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पत्थलगांव में पत्रकार से कथित मारपीट का मामला गरमाया, पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल

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जशपुर, छत्तीसगढ़

By ACGN 7647981711, 9303948009

संवाददाता :- सौरभ साहू

थाना परिसर में पत्रकार से मारपीट के वायरल दावों के बाद निष्पक्ष जांच की मांग तेज, सोशल मीडिया पर उठ रहे कई सवाल

जशपुर ACGN:- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के गृह जिले जशपुर के पत्थलगांव में एक पत्रकार के साथ कथित मारपीट का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और विभिन्न पोस्टों के बाद यह घटना पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गई है। पत्रकार संगठनों और सामाजिक संगठनों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा है कि यदि किसी पत्रकार पर उसके पेशेगत दायित्वों के निर्वहन के दौरान हमला हुआ है, तो दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

सोशल मीडिया पर प्रसारित दावों के अनुसार स्थानीय पत्रकार अमित पांडेय हाल के दिनों में कथित भूमि विवाद, फर्जी दस्तावेजों और अन्य स्थानीय मामलों से संबंधित खबरें प्रकाशित कर रहे थे। वायरल पोस्टों में आरोप लगाया गया है कि इसी क्रम में उन्हें पत्थलगांव थाना बुलाया गया, जहां कथित रूप से उनके साथ मारपीट हुई। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है और न ही इस संबंध में जांच पूरी हुई है।

घटना को लेकर सबसे अधिक सवाल पुलिस की भूमिका पर उठ रहे हैं। सोशल मीडिया पर प्रसारित सामग्री में दावा किया गया है कि कथित मारपीट थाना परिसर में हुई और उस दौरान पुलिस अधिकारी भी मौजूद थे। इन दावों को लेकर विभिन्न स्तर पर चर्चा हो रही है, लेकिन अब तक पुलिस की ओर से विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण सार्वजनिक नहीं किया गया है।

मामले के सामने आने के बाद कई पत्रकार संगठनों ने घटना की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होगी तो स्वतंत्र और निष्पक्ष पत्रकारिता प्रभावित होगी। वहीं कुछ सामाजिक संगठनों ने भी पूरे घटनाक्रम की न्यायिक या उच्च स्तरीय जांच की मांग उठाई है।

सोशल मीडिया पर प्रसारित विभिन्न पोस्टों में कई व्यक्तियों और अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्षों का विस्तृत पक्ष भी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है। ऐसे में इन दावों की सत्यता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब प्रदेश में कानून-व्यवस्था और पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर लगातार बहस चल रही है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में पत्रकारों की सुरक्षा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को महत्वपूर्ण माना जाता है। यदि किसी पत्रकार के साथ उसके कार्य के दौरान हिंसा हुई है तो यह गंभीर चिंता का विषय है, वहीं यदि सोशल मीडिया पर लगाए गए आरोप असत्य हैं तो उनकी भी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

फिलहाल पूरे मामले में सभी की निगाहें पुलिस जांच और प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि वायरल दावों में कितनी सच्चाई है और घटना के लिए कौन जिम्मेदार है।

नोट: यह समाचार सोशल मीडिया पर वायरल दावों, उपलब्ध प्रारंभिक जानकारी एवं विभिन्न पक्षों द्वारा उठाई गई मांगों के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें वर्णित आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। अंजोर छत्तीसगढ़ न्यूज़ संबंधित सभी पक्षों का आधिकारिक पक्ष प्रकाशित करने के लिए प्रतिबद्ध है। यदि पुलिस प्रशासन, संबंधित अधिकारी या अन्य पक्ष अपना स्पष्टीकरण जारी करते हैं, तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

प्रदीप मिश्रा

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