एक इंजेक्शन से मरीज का पैर सुन्न होने का आरोप, अब स्वास्थ्य विभाग की जांच पर नजर; हाटी की शिकायत ने भी बढ़ाई चिंता
|
😊 कृपया इस न्यूज को शेयर करें😊
|
रायगढ़, छत्तीसगढ़
By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- रायगढ़
आनंद फार्मेसी में संतोष नामदेव के उपचार को लेकर गंभीर आरोप, स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल
रायगढ़ शहर की आनंद फार्मेसी में उपचार के दौरान मरीज संतोष नामदेव के पैर में कथित रूप से गलत स्थान पर इंजेक्शन लगाए जाने और इसके बाद पैर काम नहीं करने का मामला सामने आया है। पीड़ित के आरोपों ने एक बार फिर जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था, निजी चिकित्सा संस्थानों की निगरानी और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मिली जानकारी के अनुसार संतोष नामदेव 5 अगस्त को रक्तचाप कम होने की शिकायत लेकर आनंद फार्मेसी पहुंचा था। पीड़ित के मुताबिक वहां मौजूद चिकित्सक ने उसे दो इंजेक्शन लगाए। आरोप है कि दूसरा इंजेक्शन पैर की नस में लगाए जाने के बाद पैर में झुनझुनी शुरू हुई और धीरे-धीरे पैर सुन्न पड़ गया।

संतोष का कहना है कि उसने तत्काल इंजेक्शन लगाने वाले चिकित्सक को इसकी जानकारी दी, लेकिन उसे यह कहकर आश्वस्त किया गया कि समस्या ठीक हो जाएगी। जब परेशानी बढ़ती गई और पैर ने काम करना बंद कर दिया तो वह दोबारा आनंद फार्मेसी पहुंचा। पीड़ित के अनुसार इस बार भी उसे अपेक्षित सहयोग नहीं मिला।


इसके बाद संतोष ने एम्स में जांच कराई। उसके अनुसार वहां चिकित्सकों ने नस प्रभावित होने की बात बताई। फिलहाल उसका उपचार जारी है और उसने आनंद फार्मेसी के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।
हालांकि पैर में आई समस्या का वास्तविक कारण क्या है और उपचार के दौरान चिकित्सकीय लापरवाही हुई या नहीं, इसका अंतिम निष्कर्ष विशेषज्ञ चिकित्सकीय एवं विभागीय जांच के बाद ही सामने आएगा। लेकिन इस मामले ने स्वास्थ्य विभाग के सामने एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया है, क्या किसी मरीज की हालत गंभीर होने के बाद ही स्वास्थ्य व्यवस्था की खामियां दिखाई देती हैं?
पहले भी उठते रहे हैं सवाल
आनंद फार्मेसी को लेकर पूर्व में भी उपचार संबंधी गंभीर आरोपों और विवादों की चर्चा सामने आने की बात कही जा रही है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के लिए जरूरी हो जाता है कि पुराने मामलों की भी समीक्षा की जाए और यह देखा जाए कि पूर्व में शिकायतें आई थीं तो उन पर क्या कार्रवाई हुई थी।
यदि किसी संस्थान के संबंध में बार-बार शिकायतें सामने आती हैं तो केवल शिकायत आने के बाद औपचारिक कार्रवाई करने के बजाय नियमित निरीक्षण और नियमों के पालन की जांच भी जरूरी है।
अब सवाल स्वास्थ्य विभाग की निगरानी पर
यह मामला केवल आनंद फार्मेसी तक सीमित नहीं है। जिले में निजी क्लीनिकों, कथित अवैध चिकित्सा गतिविधियों और सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़े कर्मचारियों द्वारा निजी उपचार किए जाने की शिकायतें भी समय-समय पर सामने आती रही हैं।
हाटी में लालजी राठौर के घर कथित निजी क्लीनिक, स्वास्थ्य विभाग की जांच पर सवाल

