शिकायतों के बाद भी वैशाली नगर में कथित अतिक्रमण जारी! ग्रामीणों ने पूछा, आखिर कार्रवाई में देरी क्यों?
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कोरबा, छत्तीसगढ़
By ACGN – 7647981711, 9303948009
कलेक्टर, निगम आयुक्त, एसईसीएल और तहसीलदार-थाना तक पहुंची शिकायत; ग्रामीणों की मांग, शासकीय भूमि और आम रास्ते की जांच कर अतिक्रमण व खरीद-बिक्री पर तत्काल रोक लगे
कोरबा ACGN:- कोरबा जिले के दर्री तहसील क्षेत्र के ग्राम खम्हरिया एवं वैशाली नगर में शासकीय एवं एसईसीएल से संबंधित भूमि पर कथित अतिक्रमण, आम रास्ते को बाधित करने तथा भूमि की खरीद-बिक्री को लेकर ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि इस संबंध में लगातार शिकायतें की जा रही हैं, लेकिन अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।

बता दें मामला कलेक्टर कार्यालय से लेकर नगर पालिक निगम, एसईसीएल कुसमुण्डा प्रबंधन, तहसील कार्यालय और थाना स्तर तक पहुंच चुका है। इतना ही नहीं, ग्रामीणों के अनुसार जनदर्शन में भी शिकायत प्रस्तुत की गई है।
ग्रामीणों के मुताबिक ग्राम बरपाली के विस्थापित परिवारों को वैशाली नगर में बसाया गया था। इसी क्षेत्र में आजाद पथ और वीर सिंह कुंवर पथ से होकर तालाब तथा आसपास के मोहल्लों तक आम नागरिकों का आवागमन होता है। आरोप है कि इसी रास्ते के हिस्से में ईंट, निर्माण सामग्री आदि रखकर कथित रूप से कब्जा किया जा रहा है, जिससे आम लोगों के आवागमन में परेशानी हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि रास्ते के बाधित होने के साथ जल निकासी की समस्या भी गंभीर है और बारिश के दौरान घरों में पानी घुसने की स्थिति बनती है।

इस मामले को लेकर ग्रामीणों ने सबसे पहले जिला प्रशासन का दरवाजा खटखटाते हुए कलेक्टर कोरबा के समक्ष शिकायत प्रस्तुत की। शिकायत में आम रास्ते को कथित अतिक्रमण से मुक्त कराने, भूमि की वास्तविक स्थिति की जांच कराने और यदि भूमि शासकीय अथवा अधिग्रहित पाई जाती है तो उस पर किसी भी प्रकार के अवैध निर्माण एवं खरीद-बिक्री को रोकने की मांग की गई। ग्रामीणों का कहना है कि जिला प्रशासन के समक्ष मामला पहुंचने के बावजूद मौके पर ठोस कार्रवाई का इंतजार बना हुआ है।

इसके बाद मामले को नगर पालिक निगम कोरबा के आयुक्त के समक्ष भी उठाया गया। क्षेत्र में सड़क एवं नाली निर्माण की आवश्यकता को लेकर दिए गए आवेदन में बताया गया कि रास्ते और जल निकासी की समस्या के कारण लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि सार्वजनिक रास्ता यदि बाधित रहेगा तो न तो आवागमन सुचारू हो सकता है और न ही सड़क-नाली जैसे विकास कार्यों का लाभ लोगों तक ठीक से पहुंच सकता है।

इसी मामले को लेकर वार्ड क्रमांक 61 की पार्षद एवं एमआईसी सदस्य भानुमति जायसवाल द्वारा भी क्षेत्र की सड़क, नाली और संबंधित समस्या को लेकर अधिकारियों को आवेदन दिए जाने की जानकारी सामने आई है। यानी मामला केवल ग्रामीणों की व्यक्तिगत शिकायत नहीं रह गया है, बल्कि स्थानीय जनप्रतिनिधि के स्तर पर भी विषय को प्रशासन के समक्ष रखा गया है। इसके बावजूद ग्रामीणों का कहना है कि स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।


