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बस्तर मॉडल से बदली राजस्व व्यवस्था, जनता के द्वार पहुंचा प्रशासन

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बस्तर, छत्तीसगढ़

By ACGN 7647981711, 9303948009
संवाददाता :-

फौती नामांतरण से लेकर भू-अभिलेख सुधार तक डिजिटल तकनीक और जनभागीदारी से सुशासन की नई मिसाल

बस्तर ACGN:- प्रशासनिक व्यवस्था में वर्षों से लंबित राजस्व मामलों के निराकरण को लेकर छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले ने सुशासन का एक नया उदाहरण प्रस्तुत किया है। डिजिटल तकनीक, मैदानी अमले की सक्रियता और जनसमन्वय के माध्यम से बस्तर जिला प्रशासन ने फौती नामांतरण जैसे जटिल मामलों का समाधान करते हुए राजस्व सेवाओं को आम जनता के करीब पहुंचाया है।
किसी भू-स्वामी की मृत्यु के बाद उसके वारिसों के नाम जमीन का हस्तांतरण यानी फौती नामांतरण ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से एक चुनौती रहा है। जानकारी के अभाव, कागजी प्रक्रियाओं की जटिलता और बिचौलियों की भूमिका के कारण कई परिवारों को वर्षों तक अपने अधिकारों के लिए परेशान होना पड़ता था। बस्तर प्रशासन ने इस पुरानी व्यवस्था में बदलाव करते हुए स्वयं जनता तक पहुंचकर मामलों का निराकरण करने की पहल की।
विशेष अभियान के तहत जिले के 611 गांवों से जानकारी जुटाई गई और 12 जून 2026 तक लंबित फौती नामांतरण प्रकरणों के निराकरण की दिशा में बड़ी सफलता हासिल की गई। प्रशासन ने आवेदन का इंतजार करने के बजाय स्वतः संज्ञान लेते हुए गांव-गांव जाकर पात्र हितग्राहियों की पहचान की।
इस अभियान में तहसीलदार, नायब तहसीलदार, ग्राम सचिव, पटवारी और कोटवारों ने मिलकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ग्राम सचिवों ने पिछले चार वर्षों में मृत हुए 17 हजार 405 लोगों की सूची तैयार की। इसके बाद पटवारियों ने भुइयां पोर्टल से रिकॉर्ड का मिलान कर जमीन से जुड़े मामलों की पहचान की और वारिसों से संपर्क कर आवश्यक प्रक्रिया पूरी कराई। वहीं कोटवारों ने सामाजिक सत्यापन कर पारदर्शिता सुनिश्चित की।
जिले में 8 हजार 651 ऐसे मामले चिन्हित किए गए जिनमें मृत व्यक्तियों के नाम पर जमीन दर्ज थी। इनमें से 8 हजार 241 मामलों में ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी कर आदेश जारी किए जा चुके हैं। इससे हजारों परिवारों को भूमि संबंधी अधिकार और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में आसानी होगी।
बस्तर जिले की विभिन्न तहसीलों में इस अभियान के बेहतर परिणाम सामने आए हैं। तोकापाल तहसील में सबसे अधिक मामलों का निराकरण किया गया, जबकि बकावण्ड, जगदलपुर, बस्तर और अन्य तहसीलों में भी राजस्व रिकॉर्ड दुरुस्त करने में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।
इस पहल से किसानों और ग्रामीणों को किसान क्रेडिट कार्ड, कृषि सब्सिडी तथा अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में सुविधा मिलेगी। डिजिटल ट्रैकिंग और स्वतः संज्ञान की प्रक्रिया से बिचौलियों की भूमिका भी कम हुई है।
बस्तर का यह मॉडल यह साबित करता है कि संवेदनशील प्रशासन और तकनीक के सही उपयोग से वर्षों पुरानी समस्याओं का समाधान संभव है। अब जिला प्रशासन ने अगले चरण में पिछले 10 वर्षों के लंबित मामलों को भी शत-प्रतिशत पूरा करने का लक्ष्य रखा है।

प्रदीप मिश्रा
निष्पक्ष निर्भीक और सच्ची खबर, हर खबर पर तिरछी नजर और जनहित के प्रति समर्पित पत्रकारिता के साथ देश में तेजी से बढ़ता विश्वसनीय वेब पोर्टल अंजोर छत्तीसगढ़ न्यूज़

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