पाठ्यपुस्तकों की गलतियों पर सरकार सख्त, जांच समिति करेगी जिम्मेदारी तय
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भुवनेश्वर, ओड़िशा
By ACGN 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- स्वामी बिजया नंद जी महाराज
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने दिए जांच के निर्देश, विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़े मामले में लापरवाही बर्दाश्त नहीं
भुवनेश्वर ACGN:- ओड़िशा सरकार की विद्यालयी पाठ्यपुस्तकों में सामने आई गंभीर त्रुटियों को लेकर मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कड़ा रुख अपनाया है। बुधवार को लोक सेवा भवन में आयोजित महत्वपूर्ण बैठक में मुख्यमंत्री ने पाठ्यपुस्तकों में हुई गलतियों की विस्तृत जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और संस्थाओं की जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए।
बैठक में स्कूल एवं जनशिक्षा मंत्री नित्यानंद गंड, मुख्य सचिव अनु गर्ग सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने कहा कि विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़े विषयों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी और शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए हर स्तर पर जवाबदेही तय होगी।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर विकास आयुक्त की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया है। यह समिति पाठ्यपुस्तकों में हुई त्रुटियों की जांच कर यह पता लगाएगी कि गलतियों के लिए कौन अधिकारी या संस्था जिम्मेदार है। समिति को सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि समिति की रिपोर्ट के आधार पर दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
गौरतलब है कि हाल ही में स्कूल एवं जनशिक्षा विभाग ने स्वीकार किया था कि कक्षा 1 से 8 तक की नई पाठ्यपुस्तकों में कुल 1678 त्रुटियां सामने आई हैं। इनमें वर्तनी की गलतियां, महान व्यक्तियों के नामों में त्रुटि, तथ्यात्मक गलतियां और गलत तस्वीरों का प्रकाशन जैसी गंभीर कमियां शामिल हैं।
इन पाठ्यपुस्तकों में सबसे अधिक 705 त्रुटियां कक्षा 8 की पुस्तकों में पाई गई हैं। जांच के दौरान कई ऐसी गलतियां सामने आईं, जिनसे शिक्षा व्यवस्था की तैयारी और गुणवत्ता जांच प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे।
बताया गया कि ओड़िशा विधानसभा की जगह कर्नाटक विधानसभा की तस्वीर प्रकाशित कर दी गई थी। वहीं नियमगिरि पहाड़ियों को झारखंड में स्थित बताया गया और गंजाम जिले को ब्रह्मपुर जिला दर्शाने जैसी तथ्यात्मक गलतियां भी सामने आईं।
ये पाठ्यपुस्तकें राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और ओड़िशा करिकुलम फ्रेमवर्क फॉर स्कूल एजुकेशन 2025 के अनुरूप तैयार की गई हैं, जिन्हें वर्ष 2026-27 के शैक्षणिक सत्र से लागू किया जाना है।
त्रुटियां सामने आने के बाद स्कूल एवं जनशिक्षा विभाग ने सुधार की प्रक्रिया शुरू कर दी है। शिक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे पुस्तकों में मौजूद गलतियों को चिन्हित कर विद्यार्थियों को सही जानकारी उपलब्ध कराएं।
अब बड़ा सवाल यही है कि इतनी बड़ी संख्या में त्रुटियां आखिर किस स्तर की जांच में चूक के कारण सामने आईं और भविष्य में ऐसी गलतियों को रोकने के लिए व्यवस्था को कितना मजबूत किया जाएगा।
प्रदीप मिश्रा
निष्पक्ष निर्भीक और सच्ची खबर, हर खबर पर तिरछी नजर और जनहित के प्रति समर्पित पत्रकारिता के साथ देश में तेजी से बढ़ता विश्वसनीय वेब पोर्टल अंजोर छत्तीसगढ़ न्यूज़
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