चूंकि यह क्षेत्र एसईसीएल की परियोजनाओं और विस्थापन से भी जुड़ा रहा है, इसलिए ग्रामीणों ने एसईसीएल कुसमुण्डा क्षेत्र के महाप्रबंधक से भी शिकायत की। ग्रामीणों ने प्रबंधन से मांग की कि संबंधित भूमि की स्थिति स्पष्ट की जाए और यदि एसईसीएल द्वारा अधिग्रहित भूमि अथवा उसके रास्ते पर किसी प्रकार का अतिक्रमण हुआ है तो नियमानुसार उसे हटाया जाए। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि सार्वजनिक रास्ते पर किसी भी व्यक्ति का निजी कब्जा आम नागरिकों के अधिकारों को प्रभावित करता है।

इसके बाद मामला तहसीलदार दर्री के समक्ष भी पहुंचा। ग्रामीणों ने राजस्व अभिलेखों के आधार पर भूमि की जांच, सीमांकन और कथित अतिक्रमण की पुष्टि होने पर कार्रवाई की मांग की है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि खसरा, नक्शा, अधिग्रहण अभिलेख और मौके की वास्तविक स्थिति का मिलान कर दिया जाए तो विवाद की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकती है।

उपलब्ध दस्तावेजों में भूमि विवाद और निर्माण से संबंधित पूर्व राजस्व न्यायालयीन कार्यवाही का भी उल्लेख मिलता है। कुछ दस्तावेजों में स्थगन आदेश जारी किए जाने की बात सामने आती है। ऐसे में ग्रामीणों का कहना है कि यदि किसी सक्षम राजस्व अधिकारी द्वारा पहले ही किसी निर्माण अथवा विवादित भूमि के संबंध में आदेश जारी किया गया था तो उसकी वर्तमान स्थिति और अनुपालन की भी जांच होनी चाहिए।

मामले को लेकर थाना स्तर पर भी शिकायत किए जाने की बात ग्रामीणों ने कही है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कथित कब्जे का विरोध करने पर गाली-गलौच और धमकी जैसी स्थिति उत्पन्न होती है। ग्रामीणों का कहना है कि वे विवाद बढ़ने के डर से कई बार खुलकर विरोध नहीं कर पाते। ऐसे में उनका आग्रह है कि प्रशासनिक और पुलिस स्तर पर निष्पक्ष जांच कराकर आम नागरिकों को भयमुक्त वातावरण उपलब्ध कराया जाए।
शिकायतों में कथित अतिक्रमण से संबंधित आरोपों के संदर्भ में चन्द्रिका बाई पति संतलाल यादव निवासी खम्हरिया, राजू यादव पिता नीपथ राम, राकेश कुमार पिता नीपथ राम तथा पुष्पा यादव पति विष्णु यादव निवासी चुनचुनी पारा, गेवराबस्ती के नाम सामने आए हैं। यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि ये नाम ग्रामीणों द्वारा प्रस्तुत शिकायतों में लगाए गए आरोपों के संदर्भ में हैं। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और संबंधित पक्षों का पक्ष सामने आना भी आवश्यक है। अंतिम स्थिति सक्षम प्रशासनिक जांच और राजस्व अभिलेखों के परीक्षण के बाद ही स्पष्ट होगी।
ग्रामीणों का यह भी सवाल है कि आखिर कार्रवाई किस स्तर पर रुकी हुई है? यदि किसी स्तर पर प्रक्रिया लंबित है तो संबंधित विभाग को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। और यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही के कारण कार्रवाई लंबित है तो उसकी भी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
यदि भूमि शासकीय है तो उसे अतिक्रमण से मुक्त कराया जाए। यदि भूमि अधिग्रहित है तो उसकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। यदि खरीद-बिक्री नियम विरुद्ध है तो उसे रोका जाए। और यदि शिकायतें गलत हैं तो प्रशासन जांच कर सच्चाई ग्रामीणों के सामने रखे।
आमजन की शिकायत का समाधान केवल आवेदन स्वीकार करने से नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच और जमीन पर दिखाई देने वाली कार्रवाई से होता है। अब वैशाली नगर के ग्रामीण उसी कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।
प्रदीप मिश्रा
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