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उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में शुरू होगी ‘हॉर्नबिल सफारी’, संरक्षण के साथ ग्रामीणों को मिलेगा रोजगार

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रायपुर, छत्तीसगढ़

By ACGN 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- अनादि पांडेय

मालाबार पाइड हॉर्नबिल की बढ़ती संख्या बनी पहचान, पीवीटीजी गांवों में इको-टूरिज्म से जुड़ेगा स्थानीय समुदाय

रायपुर ACGN:- छत्तीसगढ़ के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में वन्यजीव संरक्षण और स्थानीय समुदायों की आजीविका को बढ़ावा देने की दिशा में एक नई पहल शुरू होने जा रही है। वन मंत्री श्री केदार कश्यप की पहल पर रिजर्व प्रबंधन द्वारा विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (पीवीटीजी) के गांवों ओढ़, अमलोर और आमामोरा क्षेत्र में ‘हॉर्नबिल सफारी’ प्रारंभ करने का निर्णय लिया गया है।


यह पहल दुर्लभ मालाबार पाइड हॉर्नबिल के संरक्षण को मजबूती देने के साथ-साथ स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी उपलब्ध कराएगी। प्रस्तावित सफारी के माध्यम से पर्यटक प्राकृतिक वातावरण में हॉर्नबिल पक्षियों का अवलोकन कर सकेंगे और क्षेत्र में बर्ड वॉचिंग तथा नेचर टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार पिछले चार वर्षों में उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में मालाबार पाइड हॉर्नबिल की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। यह उपलब्धि एंटी-पोचिंग अभियान, वन्यजीव सुरक्षा, फलदार वृक्षों के संरक्षण और ‘हॉर्नबिल रेस्टोरेंट’ जैसी अभिनव पहल का परिणाम मानी जा रही है।


वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा स्थानीय समुदायों की भागीदारी को बढ़ावा देते हुए संरक्षण कार्यों को आजीविका से जोड़ा जा रहा है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख श्री अरुण कुमार पाण्डेय तथा प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) श्री ओ.पी. यादव के मार्गदर्शन में टाइगर रिजर्व में कई नए प्रयास किए जा रहे हैं।


हॉर्नबिल संरक्षण के लिए गठित विशेष ट्रैकिंग टीम लगातार पक्षियों की गतिविधियों, घोंसलों और उनके आवास क्षेत्रों की निगरानी कर रही है। वन विभाग के साथ स्थानीय ट्रैकर्स भी इस अभियान में सहयोग कर रहे हैं। इससे ओढ़, अमलोर और आमामोरा के आसपास का क्षेत्र हॉर्नबिल के सुरक्षित आवास और आकर्षक बर्डिंग स्थल के रूप में विकसित हो रहा है।


हॉर्नबिल सफारी की खास बात यह होगी कि स्थानीय युवाओं को बर्ड वॉचिंग और नेचर गाइड का प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के बाद युवा पर्यटकों को जंगल और पक्षियों से जुड़ी जानकारी देने का कार्य करेंगे, जिससे उन्हें रोजगार और आय का स्थायी साधन मिलेगा।
रायपुर से लगभग 130 किलोमीटर दूर स्थित उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व अब मध्य भारत के प्रमुख बर्डिंग डेस्टिनेशन के रूप में अपनी पहचान बना रहा है। यहां मालाबार पाइड हॉर्नबिल के अलावा शाहीन बाज, भारतीय पिट्टा, ब्राउन फिश आउल, ग्रे-हेडेड फिश ईगल सहित कई दुर्लभ पक्षियों की प्रजातियां पाई जाती हैं।
यह क्षेत्र भारतीय विशाल गिलहरी और भारतीय विशाल उड़न गिलहरी जैसे दुर्लभ वन्यजीवों के लिए भी प्रसिद्ध है। वन विशेषज्ञों के अनुसार संरक्षण, पर्यटन और स्थानीय समुदायों की भागीदारी का यह मॉडल आने वाले समय में छत्तीसगढ़ को प्राकृतिक पर्यटन के क्षेत्र में नई पहचान दिलाएगा।
हॉर्नबिल सफारी शुरू होने से वन्यजीव प्रेमियों, शोधकर्ताओं और पर्यटकों को नया आकर्षण मिलेगा, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और विकास की नई संभावनाएं भी मजबूत होंगी।

प्रदीप मिश्रा
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