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छेड़खानी और अश्लील वीडियो वायरल करने की धमकी मामले में तीन आरोपी दोषी, 3-3 वर्ष की सश्रम कारावास

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रायगढ़, छत्तीसगढ़

By ACGN 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- अनादि पांडेय

पांच साल पुराने मामले में न्यायालय का बड़ा फैसला, प्रभावी विवेचना और मजबूत साक्ष्यों के आधार पर मिली सजा

रायगढ़ ACGN:- महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में घरघोड़ा स्थित न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी न्यायालय ने तीन आरोपियों को दोषी ठहराते हुए 3-3 वर्ष के सश्रम कारावास एवं अर्थदंड की सजा सुनाई है। न्यायालय ने तरुण कुमार साहू, छबिलाल साहू और उग्रसेन साहू को छेड़खानी, महिला की गरिमा भंग करने तथा अश्लील वीडियो बनाकर वायरल करने की धमकी देने के अपराध में दोषसिद्ध पाया।
प्रकरण थाना पूंजीपथरा क्षेत्र का है। अभियोजन के अनुसार 23 अक्टूबर 2020 को पीड़िता ने थाना पूंजीपथरा में शिकायत दर्ज कराई थी कि वह अपने मंगेतर के साथ बंजारी मंदिर, तराईमाल दर्शन कर लौट रही थी। गोदगोदा नाला घाट के समीप पीड़िता के दिशा मैदान के लिए जाने के दौरान तीनों आरोपी वहां पहुंचे और गाली-गलौज करते हुए अश्लील हरकतें कीं। आरोपियों ने पीड़िता और उसके मंगेतर के कपड़े उतरवाकर उनके अश्लील फोटो और वीडियो बनाए तथा उन्हें सोशल मीडिया में वायरल करने की धमकी देकर पैसों की मांग की।
मामले की विवेचना तत्कालीन थाना पूंजीपथरा में पदस्थ उप निरीक्षक गिरधारी साव द्वारा की गई। विवेचना के दौरान पीड़िता एवं अन्य गवाहों के बयान दर्ज किए गए तथा आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से घटना में प्रयुक्त मोबाइल फोन जब्त किए गए। वैज्ञानिक परीक्षण में मोबाइल फोन से महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य प्राप्त हुए, जिनसे आरोपियों द्वारा अश्लील वीडियो बनाए जाने की पुष्टि हुई।
विचारण के दौरान न्यायालय में पीड़िता, उसके मंगेतर सहित कुल नौ साक्षियों के बयान कराए गए तथा 16 दस्तावेजी एवं भौतिक साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। न्यायालय ने सभी साक्ष्यों और गवाहों के कथनों का परीक्षण करने के बाद पाया कि आरोपियों ने महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाई और उसे भयभीत कर अश्लील सामग्री वायरल करने की धमकी दी।
न्यायालय ने तीनों आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 354-क, 354-ग एवं 509-क के तहत दोषी ठहराते हुए धारा 354-क एवं 354-ग में 3-3 वर्ष तथा धारा 509-क में 1-1 वर्ष के सश्रम कारावास और अर्थदंड से दंडित किया। हालांकि लूटपाट से संबंधित आरोप अभियोजन पक्ष द्वारा सिद्ध नहीं किए जा सके।
मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी श्री सत्यनारायण महिलाने ने प्रभावी पैरवी की। यह फैसला महिलाओं के विरुद्ध अपराधों के मामलों में सशक्त विवेचना, डिजिटल साक्ष्यों के महत्व और प्रभावी अभियोजन की भूमिका को रेखांकित करता है।
रायगढ़ पुलिस अधीक्षक श्री शशि मोहन सिंह ने कहा कि महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा के विरुद्ध अपराध करने वालों के खिलाफ रायगढ़ पुलिस कठोर कार्रवाई और प्रभावी विवेचना के माध्यम से दोषियों को न्यायालय से सजा दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है।

प्रदीप मिश्रा
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