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नया सत्र शुरू, किताबें गायब! पाठ्य पुस्तक निगम पर फूटा निजी स्कूलों का गुस्सा, आंदोलन की चेतावनी

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रायपुर, छत्तीसगढ़

By ACGN 7647981711, 9303948009

“सरकारी स्कूलों तक पहुंचीं किताबें, निजी विद्यालय आज भी इंतजार में”
पाठ्य पुस्तक निगम पर अव्यवस्था, भेदभाव और वितरण में विफलता के गंभीर आरोप

रायपुर ACGN:- नए शिक्षा सत्र 2026-27 की शुरुआत से ठीक पहले छत्तीसगढ़ राज्य अशासकीय विद्यालय संचालक संघ ने छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। संघ ने आरोप लगाया है कि पाठ्य पुस्तक निगम लगातार दूसरे वर्ष भी समय पर पुस्तकों का वितरण करने में विफल साबित हो रहा है, जिससे हजारों निजी विद्यालयों के लाखों विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका है।


संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुबोध राठी एवं प्रदेश सचिव मनोज पाण्डेय द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि छत्तीसगढ़ शासन द्वारा कक्षा पहली से दसवीं तक के विद्यार्थियों को निशुल्क पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध कराई जाती हैं। वर्षों से शासकीय विद्यालयों को कक्षा 1 से 8 तक की पुस्तकें संकुल स्तर पर तथा 9 से 12 तक की पुस्तकें सीधे विद्यालय स्तर पर उपलब्ध कराई जाती रही हैं। वहीं निजी विद्यालयों को जिला मुख्यालय स्तर पर पुस्तकें प्रदान करने की व्यवस्था थी, जिससे वितरण प्रक्रिया अपेक्षाकृत सुचारू रूप से संचालित होती थी।
2025-26 में बदली व्यवस्था, बढ़ी परेशानी – संघ का आरोप है कि सत्र 2025-26 में पहली बार निजी विद्यालयों को पुस्तकों के लिए प्रदेश के छह डिपो पर निर्भर कर दिया गया। परिणामस्वरूप निजी विद्यालयों को बार-बार डिपो के चक्कर लगाने पड़े। कई स्कूलों को सितंबर माह तक पुस्तकें नहीं मिल सकीं, जबकि कुछ विषयों की पुस्तकें पूरे सत्र में उपलब्ध ही नहीं हो पाईं।
संघ ने कहा कि सरकारी विद्यालयों को 15 जून तक पुस्तकों की आपूर्ति कर दी गई थी, जबकि निजी विद्यालयों को लगातार नई-नई तिथियां देकर परेशान किया गया। इससे स्कूल संचालकों को आर्थिक नुकसान और समय की भारी बर्बादी झेलनी पड़ी।
स्कैनिंग व्यवस्था पर भी उठे सवाल – प्रेस विज्ञप्ति में स्कैनिंग व्यवस्था को लेकर भी तीखी आपत्ति जताई गई है। संघ का कहना है कि पिछले वर्ष पहली बार पुस्तकों की स्कैनिंग अनिवार्य की गई। शुरुआत में निजी विद्यालयों को डिपो में जाकर स्कैनिंग करने का निर्देश दिया गया, जबकि सरकारी विद्यालयों को अपने स्कूल स्तर पर यह सुविधा दी गई थी।
संघ के विरोध के बाद निगम को आदेश में संशोधन कर निजी विद्यालयों को भी विद्यालय स्तर पर स्कैनिंग की अनुमति देनी पड़ी। संगठन का कहना है कि इस प्रक्रिया के कारण शिक्षकों का 15 दिन से एक महीने तक का समय केवल स्कैनिंग में व्यतीत हुआ, जिससे शिक्षण कार्य प्रभावित हुआ।


“किताब चोरी” की दलील पर सवाल – संगठन ने पाठ्य पुस्तक निगम द्वारा पुस्तकों की निगरानी के लिए अपनाई गई स्कैनिंग व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसके पीछे यह तर्क दिया गया था कि पुस्तकें कबाड़ या बाजार में बेची जाती हैं। संघ ने दावा किया कि आज तक निगम ऐसा कोई प्रमाण सार्वजनिक नहीं कर सका कि किसी सरकारी या निजी विद्यालय ने पुस्तकों को बेच दिया हो।
संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि जब पुस्तकें विद्यालयों तक पहुंची भी नहीं थीं, तब कुछ पुस्तकें कबाड़ में मिलने की खबरें सामने आई थीं, जिससे वितरण व्यवस्था की पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लगते हैं।
फिर दोहराई जा रही पुरानी व्यवस्था – संघ के अनुसार पिछले वर्ष मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री तथा पाठ्य पुस्तक निगम के अधिकारियों को ज्ञापन देकर निजी विद्यालयों को भी संकुल स्तर पर पुस्तकें उपलब्ध कराने की मांग की गई थी। आश्वासन भी मिला था कि अगले सत्र से वितरण व्यवस्था में सुधार होगा, लेकिन वर्तमान सत्र में भी वही पुरानी व्यवस्था लागू कर दी गई है।
संघ का कहना है कि 16 जून से नया शिक्षा सत्र प्रारंभ होना है, लेकिन 11 जून तक निजी विद्यालयों के लिए पुस्तक वितरण की कोई स्पष्ट समय-सारिणी जारी नहीं की गई है। यदि प्रदेश के लगभग 8 हजार निजी विद्यालयों को केवल छह डिपो के माध्यम से पुस्तकें वितरित की जाती हैं, तो पूरी प्रक्रिया में कई महीने लग सकते हैं।
डीबीटी और खुले बाजार मॉडल की मांग – छत्तीसगढ़ राज्य अशासकीय विद्यालय संचालक संघ ने सुझाव दिया है कि पाठ्य पुस्तक वितरण की जिम्मेदारी पाठ्य पुस्तक निगम से लेकर शिक्षा विभाग को सौंप दी जाए। जिला शिक्षा अधिकारी एवं विकासखंड शिक्षा अधिकारियों के माध्यम से वितरण की व्यवस्था की जा सकती है।
संघ ने यह भी मांग की है कि एनसीईआरटी की तर्ज पर पुस्तकों को खुले बाजार में उपलब्ध कराया जाए तथा सरकार डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से पुस्तक राशि सीधे विद्यार्थियों या अभिभावकों के खातों में जमा करे।

आंदोलन की चेतावनी :- संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि समय पर पुस्तकों की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं की गई तो प्रदेशभर के निजी विद्यालयों को आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए बाध्य होना पड़ेगा। संघ ने पाठ्य पुस्तक निगम को “सफेद हाथी” बताते हुए उसकी कार्यप्रणाली की उच्चस्तरीय जांच कराने और वितरण व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग की है।
जिला अध्यक्ष अक्षय कुमार दुबे ने भी कहा कि जिला स्तर पर बार-बार जानकारी लेने के बावजूद पुस्तक वितरण को लेकर कोई स्पष्ट और संतोषजनक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जा रही है, जिससे विद्यालय संचालकों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

प्रदीप मिश्रा
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