छत्तीसगढ़ में हीरा खनन की तैयारी तेज, महासमुंद के बलौदा-बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक में बड़े स्तर पर ड्रिलिंग को मंजूरी
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रायपुर, छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- संतोष तिवारी
महासमुंद के हीरा भंडार की वैज्ञानिक जांच का अगला चरण शुरू, व्यावसायिक खनन की संभावनाओं के बीच पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय विकास पर भी जोर
रायपुर। छत्तीसगढ़ की खनिज संपदा को नई पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। एनएमडीसी-सीएमडीसी लिमिटेड (एनसीएल) के निदेशक मंडल ने महासमुंद जिले के बलौदा-बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक में बड़े व्यास की ड्रिलिंग (Large Diameter Drilling) शुरू करने की मंजूरी दे दी है। यह निर्णय क्षेत्र में मौजूद संभावित हीरा भंडार का वैज्ञानिक मूल्यांकन करने और भविष्य में व्यावसायिक हीरा खनन की संभावनाओं को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
एनसीएल बोर्ड की बैठक में परियोजना की अब तक की प्रगति की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए गए कि प्रॉस्पेक्टिंग लाइसेंस की अवधि के भीतर सभी तकनीकी कार्य समयबद्ध तरीके से पूरे किए जाएं। बड़े व्यास की ड्रिलिंग के माध्यम से किम्बरलाइट पाइप में मौजूद हीरे की मात्रा और गुणवत्ता का सटीक आकलन किया जाएगा। इसके बाद विस्तृत व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसके आधार पर आगे खनन को लेकर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
बलौदा-बेलमुंडी क्षेत्र में हीरा मिलने की पुष्टि पहले ही वैज्ञानिक परीक्षणों से हो चुकी है। एनसीएल द्वारा स्ट्रीम सेडिमेंट सैंपलिंग, भू-भौतिकीय सर्वेक्षण और ड्रिलिंग के माध्यम से किम्बरलाइट पाइप की पहचान की गई थी। इसके बाद लगभग 200 टन बल्क सैंपल का परीक्षण एनएमडीसी के पन्ना डायमंड प्रोसेसिंग प्लांट में किया गया, जहां 1.22 कैरेट वजन के पांच प्राकृतिक हीरे प्राप्त हुए।
यह खोज छत्तीसगढ़ के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इससे प्रदेश की खनिज पहचान अब केवल कोयला, लौह अयस्क और बॉक्साइट तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि हीरा जैसे बहुमूल्य खनिज के क्षेत्र में भी नई संभावनाएं खुल सकती हैं।
एनएमडीसी-सीएमडीसी लिमिटेड भारत सरकार के उपक्रम एनएमडीसी लिमिटेड और छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन का संयुक्त उपक्रम है। कंपनी अब तक लौह अयस्क परियोजनाओं पर केंद्रित रही है, लेकिन महासमुंद की इस परियोजना के माध्यम से बहु-खनिज विकास की दिशा में आगे बढ़ रही है।
बैठक में राज्य की अन्य लौह अयस्क परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई। बैलाडीला क्षेत्र की विभिन्न परियोजनाओं में उत्पादन क्षमता बढ़ाने की योजनाओं पर चर्चा हुई। सरकार और संबंधित संस्थाओं ने यह स्पष्ट किया कि खनिज विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण, अपशिष्ट प्रबंधन और स्थानीय समुदायों के हितों को प्राथमिकता दी जाएगी।
छत्तीसगढ़ लंबे समय से प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध प्रदेश रहा है। यहां कोयला, लौह अयस्क, बॉक्साइट, चूना पत्थर, टिन और अब हीरा जैसे खनिजों की उपलब्धता प्रदेश को देश के महत्वपूर्ण खनिज राज्यों में शामिल करती है। हालांकि खनन के साथ यह चुनौती भी सामने रहती है कि प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग संतुलित तरीके से हो और स्थानीय लोगों को इसका वास्तविक लाभ मिले।
बलौदा-बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक से उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले समय में यह परियोजना रोजगार, उद्योग और आर्थिक विकास के नए अवसर पैदा कर सकती है। साथ ही यह भी जरूरी होगा कि स्थानीय युवाओं को कौशल विकास और रोजगार में प्राथमिकता मिले, ताकि प्रदेश की संपदा का लाभ छत्तीसगढ़ के लोगों तक पहुंचे।
प्रदीप मिश्रा
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