15वें वित्त आयोग की राशि पर उठे सवाल, भैयाथान जनपद में पक्षपातपूर्ण आवंटन के आरोप
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सूरजपुर, छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- सौरभ साहू
30 प्रतिशत अनुपूरक सूची सार्वजनिक नहीं होने से बढ़ा विवाद, जनपद सदस्यों ने पारदर्शिता पर उठाए सवाल
सूरजपुर ACGN:- सूरजपुर जिले के भैयाथान जनपद पंचायत में वर्ष 2025-26 के 15वें वित्त आयोग की जनपद निधि से स्वीकृत विकास कार्यों के आवंटन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जनपद पंचायत सदस्यों ने आरोप लगाया है कि विकास कार्यों के चयन और राशि के वितरण में समानता एवं पारदर्शिता का पालन नहीं किया गया। उनका दावा है कि अधिकांश निर्माण कार्य एक क्षेत्र विशेष में केंद्रित कर दिए गए, जबकि कई अन्य ग्राम पंचायतों और क्षेत्रों को अपेक्षित प्राथमिकता नहीं मिली।
उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार 15वें वित्त आयोग की टाइड एवं अनटाइड निधि से सीसी रोड, चबूतरा निर्माण, हैंडपंप खनन, तालाब गहरीकरण, स्कूल मरम्मत, सामुदायिक भवन तथा नाली निर्माण सहित अनेक विकास कार्यों के लिए लाखों रुपये की स्वीकृति दी गई। हालांकि जनपद सदस्यों का आरोप है कि यह पूरी सूची नहीं है। उनका कहना है कि कुल स्वीकृत राशि का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा एक अलग अनुपूरक सूची के माध्यम से स्वीकृत किया गया, जिसे अब तक सार्वजनिक नहीं किया गया है।
जनप्रतिनिधियों का कहना है कि यदि आवंटन प्रक्रिया पूरी तरह नियमों के अनुरूप और निष्पक्ष रही है, तो टाइड, अनटाइड और अनुपूरक—तीनों सूचियों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि इससे यह स्पष्ट हो जाएगा कि किस ग्राम पंचायत को कितनी राशि मिली, किन कार्यों को प्राथमिकता दी गई और आवंटन का आधार क्या था।
मामले में मुख्य कार्यपालन अधिकारी विनय कुमार गुप्ता ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि जनपद पंचायत सदस्यों को किसी प्रकार का व्यक्तिगत फंड नहीं दिया जाता। उन्होंने बताया कि सभी विकास कार्य सामान्य सभा से अनुमोदित प्रस्तावों के आधार पर स्वीकृत किए जाते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिन कार्यों को लेकर वर्तमान में विवाद हो रहा है, उनका अनुमोदन उनके भैयाथान में पदभार ग्रहण करने से पहले हुई सामान्य सभा की बैठक में किया गया था।
वहीं, जनपद पंचायत अध्यक्ष सुलोचनी पैकरा से दूरभाष पर संपर्क कर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया। निर्माण कार्यों के चयन, कथित असमान आवंटन तथा अनुपूरक सूची को लेकर पूछे गए प्रश्नों पर उन्होंने तत्काल कोई विस्तृत जवाब नहीं दिया और कहा कि वह बाद में इस विषय पर जानकारी देंगी।
जनपद सदस्यों का कहना है कि यदि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रही है तो अनुपूरक सूची सार्वजनिक करने में किसी प्रकार की आपत्ति नहीं होनी चाहिए। उनका मानना है कि सभी स्वीकृत कार्यों की सूची सार्वजनिक होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि विकास कार्यों का वितरण सभी क्षेत्रों में समान रूप से हुआ या किसी विशेष क्षेत्र को अधिक लाभ पहुंचाया गया।
फिलहाल पूरे मामले में जिला प्रशासन की भूमिका पर भी निगाहें टिकी हुई हैं। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और नागरिकों का कहना है कि यदि वर्ष 2025-26 की 15वें वित्त आयोग की टाइड, अनटाइड और अनुपूरक सूची सार्वजनिक कर दी जाती है, तो आवंटन प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सभी सवालों का तथ्यात्मक उत्तर सामने आ जाएगा। वहीं यदि सूची सार्वजनिक नहीं होती है, तो पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर उठ रहे संदेह और गहरे हो सकते हैं।
नोट: इस समाचार में पक्षपातपूर्ण आवंटन एवं पारदर्शिता संबंधी बातें जनपद पंचायत सदस्यों द्वारा लगाए गए आरोपों पर आधारित हैं। मुख्य कार्यपालन अधिकारी का पक्ष समाचार में शामिल किया गया है। अध्यक्ष का विस्तृत पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
प्रदीप मिश्रा
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