इसी क्रम में धरमजयगढ़ क्षेत्र के हाटी स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से जुड़े एक मामले की चर्चा भी सामने आई है। जानकारी के अनुसार वहां पदस्थ सुपरवाइजर लालजी राठौर के संबंध में शिकायत की गई थी कि उनके द्वारा घर पर निजी क्लीनिक संचालित कर मरीजों का उपचार किया जा रहा है।
शिकायत के बाद संबंधित कर्मचारी से स्पष्टीकरण मांगा गया। बताया जाता है कि स्पष्टीकरण में निजी क्लीनिक संचालित नहीं करने की बात कही गई और इसके बाद शिकायत का निराकरण मान लिया गया।
लेकिन यहां सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि क्या केवल कर्मचारी के स्पष्टीकरण को आधार बनाकर शिकायत का निराकरण करना पर्याप्त है?

यदि शिकायत निजी क्लीनिक संचालन जैसी गंभीर बात को लेकर थी तो क्या विभाग की टीम ने मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन किया? क्या यह देखा गया कि संबंधित परिसर में मरीजों का उपचार हो रहा है या नहीं? क्या आसपास के लोगों से जानकारी ली गई? यदि ऐसा सत्यापन नहीं किया गया तो शिकायत के वास्तविक निराकरण पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
हाटी में भी किसी गंभीर घटना का इंतजार तो नहीं?
स्वास्थ्य विभाग को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसी शिकायत की जांच केवल कागजों तक सीमित न रहे। यदि किसी स्थान पर निजी क्लीनिक संचालित होने की शिकायत मिलती है तो विभाग को मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति की जांच करनी चाहिए।
क्योंकि सवाल यह है कि क्या हाटी में भी विभाग तब सक्रिय होगा, जब किसी मरीज की हालत उपचार के दौरान गंभीर हो जाएगी? क्या किसी घटना के बाद ही यह जांच होगी कि वहां उपचार कौन कर रहा था और किस अनुमति के तहत कर रहा था?
स्वास्थ्य व्यवस्था का उद्देश्य हादसे के बाद जिम्मेदारी तय करना नहीं, बल्कि हादसा होने से पहले संभावित खतरे को रोकना होना चाहिए।
अब जांच का इंतजार
आनंद फार्मेसी मामले में स्वास्थ्य विभाग को पीड़ित के आरोपों की निष्पक्ष जांच करनी चाहिए। वहीं हाटी की शिकायत में भी यदि अभी तक भौतिक सत्यापन नहीं हुआ है तो मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।
रायगढ़ की जनता अब यह जानना चाहती है कि स्वास्थ्य विभाग शिकायतों को सिर्फ कागजी प्रक्रिया के जरिए समाप्त करता है या वास्तव में जमीन पर उतरकर जांच भी करता है।
एक मरीज के पैर में इंजेक्शन के बाद आई गंभीर समस्या का आरोप हो या किसी सरकारी स्वास्थ्यकर्मी द्वारा निजी क्लीनिक चलाने की शिकायत दोनों ही मामलों में जवाबदेही और पारदर्शी जांच जरूरी है। क्योंकि स्वास्थ्य के मामले में छोटी सी अनदेखी भी किसी की पूरी जिंदगी पर भारी पड़ सकती है।
नोट: समाचार में उल्लेखित आरोप उपलब्ध जानकारी एवं संबंधित पक्ष के दावों पर आधारित हैं। आरोपों की अंतिम पुष्टि सक्षम विभागीय एवं चिकित्सकीय जांच के बाद ही होगी। संबंधित पक्ष का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।
प्रदीप मिश्रा
देश में तेजी से बढ़ता विश्वसनीय वेब पोर्टल अंजोर छत्तीसगढ़ न्यूज़ हम लाते हैं निष्पक्ष, निर्भीक और सच्ची खबरें
|
Whatsapp बटन दबा कर इस न्यूज को शेयर जरूर करें |
Advertising Space
















































