गृहस्थ आश्रम के सबसे बड़े गुरु हैं भगवान शिव, शिव परिवार से सीखें प्रेम, त्याग और एकता का संदेश – डॉ. राजेंद्रकृष्ण पांडे
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गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009
शिवमहापुराण कथा के पंचम दिवस उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, शिव परिवार को बताया आदर्श परिवार का सर्वोच्च उदाहरण
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही ACGN:- जिले के ग्राम खोडरी में चौरसिया परिवार द्वारा आयोजित श्री शिवमहापुराण कथा के पंचम दिवस कथा पंडाल शिवभक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर दिखाई दिया। कथा व्यास आचार्य डॉ. राजेंद्रकृष्ण पांडे ने अपने ओजस्वी एवं प्रेरणादायक प्रवचनों से उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। उन्होंने भगवान शिव के गृहस्थ जीवन की महत्ता का वर्णन करते हुए कहा कि संसार में यदि किसी आदर्श गृहस्थ की चर्चा की जाए तो भगवान शिव का नाम सर्वोपरि आता है। महादेव केवल योगियों और साधकों के आराध्य नहीं हैं, बल्कि वे गृहस्थ आश्रम के भी सबसे बड़े गुरु हैं।
अपने प्रवचन में आचार्य पांडे ने कहा कि वर्तमान समय में परिवारों में बढ़ती दूरियां, रिश्तों में घटता विश्वास, बढ़ता अहंकार और कम होती सहनशीलता समाज के लिए चिंता का विषय बनते जा रहे हैं। ऐसे समय में भगवान शिव का परिवार प्रत्येक व्यक्ति के लिए आदर्श प्रस्तुत करता है। शिव परिवार प्रेम, समर्पण, त्याग, धैर्य, सम्मान, समानता और पारिवारिक एकता का जीवंत उदाहरण है।
उन्होंने कहा कि भगवान शिव कैलाश पर्वत पर अत्यंत साधारण जीवन व्यतीत करते हैं। उनके जीवन में दिखावा, वैभव और भौतिक सुख-सुविधाओं का कोई विशेष महत्व नहीं है, फिर भी वे देवों के देव महादेव हैं। इससे यह संदेश मिलता है कि परिवार की खुशहाली महंगे साधनों से नहीं, बल्कि परस्पर प्रेम, विश्वास, संस्कार और आपसी समझ से आती है।
आचार्य पांडे ने शिव परिवार की विविधताओं में एकता को समाज के लिए अनुकरणीय बताया। उन्होंने कहा कि भगवान शिव का वाहन नंदी बैल है, माता पार्वती का वाहन सिंह, भगवान गणेश का वाहन मूषक और भगवान कार्तिकेय का वाहन मयूर है। प्रकृति के अनुसार ये सभी एक-दूसरे के विरोधी माने जाते हैं, लेकिन शिव परिवार में सभी प्रेम और सामंजस्य के साथ रहते हैं। यह हमें सिखाता है कि परिवार में विचार, स्वभाव और पसंद अलग-अलग हो सकती है, लेकिन दिलों में दूरी नहीं होनी चाहिए।
कथा के दौरान उन्होंने समुद्र मंथन के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि जब हलाहल विष निकलने से समस्त सृष्टि संकट में पड़ गई थी, तब भगवान शिव ने स्वयं विषपान कर संसार की रक्षा की थी। यह घटना केवल धार्मिक प्रसंग नहीं, बल्कि गृहस्थ जीवन का भी एक महान संदेश है। एक आदर्श गृहस्थ वही होता है जो अपने परिवार और समाज की रक्षा के लिए स्वयं कठिनाइयों और कष्टों का सामना करने को तैयार रहता है।
आचार्य पांडे ने भगवान शिव और माता पार्वती के दांपत्य जीवन को आदर्श वैवाहिक संबंध का सर्वोत्तम उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि अर्धनारीश्वर का स्वरूप यह संदेश देता है कि स्त्री और पुरुष दोनों समान रूप से सम्मान और अधिकार के अधिकारी हैं। जहां पति-पत्नी एक-दूसरे का सम्मान करते हैं, एक-दूसरे की भावनाओं को समझते हैं और साथ मिलकर जीवन की चुनौतियों का सामना करते हैं, वहां सुख, शांति और समृद्धि स्वतः निवास करती है।
उन्होंने कहा कि भगवान गणेश और भगवान कार्तिकेय के प्रति शिव-पार्वती का स्नेह आदर्श माता-पिता की भूमिका को दर्शाता है। आज की पीढ़ी को संस्कारवान बनाने के लिए परिवारों में धार्मिक, सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों का वातावरण बनाना आवश्यक है। यदि माता-पिता अपने बच्चों को अच्छे संस्कार देंगे तो समाज स्वतः सुदृढ़ और सशक्त बनेगा।
अपने प्रवचन में आचार्य पांडे ने कहा कि आज का मनुष्य सफलता की दौड़ में इतना व्यस्त हो गया है कि वह अपने परिवार को पर्याप्त समय नहीं दे पा रहा है। जबकि भगवान शिव का जीवन हमें सिखाता है कि परिवार को साथ लेकर चलना ही जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है। जहां परिवार में प्रेम और सद्भाव होता है, वहां स्वयं भगवान का वास होता है।
कथा के दौरान श्रद्धालु शिव परिवार के इन प्रेरक प्रसंगों को सुनकर भावविभोर हो उठे। पूरा कथा पंडाल “हर-हर महादेव” और “बम-बम भोले” के जयघोष से गूंजता रहा। श्रद्धालुओं ने भगवान शिव के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करने का संकल्प लिया।
उल्लेखनीय है कि ग्राम खोडरी में आयोजित श्री शिवमहापुराण कथा क्षेत्र का एक भव्य धार्मिक आयोजन बन चुका है। चौरसिया परिवार द्वारा श्रद्धा, समर्पण एवं सेवा भाव के साथ इस आयोजन का संचालन किया जा रहा है। प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु कथा स्थल पहुंचकर शिवमहापुराण का श्रवण कर धर्मलाभ प्राप्त कर रहे हैं।
कथा के उपरांत प्रतिदिन विशाल भंडारे का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें हजारों श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण कर रहे हैं। आयोजन समिति द्वारा श्रद्धालुओं के लिए पेयजल, बैठक व्यवस्था, प्रसाद वितरण तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं की उत्कृष्ट व्यवस्था की गई है, जिसकी सर्वत्र सराहना हो रही है।
धार्मिक वातावरण, शिवभक्ति की अविरल धारा और श्रद्धालुओं की अपार उपस्थिति से पूरा खोडरी गांव शिवमय हो उठा है। क्षेत्रवासियों का मानना है कि ऐसे धार्मिक आयोजन न केवल आध्यात्मिक चेतना को जागृत करते हैं, बल्कि समाज में नैतिक मूल्यों, पारिवारिक एकता, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक परंपराओं को भी मजबूत करते हैं।
अपने प्रवचन के समापन पर आचार्य डॉ. राजेंद्रकृष्ण पांडे ने कहा, “यदि संसार का प्रत्येक परिवार भगवान शिव के परिवार से प्रेम, त्याग, सम्मान और एकता की सीख ले ले, तो समाज की आधी समस्याएं स्वतः समाप्त हो जाएंगी।”
प्रदीप मिश्रा
निष्पक्ष, निर्भीक और सच्ची खबर, हर खबर पर तिरछी नजर। जनहित के प्रति समर्पित पत्रकारिता के साथ देश में तेजी से बढ़ता विश्वसनीय वेब पोर्टल अंजोर छत्तीसगढ़ न्यूज़। :::
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