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धरमजयगढ़ में KPCL कोयला खदान के खिलाफ फूटा जनआक्रोश, सैकड़ों ग्रामीणों ने दर्ज कराई आपत्ति

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रायगढ़, छत्तीसगढ़

By ACGN 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- संजय जेठवानी

जंगल, जमीन और जल बचाने ग्रामीणों की आवाज बुलंद, प्रस्तावित 1610.75 हेक्टेयर खदान परियोजना पर प्रशासन से जवाब मांग रहे लोग

रायगढ़ ACGN:- धरमजयगढ़ क्षेत्र में कर्नाटक पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (KPCL) की प्रस्तावित कोयला खदान परियोजना को लेकर ग्रामीणों का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। बुधवार को बड़ी संख्या में किसान, ग्रामीण और प्रभावित क्षेत्र के लोग अपनी आपत्तियां दर्ज कराने पहुंचे। ग्रामीणों की भीड़ ने यह साफ संकेत दिया कि प्रस्तावित खनन परियोजना को लेकर जमीन स्तर पर नाराजगी बढ़ रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि 1610.75 हेक्टेयर क्षेत्र में प्रस्तावित कोयला खदान केवल एक औद्योगिक परियोजना नहीं है, बल्कि यह उनके जीवन, आजीविका, जंगल, पानी और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय है।
ग्राम पंचायत बायसी कॉलोनी की ग्राम सभा ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव को पत्र भेजकर प्रस्तावित कोल ब्लॉक को तत्काल निरस्त करने की मांग की है। ग्रामीणों ने कहा कि ग्राम सभा पहले ही सर्वसम्मति से परियोजना के विरोध में प्रस्ताव पारित कर चुकी है।
ग्रामीणों ने पेसा अधिनियम, वनाधिकार कानून, संविधान की पांचवीं अनुसूची और हाथियों के संरक्षण से जुड़े नियमों का हवाला देते हुए कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में किसी भी बड़े फैसले में स्थानीय लोगों की सहमति और अधिकारों का सम्मान जरूरी है।
लोगों का आरोप है कि खनन शुरू होने से क्षेत्र के घने जंगल, हाथियों के प्राकृतिक आवास, कृषि भूमि और जलस्रोत प्रभावित हो सकते हैं। साथ ही आदिवासी समाज की आस्था और सांस्कृतिक पहचान से जुड़े कई स्थान भी खतरे में आ सकते हैं।
ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि क्या विकास के नाम पर उन लोगों की आवाज दबाई जा सकती है, जिनकी जमीन और जीवन पर सीधा असर पड़ने वाला है।
विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रशासनिक अनुमति को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं रही। मौके पर पहुंचे एसडीएम प्रवीण भगत ने ग्रामीणों से कहा कि सभा या प्रदर्शन के लिए अभी तक कोई आधिकारिक अनुमति जारी नहीं हुई है।
वहीं ग्रामीणों का कहना था कि उन्होंने पहले ही आवेदन देकर पावती प्राप्त कर ली थी। इस पर एसडीएम ने बताया कि एसडीओपी कार्यालय से अनुमति संबंधी जवाब प्राप्त नहीं हुआ है, इसलिए प्रशासन की ओर से अनुमति जारी नहीं की गई है।
इस पूरे मामले ने प्रशासनिक प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब वे अपनी आपत्ति और ज्ञापन सौंपने आए थे तो अनुमति को लेकर भ्रम की स्थिति क्यों बनी रही? क्या प्रशासन को पहले से ग्रामीणों की नाराजगी का अंदाजा नहीं था?
ग्रामीणों का कहना है कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना हर नागरिक का अधिकार है। ऐसे में किसी भी प्रकार की कार्रवाई से पहले प्रशासन को ग्रामीणों की भावनाओं को समझना चाहिए।
वहीं प्रशासन की ओर से कानून व्यवस्था बनाए रखने की बात कही जा रही है। हालांकि ग्रामीणों पर किसी भी कार्रवाई को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
धरमजयगढ़ में उमड़ा जनसमूह यह बताने के लिए काफी है कि KPCL की प्रस्तावित कोयला खदान अब केवल एक परियोजना नहीं बल्कि स्थानीय लोगों के अधिकार और पर्यावरण संरक्षण का बड़ा मुद्दा बन चुकी है।
अब सवाल यह है कि क्या सरकार और प्रशासन ग्रामीणों की चिंताओं को सुनेगा? क्या ग्राम सभा की आपत्तियों पर गंभीरता से विचार होगा? क्या जंगल और जमीन बचाने की आवाज विकास की तेज रफ्तार में दब जाएगी?
इन सवालों का जवाब आने वाले समय में प्रशासनिक निर्णय और आगे की प्रक्रिया से मिलेगा।

प्रदीप मिश्रा
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