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पानी टंकी पर चढ़े युवकों का हाई-वोल्टेज ड्रामा या पुलिस कार्रवाई से बचने की रणनीति?

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कोरबा छत्तीसगढ़

By ACGN 7647 98171193039 48009


हरदीबाजार में रिश्वत, मारपीट और आत्मदाह की धमकी के आरोपों के बीच कई सवाल, क्या सच सामने आएगा निष्पक्ष जांच से?

कोरबा – कोरबा जिले के हरदीबाजार थाना क्षेत्र में दो युवकों द्वारा पानी टंकी पर चढ़कर आत्मदाह की धमकी देने की घटना ने पूरे क्षेत्र में चर्चा और विवाद का माहौल बना दिया है। एक ओर युवक थाना प्रभारी पर मारपीट और रिश्वत लेने के गंभीर आरोप लगा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पुलिस का दावा है कि दोनों युवक लंबे समय से जुआ-सट्टा गतिविधियों से जुड़े हुए हैं और वैधानिक कार्रवाई के बाद स्वयं को बचाने के लिए दबाव की राजनीति कर रहे हैं।
घटना ने कई ऐसे सवाल खड़े कर दिए हैं जिनका जवाब निष्पक्ष जांच के बाद ही सामने आ सकता है।
क्या था पूरा मामला – प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम नेवसा निवासी रफीक मोहम्मद (22) और दीपेश निर्मलकर (23) को पुलिस ने 9 जून को जुआ-सट्टा संबंधी सूचना पर कार्रवाई करते हुए हिरासत में लिया था। पुलिस के अनुसार दोनों के विरुद्ध प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की गई और कानूनी प्रक्रिया पूरी कर छोड़ दिया गया।
लेकिन इसके दो दिन बाद 11 जून की सुबह दोनों युवक गांव की पानी टंकी पर चढ़ गए। अपने साथ पेट्रोल लेकर पहुंचे युवकों ने टंकी के ऊपर पेट्रोल छिड़ककर आग भी लगाई और हरदीबाजार थाना प्रभारी प्रमोद कुमार डनसेना को निलंबित करने की मांग करते हुए आत्महत्या की चेतावनी दी। करीब तीन घंटे तक चले हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद प्रशासन और पुलिस अधिकारियों की समझाइश पर दोनों नीचे उतरे।
युवकों के आरोप – युवकों का कहना है कि उन्हें पुलिस ने पकड़कर बेरहमी से पीटा, बेल्ट और डंडों से मारपीट की तथा लगभग 24 हजार रुपये रिश्वत लेकर छोड़ा गया। उनका आरोप है कि पुलिस ने दबाव बनाकर उनसे मनचाहा बयान भी लिखवाया।
यदि ये आरोप सही हैं तो यह बेहद गंभीर मामला है और इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

पुलिस का पक्ष – हरदीबाजार थाना प्रभारी प्रमोद कुमार डनसेना ने आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि दोनों युवक क्षेत्र में जुआ फड़ संचालित करते हैं और उनके खिलाफ विधिसम्मत कार्रवाई की गई थी। पुलिस का दावा है कि किसी प्रकार की अवैध वसूली या मारपीट नहीं हुई।
यही वह बिंदु है जहां मामला दो विरोधी दावों के बीच खड़ा दिखाई देता है।
सबसे बड़ा सवाल – अगर रिश्वत ली गई थी तो शिकायत पहले क्यों नहीं? – इस घटना को लेकर कई स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा भी है कि यदि वास्तव में पुलिस द्वारा रिश्वत ली गई थी तो इसकी शिकायत तत्काल वरिष्ठ अधिकारियों, एसपी कार्यालय, आईजी कार्यालय, मुख्यमंत्री जनदर्शन, सीएम हेल्पलाइन या मानवाधिकार आयोग में क्यों नहीं की गई?
क्या युवकों ने पहले कोई लिखित शिकायत दी थी?
क्या उनके पास रिश्वत देने या पुलिस प्रताड़ना के कोई प्रमाण हैं?
या फिर पानी टंकी पर चढ़ने की घटना केवल सहानुभूति और दबाव बनाने की कोशिश थी? ये ऐसे प्रश्न हैं जिनका उत्तर जांच के बाद ही सामने आएगा।
क्या जुआ-सट्टा नेटवर्क पर कार्रवाई से नाराजगी? – इस क्षेत्र में लंबे समय से जुआ और सट्टे की गतिविधियों को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में पुलिस की कार्रवाई के बाद कुछ लोगों में नाराजगी होना भी स्वाभाविक माना जा रहा है।
कई लोगों का मानना है कि यदि पुलिस ने वास्तव में अवैध गतिविधियों पर कार्रवाई की है तो आरोपों के पीछे कार्रवाई को कमजोर करने की मंशा भी हो सकती है। हालांकि यह केवल संभावना है, जिसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
सोशल मीडिया ट्रायल बनाम वास्तविक जांच – इस घटना की वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर पुलिस के खिलाफ और समर्थन में दोनों तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। लेकिन किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले यह आवश्यक है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो।
यदि पुलिस दोषी है तो कार्रवाई होनी चाहिए। यदि आरोप झूठे हैं तो कानून को गुमराह करने वालों पर भी कार्रवाई आवश्यक है।
जांच से ही सामने आएगा सच – हरदीबाजार की यह घटना केवल दो युवकों के विरोध तक सीमित नहीं है। यह पुलिस और जनता के बीच विश्वास, कानून व्यवस्था तथा जवाबदेही से जुड़ा मामला बन चुका है।
अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी इस पूरे घटनाक्रम की किस प्रकार निष्पक्ष जांच कराते हैं और सच्चाई को जनता के सामने लाते हैं।

प्रदीप मिश्रा
निष्पक्ष, निर्भीक और सच्ची खबर, हर खबर पर तिरछी नजर। जनहित के प्रति समर्पित पत्रकारिता के साथ देश में तेजी से बढ़ता विश्वसनीय वेब पोर्टल अंजोर छत्तीसगढ़ न्यूज़।

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