्रभावित लोग पहले मंत्री से अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे, लेकिन उन्हें अपेक्षित राहत नहीं मिली। बाद में पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल द्वारा मामला उठाए जाने और प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद स्थिति में बदलाव आया।
राठौर ने कहा कि बरबसपुर, बालको और अब मानिकपुर, इन तीनों मामलों में जनता के संघर्ष के बाद जब मामला निर्णायक स्थिति में पहुंचा तो राजनीतिक श्रेय लेने के दावे सामने आए।
“श्रेय की राजनीति छोड़कर ग्रामीणों के बीच जाएं”
कांग्रेस जिला अध्यक्ष ने कहा कि यदि मंत्री देवांगन को वास्तव में मानिकपुर के ग्रामीणों की चिंता है तो उन्हें श्रेय की राजनीति से ऊपर उठकर प्रभावित गांवों में जाना चाहिए और ग्रामीणों की लंबित मांगों के समाधान के लिए लिखित आश्वासन दिलाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि एसईसीएल प्रबंधन को समयबद्ध कार्रवाई के लिए बाध्य करना ही ग्रामीणों के हित में वास्तविक पहल होगी।
राठौर ने कहा कि जनता के संघर्ष का श्रेय बयान जारी करने से नहीं, बल्कि संकट के समय जनता के साथ खड़े होने से मिलता है। मानिकपुर के ग्रामीण अब यह अंतर अच्छी तरह समझ चुके हैं।
समाचार में कांग्रेस जिला अध्यक्ष मुकेश कुमार राठौर द्वारा लगाए गए आरोप एवं उनके दावे शामिल हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि शेष है। संबंधित मंत्री एवं अन्य पक्षों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
प्रदीप मिश्रा
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